दर्द – खुशी  

मै सुधा जिसके जीवन में सब है एक खुशहाल परिवार।प्यार करने वाला पति मोहन दो बेटे वरुण और अमन एक प्यारी सी बेटी नीतू सब हैं पर फिर भी एक दर्द है जो मुझे कचोटा है कि मैं मोहन जैसे सजन व्यक्ति को दुख दे रही हूं उन्हें मैने धोखा दिया है।वो कई बार कहते हैं तुम कहा खो जाती हो ऐसा लगता है यहां हो ही नहीं।

मै टाल जाती समय बीत रहा था बच्चे बचपन लाँघ जवानी की दहलीज पर आ रहे थे।कई बार बच्चे कहते मां हम नानू के यहां क्यों नहीं जाते।मामा भी त्यौहार पर आ टिका राखी करवा कर चले जाते हैं।पर हम उनके यहां क्यों नहीं जाते ।मोहन कहते आप लोग चले जाओगे तो पापा का दिल कैसे लगेगा।बचपन में बच्चे बहल जाते  पर मै जानती थी कि ये उनके सवालों के जवाब नहीं है।

तो अब मै अपनी कहानी पर आती हूं।मै सुधा तीन भाइयों में सबसे छोटी और कहते हैं हमारी 5 पीढ़ियों के बाद मै लड़की पैदा हुई तो मां दीनानाथ और मां सुलोचना की  मैं जान थी ।विवेक ,महेश और सुरेश भैया तो  मेरे नखरे उठाते नहीं थमते थे।घर परिवार भी ईश्वर की दया से सम्पन्न था पारिवारिक व्यवसाय था जो पिता जी और भाई संभाल रहे थे।

बड़ी भाई की शादी हुई  आरती भाभी मुझे बहुत चाहती थीं।  उनकी मेरी बहुत पटती थी फिर दूसरी भाभी आई मोहिनी वो अच्छी थी पर कॉलेज में प्रोफेसर थी  तो उन्हें टाइम कम ही होता हा पर शनिवार रविवार वो घर में सबके साथ गप्पे लड़l ती अपने काम करती खुशी खुशी जिंदगी कट रही थी। 

मै भी कॉलेज के आखिरी साल में थी कि आरती भाभी का भाई भरत हमारे शहर आया था उसे बैंक की परीक्षा देनी थी और कोचिंग भी  करनी थी उसने पीजी में रहने की बात की परंतु मेरे पिताजी ने कहा बेटा इतना बड़ा घर है यही रहों ना हा ना करते करते भरत हमारे घर रहने लगा मै बी काम कर रही थी तो स्टेट्स और अकाउंट में मुझे दिक्कत होती तो भाभी के कहने पर भरत मुझे पढ़ाने लगा पढ़ाते पढ़ते कब हम एक दूसरे को दिल दे बैठे पता ही नहीं चला।

जीने मरने की कसमे खा ली घर के अंदर तो हम मिलते ही थे बाहर भी मिलने लगे।मैने आरती भाभी को बताया भरत ने भी बोला भाभी बोली तुमने ये क्या किया घर में कोई नहीं मानेगा।पापा तुम्हारे लिए लड़का देख रहे हैं।भाभी प्लीज़ मैं मर जाऊंगी आप कुछ करो अभी तुम दोनों सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दो कुछ बन जाओगे तो मैं बात कर सकती हूं।

भाभी के कहने पर हमने पढ़ाई में ध्यान लगाया पेपर दिए भरत की भी परीक्षा हो गई कॉलेज के आखिरी दिन हम मिले और अपनी मर्यादा हम लांघ गये।शाम को मै घर पहुंची तो देर हो गई थी।मां दरवाजे पर थी आज बहुत देर कर दी तुमने मां एग्जाम खत्म हुए तो सहेली के साथ चली गई थी।

थोड़ी देर में भरत भी आया सब खाना खाने बैठे ।भैया ने भरत से पूंछा पेपर हो गया भरत बोला जी  अब रिजल्ट का इंतजार है सोच रहा हूं कल घर निकल जाऊं।मेरा चेहरा पीला पड़ गया मैने भरत को देखा मां ने शायद नोटिस कर लिया था।मै रात को सबके सोने के बाद मैं छत पर आई पीछे पीछे भरत भी था।

मै आते ही उसकी बाहों में समा गई मुझे छोड़ कर जा रहे हो मै मर जाऊगी तुम्हारे बिना अरे मै भी कहा रह सकता हूं बस रिजल्ट का इंतजार है फिर तुम्हारा  हाथ मांग लूंगा।सुधा और भरत एक दूसरे में सम।य  हुए थे।तभी सुधा की मां सुलोचना आ पहुंची एक चाट।

सुधा के मुंह पर पड़ा तुम घर की इज्जत को मिट्टी में मिला रही हो मुझे तुम पर शक था कुछ दिन से वो आज यकीन में बदल गया लड़के तुम सामान उठाओ और निकलो यहां से दुबारा हमारी जिंदगी में मत आना।मां ऐसा मत करो मेरी जिंदगी है वो मैं जिंदा नहीं रहूंगी। जाओ लड़के अपना सामान बांधो और सुबह होते ही निकल जाओ यहां से ।

सुधा नीचे आई और रोने लगी मां हाल में ही बैठी थी दिन निकलने का इंतजार कर रही थी। सुबह सबके उठने से पहले आरती भाभी को बोल भरत चला गया। दीदी आपकी सास को सब पता चल गया है अब आप देखो क्या करना है।पीछे से सुलोचना ने सब सुन लिया बोली बहु तुम भी इस सब में शामिल थी छी अपने परिवार की इज़्ज़त मिट्टी में मिला रही थी।

नहीं मां ये दोनों एक दूसरे को चाहते है और शादी करना चाहते हैं। चुप रहो तुम ये कभी नहीं होगा नाश्ते पर सुलोचना जी ने दीनानाथ से कहा बेटी की परीक्षा हो गई है कोई अच्छा लड़का देखिये और जिम्मेदारी पूरी कीजिए ।इतनी जल्दी क्या है मां सुरेश बोला ।तुम चुप रहो मै तुम्हारी और सुधा की एक ही मंडप में शादी करना चाहती हूं।

जैसी आपकी मर्जी रिश्ते देखिए सुधा बाहर आई मै शादी करूंगी सिर्फ भरत से मै उसे चाहती हूं ।विवेक भैया बोले ये क्या कह रही हो कुछ शरम है तुम्हे आरती ये क्या हो रहा है।इससे क्या पूछते हो ये सब इसी का किया धरा हैं। इसलिए ये अपने भाई को यहां ले  कर आई उसे मै यहां से निकाल दिया है।

सुधा ज़िद करती रही रोती रही एक दो लड़के भी भगा दिए इसी बीच विवेक ने आरती को उसके मायके भेज दिया। और भरत को भी समझाया कि अगर चाहते हो कि तुम्हारी बहन को तलाक ना हो बच्चों के सिर से बाप का साया ना उठे तो मेरी बहन का पीछा छोड़ दो।

भरत ने सुधा को फोन कर कह दिया वो कही और शादी कर रहा है तुम भी कोई और देख लो।तभी  मोहन का रिश्ता आया जो चार्टड अकाउं टैंट थे। घर में मां पिताजी थे जो रेलवे से रिटायर्ड थे। एक बहन थी निधि जिसका विवाह हो चुका था।  सबको सुधा पसंद आई और चट मगनी पट ब्याह हो गया।

ये शादी भी इसलिए हुई क्योंकि दीनदयाल जी ने उसे धमकी दी थी यदि इस रिश्ते से मना किया तो मै खुद खुशी कर लूंगा और भरत के मना करने के बाद तो उसकी उम्मीद टूट गई।शादी हो कर सुधा घर आ गई पर वो मोहन से दूरी बना कर रखती जब भी वो पास आते तो वो दूर हो जाती इसी बीच आज सुबह से उसकी तबीयत कुछ नासाज थी

वो मोहन को बोली मुझे मेरी सहेली  के यहां जाना है आप छोड़ देंगे।मोहन ने कहा चलो मैं छोड़ दूंगा। मै अपनी सहेली ऋतु के यहां गयी और उसे बताया आज मैं ठीक नहीं हूं तू डॉक्टर के यहां चल मेरे साथ वो दोनों गायनी के पास गई। डॉक्टर बोली तुम 1.5 महीने की प्रेग्नेंट हो।

सुधा घबरा गई अब क्या होगा कैसे बताऊंगी मैं सब । ऋतु बोली सब्र कर खुद मोहन के साथ शुरुआत कर कई बार पहली बार में ही गर्भवती हो सकते  हैं।सुधा घर आई तब तक मोहन आ गए थे मिल आई सहेली से जी सुधा बोली उसने आराम से खाना बनाया दोनो ने साथ खाना खाया

आज सुधा का मूड अच्छा देख मोहन उसके पास आया तो उसने रोका नहीं अगले कुछ हफ्तों बाद सुधा ने बता दिया कि मैं गर्भवती हूं।घर में सब खुश थे।  ससुर सासु जी भी मोहन और सुधा के पास आ गए।घर की पहली खुशी थी सुधा ने डॉक्टर से पहले ही रिक्वेस्ट की थी मेरे पति को सच्चाई नहीं पता चलनी चाहिए।

8 महीने में दुनिया के लिए सुधा ने बेटे को जन्म दिया जिसका वजन और कद सब अच्छा था कोई कहता ही नहीं था कि आठ महीने का बच्चा है।बच्चे का नाम करण हुआ सब आए आरती भाभी नहीं थी।भैया ने उन्हें सजा दी थी सब सिर्फ रस्मे निभाने आयें थे। साल बीते मोहन और सुधा की जिंदगी अच्छी कट रही थी तीन बच्चों के माता पिता बन गए थे

वो परंतु सुधा को वो दर्द हमेशा सालता की भाभी का घर मेरी वजह से टूटा और मैने मोहन से झूठ बोला अब वो डिप्रेस्ड रहने लगी थी आज मोहन के जिगरी दोस्त के बेटे की शादी थी वहां पर मोहन सुधा को भी ले गया वो दोस्त और कोई नहीं भरत का भाई विराज  था।

आज विराज के बेटे की शादी थी वहां आरती भाभी भी मिली गले लग सुधा रोई भाभी आपका दर्द मेरे कारण आया नहीं रे ये मेरी किस्मत में था तभी ऐसा हुआ मेरा भाई और मैं दर्द झेलते रहे तभी सामने से भरत आया भरत ने अपनी नजरें फेर ली बोला बता दूं तुम्हारे पति को सब तुम्हारा घर भी टूटना चाहिए कितना समझाया तुम्हारे भाई को पर वो नहीं माना ।

बच्चे ले गया पर मेरी बहन को छोड़ दिया ना तलlक दिया  अपने नाम पर बिठा कर रखा।मैने शादी नहीं की और तुम मज़े की जिंदगी जी रही हो तो ये शादी ।ये तो हमारे भैया विराज के बेटे की शादी है ।सुधा वही चक्कर खा कर गिर पड़ी उसे हार्ट अटैक आया था। इमरजेंसी में एडमिट करवाया गया बच्चे आरती मोहन और भरत सभी वही थे।

सुधा के मायके वाले भी पहुंचे आरती को देख विवेक स्तब्ध हो गया भरत को देख उसे गुस्सा आया मोहन ने ही बताया मेरे मित्र का भाई है हम विवाह में गए थे वही ये सब हुआ  ।सुधा की तबीयत खराब थी दो स्टंट डालने पड़े आज icu से  वार्ड में आई उसने मोहन को बुलाया बोली मोहन अब मेरे दर्द की इंतिहा हो चुकी हैं आपने मुझे इतना प्यार दिया  परंतु मैंने आपको धोखा दिया कुछ मत बोलो तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है।

नहीं मोहन प्लीज़ मुझे बोलने दीजिये। जब हमारा विवाह हुआ तब मै  आपके पसंद नहीं करती थी।मै ये विवाह नहीं करना चाहती थी क्याोंकि  मैं किसी और को चाहती थी पर  घर वालो के दवाब के कारण मै तैयार हुई।फिर मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हूं ये राज़ मैंने आप से छुपाया मुझे माफ कर दीजिए।

मोहन वरुण आपका बेटा नहीं है वो मेरा और भरत  केा बेटा है।मोहन बोले  तुम  चुप रहो तबीयत  खराब हो जाएगी । मैं सब जानता हूं मुझे डाक्टर ने सब बता दिया था पर मैं उस निष्पाप बच्चे का उसमें क्या दोष था और यह राज कभी बाहर नहीं आनी चाहिए। वरूण सिर्फ मेरा बेटा है। सुधा घर आ गई बच्चे मिल कर चले गए जाना नहीं चाहते थे पर एग्जाम की वजह से जाना पड़ा।

मोहन ने सुधा के मायके वालों को बुलाया और उनसे कहा कि जो हो गया उसे भूला कर आगे बढ़ना चाहिए। आरती भाभी को भी अपना लीजिए। इस बार की राखी सुधा अपने मायके में मनाएगी। मैं भी आऊंगा अपने बच्चों के साथ। मोहन की मेहनत रंग लाई पूरा परिवार साथ आ गया। आज राखी थी सब खुश थे। आज बरसों बाद सुधा अपने मायके आई थी आरती भाभी को देख बहुत खुश हुई और सुधा ने माफी मांगी।

मोहन बोले एक नई शुरुआत है। सुधा को उसका मायका मिल गया और बच्चों को उनका ननिहाल। सब खुश रहो आज पूरा परिवार बरसों बाद साथ आया था। सुधा ईश्वर को धन्यवाद दे रही थी मोहन जैसे जीवन साथी देने के लिए।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी

खुशी

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