वजूद की लड़ाई

 रीमा  वहीं बुत बनकर खड़ी रह गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसकी गलती क्या है? क्या उसका विधवा होना उसका अपराध है? या उसका किसी के आगे हाथ न फैलाकर खुद कमाना उसका गुनाह है? क्यों पुरुष वर्ग उसे बस एक इस्तेमाल की वस्तु समझता है, और जब अपनी पत्नी के सामने … Read more

छलावे की बुनियाद

 रघुनाथ जी ने बिना किसी भाव के कहा, “मेरी बेटी कल रात मर गई है। मैं आज उसका श्राद्ध कर रहा हूँ। आज के बाद इस घर में उसका नाम नहीं लिया जाएगा।” एक पिता का दिल टूटकर बिखर चुका था। उन्होंने जीते-जी अपनी बेटी का पिंडदान कर दिया। इधर, ट्रेन में सफर करते हुए … Read more

औरत का दिल

थोड़ी सी शर्म कर! तू एक जानवर से भी बदतर है। जिस बाप ने तुझे उंगली पकड़ कर चलना सिखाया, आज जब उसे तेरी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तो तूने उसे मरने के लिए छोड़ दिया। और जिस औरत पर तू ये हाथ उठा रहा है, आज उसी की वजह से तेरे पिता की सांसें … Read more

डांट में छिपे अथाह प्रेम – संगीता अग्रवाल

“अब तूने मुझे अपने हाथ से खिलाया है, तो थोड़ा मैं भी तुझे खिला दूँ। सुबह से तूने भी तो कुछ ढंग का नहीं खाया होगा मेरी इस ज़िद के चक्कर में,” शांति देवी ने कहते हुए एक निवाला सुमेधा के मुँह में डाल दिया। अयान, जो दरवाज़े के पीछे खड़ा सब कुछ सुन और … Read more

 काश… मेरा अपना कोई घर होता

विकास भी हमेशा अपने माता-पिता का ही पक्ष लेता। धीरे-धीरे बच्चों के मन में भी यह बात बैठ गई कि घर में असली सत्ता दादा-दादी और पापा की है, माँ तो बस घर का काम करने के लिए है। जैसे-जैसे शशांक और नव्या बड़े हुए, उन्होंने भी अंजलि की बातों को अनदेखा करना शुरू कर … Read more

शादी का डर

अंशुमन अब पूरी तरह से झुंझला चुका था। उसे लग रहा था कि उसकी माँ उसकी भावनाओं और उसके डर को समझने के बजाय सिर्फ समाज की रीतियों को महत्व दे रही हैं। उसने चिढ़कर कहा, “माँ, आप नहीं समझेंगी। मुझे ऐसे किसी विश्वास की ज़रूरत नहीं है जिसका टूटना मेरी और आपकी बर्बादी का … Read more

मुक्कमल इश्क़

मेरा नाम लेते ही उसके हाथ कांप गए। उसने झटके से मेरी तरफ देखा। वो पत्थर जैसी दिखने वाली लड़की की आँखों में अचानक समंदर उमड़ पड़ा। वो कुछ बोल नहीं पा रही थी, बस मुझे एकटक देखे जा रही थी, जैसे यह यकीन करना चाहती हो कि यह कोई सपना तो नहीं है। वो … Read more

त्याग की मूरत

कमरे में एक भारी सन्नाटा छा गया। प्रेरणा के चेहरे पर एक अजीब सी शून्यता आ गई। उसने अपनी आँखों में आए आँसुओं को पलकों के पीछे ही रोक लिया। कुछ पल बाद, प्रेरणा ने गहरी सांस ली, अपने चेहरे पर एक झूठी लेकिन मजबूत मुस्कान लाई और आशा  के पास जाकर उसके सिर पर … Read more

पछतावा

रात के ग्यारह बज चुके थे। पूरे घर में खामोशी छा गई थी। सास-ससुर को दवाइयां देकर सुलाने, ननद और देवर के नखरे उठाकर उन्हें मनपसंद भोजन कराने, और अंत में पति को खाना परोसने के बाद, मीरा ने रसोई समेटी थी। हमेशा की तरह बर्तन मांजने के बाद जो थोड़ा-बहुत ठंडा खाना बचा था, … Read more

 मेरा घर सचमुच किसी स्वर्ग से कम नहीं है

“तुम कहते हो कि वो चिड़चिड़ी हो गई है? ज़रा सोचो, जिस लड़की को तुम शादी से पहले रेस्टोरेंट, सिनेमा और पार्क में घुमाते थे, पत्नी बनने के बाद तुम उसे कहां ले जाते हो? रिश्तेदारी की शादियों में जहां उसे घूंघट निकालकर सबकी जी-हुज़ूरी करनी होती है, मुंडन में, पूजा-पाठ में, या फिर किसी … Read more

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