पापा वाली गाड़ी में पेट्रोल कैसे खत्म हो सकता है, गाड़ी तो चली ही नहीं। पवन और अमित के हॉस्टल जाने के बाद मैंने खुद गाड़ी की टंकी फुल करवाई थी। नीचे ही तो खड़ी हुई थी चलो मम्मी से पूछते हैं। रहने दो, हो सकता है अब तक सो गई होंगी वैसे तुमने नोटिस नहीं किया अब मम्मी खुद ही किसी से बात नहीं कर रही, हमारे आने तक सो जाती हैं और सवेरे भी अब अपने दांत दर्द या कि चश्मा का नंबर बदलवाने के लिए आंखों के डॉक्टर के पास जाने के लिए भी नहीं कहतीं। कहीं मम्मी की तबीयत तो खराब नहीं है ? निशा तुम्हें देखना चाहिए था नितिन बोला। हम दोनों साथ जाते हैं और साथ ही आते हैं तुम्हें क्यों नहीं पूछना चाहिए? तुमको माताजी का ख्याल खुद भी तो रखना चाहिए।
आइए आपको नितिन और निशा से मिलाऊं। नितिन और निशा दोनों की पास के मॉल में एक गिफ्ट शॉप है। उनके दोनों बेटे हॉस्टल में पढ़ते है।
दोनों मॉल में सुबह 10:00 बजे तक निकल जाते हैं और रात तक ही आ पाते हैं। 2 साल हुए पापा के इस संसार से कूच करने के बाद मम्मी यानी भावना जी बिल्कुल अकेली रह गई थीं। भावना जी और उनके पति दोनों सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर थे रिटायरमेंट के बाद वह दोनों अक्सर अपने विषय की ही किताबों पर चर्चा करते रहते थे और नितिन के बच्चे भी उनके साथ ही बातें करते रहते थे। अब नितिन के बच्चों अमित और पवन का एडमिशन भी कर्नाटक के इंजीनियरिंग कॉलेज में हो गया था और पापा की भी मृत्यु हो चुकी थी।
नितिन और निशा को काम की व्यस्तता इतनी थी कि वह दोनों चाह कर भी मम्मी जी का ख्याल नहीं रख पा रहे थे। क्योंकि मम्मी को जल्दी सोने की आदत थी इसलिए दोनों ही माल में जाते समय अपनी चाबी साथ लेकर जाते थे और रात को खुद ही अंदर आकर अपना रखा हुआ डिनर खाते थे। सुबह मम्मी जल्दी उठ कर अपनी चाय बनाकर पी लेतीं थी। काफी समय से वे रात को भी देर से ही आ रहे थे।
शुरू-शुरू में कुछ दिन तो वह लोग अक्सर अपनी शॉप पर निकलने से पहले आपस में बातें कर लिया करते थे लेकिन अब कुछ दिनों से दुकान में व्यस्तताऐं बहुत अधिक बढ़ गईं थी। उन्होंने अब अपने शोरूम में आर्टिफिशियल ज्वेलरी भी रख ली थी। कुछ समय पहले तक तो मम्मी उनके जाते हुए सुबह अक्सर शिकायत करती थी कि उनके चश्मे का नंबर बदल गया है या कि उन्हें दांत वाले डॉक्टर के पास जाना है लेकिन नितिन को फुर्सत ही नहीं मिल पा रही थी इस कारण वह खुद ही सवेरे मम्मी से आंख नहीं मिला पा रहा था। बस शॉप पर जाते हुए थोड़ी देर निशा से ही मम्मी की बातें होती थी और निशा उन्हें कल पर टाल देती थी। लेकिन अब तो मम्मी ने कहना भी बंद कर दिया।
कहीं मम्मी गुस्सा या अधिक परेशान तो नहीं है ऐसा ही सोते हुए दोनों ने सुबह मम्मी से बात करने का निश्चय किया। उनके घर सुबह खाना बनाने के लिए शांताबाई आ जाती थी वह सब का ब्रेकफास्ट बनाकर दोनों का लंच लंच बॉक्स मैं डाल जाती थी। मम्मी के लिए लंच टेबल पर ही रखा रहता था और शाम को मम्मी को खाना खिलाकर नितिन और निशा के लिए बना कर रख देती थी। सुबह दोनो थोड़ा जल्दी तैयार होकर डाइनिंग टेबल पर बैठे ही थे कि उन्होंने देखा मम्मी भी तैयार होकर बैठी हुई थी।
मम्मी आप कहां जाओगी क्या? नितिन ने पूछा? हां,डॉक्टर के दांतों की एक सिटिंग और लगेगी ।लेकिन आप जाओगी कैसे? नितिन ने पूछा।तुम चिंता मत करो मुझे अपना ख्याल रखना आता है, मम्मी ने जवाब दिया।
दोनों हैरान थे इतनी देर में ही डोर बेल बजी और एक लड़की ने अंदर प्रवेश करा। भावना जी ने दोनों को बताया कि यह रानी है और साथ वाले घर में ही पेइंग गेस्ट रह रही है। यह पढ़ाई भी कर रही थी और साथ में ही नौकरी भी। लेकिन कोरोना के कारण इसकी नौकरी छूट गई। अब यही मुझको डॉक्टर के ले जाती है और मुझे जहां पर भी जाना होता है वहां भी ले जाती है इसे गाड़ी चलानी बहुत अच्छी आती है।
मैं इसे रोजाना की पेमेंट कर देती हूं। मेरे साथ वाले कमरे में जो पापा का स्टडी रूम था अगले महीने से यह वहां ही रहेगी क्योंकि जब तक इसकी दूसरी नौकरी नहीं लग जाती तब तक यह अपने किराए के भी पैसे नहीं चुका पाएगी।लेकिन मम्मी आपने हमें यह सब बताया क्यों नहीं? मैं अगर यह कहूं कि तुमने मुझसे पूछा क्यों नहीं तो? कब बताती? खैर छोड़ो आज दातों की सिटिंग के बाद मुझे तुम्हारी रीना मौसी के घर भी जाना है। उसके बेटे की शादी है हम लोग अपने लिए कपड़े वगैरा भी खरीदेंगे। रानी तुमने अपनी पढ़ने के लिए किताबें रख ली है ना? जी आंटी, जब आप वहां बातें करोगी मैं आराम से पढ़ लूंगी। ठीक है, अच्छा नितिन मैं जा रही हूं।
नितिन और निशा दोनों हैरान होकर एक दूसरे को देख रहे थे। तभी मम्मी बोली रानी पहले पेट्रोल पंप में ले जाना कल तुमने पेट्रोल नहीं भरवाया था। ओके आंटी। नितिन और निशा हैरान तो थे ही लेकिन खुश भी थे कि उन्हें इतने दिनों से आत्मग्लानि हो रही थी कि वह मम्मी को डॉक्टर तक के नहीं ले जा पा रहे मम्मी ने उन्हें शर्मिंदगी की भावना से भी उबार लिया था और खुद ही अपने जीने की दिशा भी बना ली थी। उन्हें अपनी मम्मी पर बहुत प्यार और गर्व हो रहा था। तभी नितिन ने जाती हुई मम्मी से पूछा कि मम्मी कुछ पैसे भी चाहिए क्या? नहीं बेटा , रानी ने मुझे गूगल पे और एटीएम कार्ड से पैसे निकालना भी सिखा दिया। ऐसा कहकर मम्मी भी मुस्कुराती हुई रानी के साथ चली गई।
पाठक गण आपका क्या ख्याल है, ऐसा नहीं कि बच्चे अपने माता-पिता से प्यार नहीं करते लेकिन उनकी व्यस्तताएं भी तो जायज है। जिंदगी बहुत खूबसूरत है उसमें शिकायतें नहीं अवसर तलाशिए।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा