‘एहसास अपनों का!’ – प्रियंका सक्सेना

“मम्मी, विनीत का स्थानांतरण अहमदाबाद हो गया है, इसी महीने हम लोग शिफ्ट कर जाएंगे।” सुनंदा ने सरला जी को  बताया “बेटा, अभी तुम लोगों को लखनऊ आए एक साल ही हुआ है और फिर से ट्रांसफर हो गया?” आश्चर्य से सरला जी ने कहा “मम्मी, आप तो जानती ही हों, विनीत की सेंट्रल गवर्नमेंट … Read more

अलविदा भीगी आँखों से – गोमती सिंह

——सरस्वती और मंदाकिनी दोनों बैठकर आपस में पुरानी बातों को याद कर रहे थे।            सरस्वती बोल रही थी-पता है मंदाकिनी, मेघा जब स्कूल जाती थी तब मेरे से ही चोटी बनवाती थी । कभी-कभी उसकी चाची बोल देती “आओ मेघा मैं छोटी बना देतीं हूँ, माँ जी कुछ दुसरे काम में ब्यस्त है । ” … Read more

नया पन्ना —डा. मधु आंधीवाल

मां आज मेरा फाइनल इन्टरव्यू है आज तो कुछ बोलो मां केवल तुम्हारे बोल सुनने को मैं तरस गयी । मां पापा और सब परिवार वालों की सजा मुझे क्यों दी मां ? ये एक विनती उस यौवना की थी जिसका नाम युविका था । वह मौन साधिका अपूर्व सुन्दरी कभी यौवनावस्था में चांद भी … Read more

अनाम – सुधा शर्मा     

 अचानक सामने कुमार और रोहित को देखकर मै चौंक गयी । मैंने प्रश्न वाचक निगाहो  से दोनों की तरफ देखा मुँह से आवाज़ तक नहीं निकली। फिर कुमार की ओर मुखातिब हो कर कहा,’आप? क्या बात है?” इससे पहले कि कुमार कुछ कहते रोहित बोल उठा,”माँ,उनसे मत कहो कुछ मैं उन्हें यहाँ लाया हूँ ।”  … Read more

सुसाइड नोट – डॉ. सुनील शर्मा

न जाने क्यों, अब जीने की इच्छा ही नहीं रही. बूढ़े शरीर में दिमाग़ भी अब सुस्त हो गया है. आंखों की रोशनी और जीभ का स्वाद तो कब का चला गया.पेट में कुछ पचता नहीं. दांत भी एक एक कर साथ छोड़ गए. नहीं नहीं, कुछ बीमारी नहीं. बस थकान रहती है, चलने सा … Read more

भाई – सुधा शर्मा

रात में कोई दरवाजा खटखटा रहा था। देखा छोटा खड़ा था। भडभडाते हुए अन्दर आकर बरस पड़ा,’ये क्या भाई  , मुझे इतना पराया कर दिया? खबर नहीं कर सकते थे? इतनी परेशानी मे हो और मुझे खबर नहीं  ?मुझे दूसरों से पता चला।” फूट फूट कर रोने लगा वह।  मैने उसे गले लगा लिया ।’मै … Read more

सौतेली माँ – पूनम अरोड़ा

आरव जब छैः वर्ष का था तो दुर्भाग्यवश  उसकी माँ  का देहांत  हो गया। वह छोटा था किन्तु  माँ  के विछोह का दर्द  उसमें  उन सबसे कहीं  ज्यादा था जो उसकी माँ  के लिए शोक व्यक्त  करते थे। वे शोक  करने से अधिक उसके लिए अधिक संवेदना  प्रकट करते थे। “अब इस बेचारे  का क्या … Read more

सास “मुर्गी” नहीं बहू “बंदरिया” है – मीनू झा 

क्या नाम है तुम्हारा बेटा..–लगभग रोज पार्क में मिल रही उन आंटी ने उस दिन प्रिया को टोक ही दिया। प्रिया…आप हमारे बिल्कुल सामने वाले घर में आई है ना आंटी…भैया की मम्मी है या भाभी की?? बेटे बहू है मेरे सुकेश और रिया…आठ दिन हो गए आए यहां मुझे। आंटी बेटे के घर में … Read more

हम कितने स्वार्थी हैं – नीरजा कृष्णा 

आज सुबह से ही उनके घर में रौनक है,वरना जब से उनके बेटे रोहित की बहू की कैंसर से मौत हुई है, लोग जैसे हँसना बोलना ही भूल गए हैं। मधु तीन वर्ष के मोहित को छोड़ गई है।  येन केन प्रकारेण वो सब घर और बच्चा सम्हाल रहे थे कि उन्हें मंजरी के विषय … Read more

बेसहारा – रश्मि स्थापक

“अरे! भानू… यह वही हाथ-गाड़ी है न जिसमें जगन को ले जाते थे तुम …।” मोहल्ले की सोसाइटी के अध्यक्ष नरेश ने पूछा। “हाँ साब…अस्सी से ऊपर के हो गए थे चाचा… दिखता बिल्कुल नहीं था उन्हें इसीलिए मैंने खुद ये गाड़ी उनके लिए बनाई थी…  उन्होंनें काम करना कभी नही छोड़ा … मैं उन्हें … Read more

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