मौन की दीवारें 

 अगले कुछ हफ़्ते उस छोटे से फ्लैट में एक दमघोंटू सन्नाटे की तरह गुज़रे। दोनों एक ही बिस्तर पर सोते थे, लेकिन उनके बीच अनकहे शब्दों की एक विशाल खाई बन चुकी थी। नयना को लगने लगा कि उसकी आधुनिकता, उसकी समझदारी और उसकी स्वतंत्रता शायद इस मौन के सामने हार रही थी। उसने महसूस … Read more

ममता की कोई जात नहीं होती

कौशल्या देवी ने बहुत ही गंभीर, मगर स्पष्ट और बुलंद आवाज में कहा, “कांति बहन, तुम हमारी समवयस्क हो, इसलिए तुम्हारी बात का मान रखते हुए बड़े प्यार से एक बात पूछना चाहती हूं। जब कोई बच्चा अपनी मां के गर्भ में नौ महीने पलता है, तो क्या उस मां का खून, उसकी हड्डियां और … Read more

आँचल की छाँव

 सलोनी पलटी और उसने गौरव की आँखों में सीधे देखा, “तमाशा मैंने नहीं, तुम्हारी संवेदनहीनता ने खड़ा किया है भैया। जो इंसान कल तुम्हारे लिए एक गैर-जरूरी बोझ था, आज उसके जाने पर तुम्हें सिर्फ अपनी झूठी लोक-लाज की चिंता है? तुम्हें मुबारक हो यह बड़ा मकान, मैं अपने भगवान को अपने साथ ले जा … Read more

विदाई की धूप

 सावित्री जी के होंठ थरथराए। अतीत की एक पूरी किताब उनकी आँखों के आगे खुल गई। चौबीस बरस पहले की वह सर्द रात याद आ गई, जब अनघा के पिता, स्वर्गीय रमेश जी, एक भयानक सड़क हादसे में उन्हें और छह महीने की नन्हीं अनघा को बेसहारा छोड़कर चले गए थे। उस समय सावित्री की … Read more

 आंसुओं की छांव

 मेरे मन में उस समय चाचा और चाची के प्रति नफरत का एक ऐसा ज्वालामुखी धधक उठा था कि मैं रात को सोते हुए भी कांप उठती थी। सपने में भी अगर चाची का भयानक, तानों से भरा चेहरा नजर आता, तो मैं चीखकर उठ बैठती थी। जिस इंसान ने मेरी मां को बेबसी की … Read more

खून का मोल

फ्लैट की बालकनी में टहलते हुए सिद्धांत की नजर बार-बार कमरे के भीतर जाती, जहां प्रिया पलंग पर सिरहाने के सहारे बैठी गहरी-गहरी सांसें ले रही थी। डॉक्टर ने साफ कह दिया था कि नौवां महीना लग चुका है और किसी भी दिन खुशखबरी आ सकती है। सिद्धांत के चेहरे पर खुशी की जगह बेचैनी … Read more

मातृत्व की अधूरी प्यास

तीन होनहार बेटों और भरे-पूरे संसार के बीच जब एक माँ ने अचानक अनाथालय से नन्हीं जान को गोद लेने की ज़िद ठानी, तो पूरा परिवार स्तब्ध रह गया; पर उसके पीछे की जो वजह सामने आई, उसने हर किसी की आँखें नम कर दीं। शाम की हल्की ढलती धूप जब विशाल बैठक के बड़े … Read more

नींव का मौन पत्थर

सरिता की आँखों से एक बूँद आँसू छलक कर गाल पर ढुलक गया। आज उसके भीतर बरसों से जमी बर्फ पिघलने लगी थी। उसने अपने काँपते होठों को संभाला और बहुत ही संयमित आवाज़ में कहा, “दिनेश जी, शादी के बाद इस घर को संभालना और अपना पूरा जीवन इस चौखट पर न्योछावर करना मेरी … Read more

माँ का मौन और एक बेटे का अहसास

आज उसे एहसास हुआ था कि हम बच्चे कितने स्वार्थी हो जाते हैं। हम अपने करियर, अपनी ज़िंदगी, अपने दोस्तों और अपनी नई ज़रूरतों में इतने खो जाते हैं कि हमें यह दिखाई ही नहीं देता कि हमारे माता-पिता उसी पुरानी धुरी पर खड़े रहकर हमारी सफलता की इमारत को सहारा दे रहे हैं। रोहन … Read more

ढलती सांझ का उजाला

सुमन की आंख से एक आंसू ढुलककर गाल पर आ गिरा। उसने आईने की तरफ इशारा करते हुए कहा, “क्या आपको दिख नहीं रहा? मेरे चेहरे की ये झुर्रियां, ये ढलती जवानी… मुझे तो खुद से नफरत होने लगी है। मैं अब पहले जैसी खूबसूरत नहीं रही।” निखिल ने मुस्कुराते हुए सुमन का हाथ अपने … Read more

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