कर्ज रोशनी का – गोविंद गुप्ता
राधिका उनके चरणों में गिर पड़ी और रोने लगी। उसने अपना परिचय दिया और अपनी पहली तनख्वाह का लिफाफा उनके हाथों में रख दिया। “मांजी, मैं राधिका। आपने मुझे जो जीवनदान दिया था, आज मैं आपका वह कर्ज चुकाने आई हूँ। यह मेरी पहली तनख्वाह है। आपकी उस रात की मदद ने एक गरीब की … Read more