माटी, मर्यादा और सोने के पत्ते
विद्याधर जी की आँखें भर आईं। उन्होंने कबीर को उठाकर गले से लगा लिया और उसकी पीठ थपथपाते हुए कहा, “जीते रहो मेरे लाल। आज तुमने पत्तियों के साथ जो मर्यादा और आदर मुझे दिया है, यही इस कुल का असली सोना है। जब तक घर के बच्चों में अपनी जड़ों के प्रति ऐसा आदर … Read more