संयुक्त परिवार

रघुनाथ जी ने मीरा के सिर पर हाथ रखते हुए उसे बीच में ही टोक दिया। “नहीं बेटी, गलती तुम्हारी नहीं थी। तुमने तो अपने पिता को दिया हुआ वादा आठ सालों तक बहुत ही खूबसूरती से निभाया। गलती मेरी थी जो मैं ये समझ नहीं पाया कि प्यार से सींचा हुआ पौधा जब बड़ा … Read more

नन्हा सा फ़रिश्ता

लगभग पाँच सालों के एक लंबे अंतराल के बाद मेरा अपनी कॉलेज की सबसे करीबी दोस्त स्मृति के घर जाना हुआ। हम दोनों की पोस्टिंग अलग-अलग शहरों में होने के कारण मिलना बहुत मुश्किल हो गया था, लेकिन इस बार जब मुझे देहरादून के एक सेमिनार में हिस्सा लेने का मौका मिला, तो मैंने सोच … Read more

घर को घर रहने दो

देविका जी को हर चीज़ एकदम परफेक्ट चाहिए होती थी। रोहन और अनन्या को अपने ही घर में किसी मेहमान की तरह रहना पड़ता था। सोफे पर बैठकर खाना मना था, क्योंकि कवर गंदे हो जाएंगे। बिस्तर पर सिलवटें नहीं पड़नी चाहिए। खिलौने खेलने के तुरंत बाद उनके डिब्बे में पैक हो जाने चाहिए। दोस्तों … Read more

खोखली बुनियाद – मंजू अग्रवाल

“भाभी, मुझे पता है आज आपको अपने भैया की बहुत याद आ रही होगी। लेकिन आप उदास मत होइए, समर भैया हैं ना, वो भी तो आपके भाई जैसे ही…” विशाखा अपने शब्द पूरे भी नहीं कर पाई थी कि उसे लगा उसने कुछ गलत कह दिया। लेकिन काव्या ने बहुत ही शांत स्वर में … Read more

अपनत्व

शारदा स्तब्ध रह गई। वह सुमेधा को और फिर उसके हाथ में उस चाय के कप और ताजे खाने को अवाक होकर देखती रही। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे। कहाँ सुबह से वह एक-एक घूंट चाय के लिए तरस रही थी, जलालत सह रही थी, और कहाँ इस अनजान लड़की … Read more

वो आंसू खुशी के थे

रघुनाथ जी मुस्कुराए, पर उस मुस्कान में एक अजीब सा दर्द था। उन्होंने बहुत ही धीमी लेकिन चुभने वाली आवाज में पूछा, “और… इंसानियत? आत्मीयता? क्या ये मशीन वो भी मंगवा सकती है? क्या ये बता सकती है कि तेरी मां जब रसोई में अकेले काम करती है, तो उसके दिल में अपने बेटे से … Read more

मुक़ाबला

सरिता ने काव्या का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके माथे को चूमते हुए कहा, “पागल लड़की! दुनिया का कोई भी डर, कोई भी ब्लैकमेलर एक माँ की ममता से बड़ा नहीं हो सकता। माना कि तूने लापरवाही की, लेकिन इस डर से तू अपने ही परिवार से कट जाएगी? जब भी ज़िंदगी में … Read more

दो पीढ़ियों का रिश्ता

लंदन की सर्द और भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, जब कार ने बनारस की संकरी और जानी-पहचानी गलियों में प्रवेश किया, तो कबीर के चेहरे पर एक अजीब सी सुकून भरी मुस्कान तैर गई। कबीर और उसकी पत्नी मायरा शादी के तीन साल बाद पहली बार भारत आ रहे थे। मायरा वैसे तो भारतीय मूल … Read more

सौतन

मान्या  पिछले कई दिनों से एक अजीब सी बेचैनी से गुजर रही थी। आठ साल की शादीशुदा जिंदगी में उसने कभी रोहन पर शक करने का कोई कारण नहीं पाया था। रोहन एक जिम्मेदार पति और उनके पांच साल के बेटे, आरव का बहुत प्यारा पिता था। दोनों की जिंदगी एक शांत नदी की तरह … Read more

भाई का निस्वार्थ प्रेम

“तू बहुत बड़ा मूर्ख है, केदार! तुझे क्या लगा, मुझे तेरी चोरी का पता नहीं चलेगा?” सोमनाथ रुंधे गले से बोला। केदार भी रोते हुए मुस्कुराया, “और आप? आप कब से इतने चालाक हो गए भैया कि मेरे ही बक्से में सेंध मार दी?” दोनों भाई एक-दूसरे के गले लगकर बच्चों की तरह रो रहे … Read more

error: Content is protected !!