घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है – बिमला रावत जड़धारी

कमली ने अपने ससुराल वालों के सहयोग से अपनी माॅंजी (भरोसी) का अंतिम संस्कार कर दिया। अब तेरहवीं की व्यवस्था

के लिए सास बोली,;तुम दूसरे हिस्से में रह कर शांति से अपनी माॅं का बाकी का काम निपटा लो। सारे रीति-रिवाज पंडित

जी तुम से करा देंगे। अभी पितृ भोज की व्यवस्था भी करनी है। तुम्हारे मायके और गॉंव वालों को भी बोलना है। अंतिम

संस्कार में तो कुछ ही लोग सम्मिलित हुए थे। धीरज (कमली का पति) गाॅंव वालों को बोलने चला जाएगा। यहाॅं के गॉंव

वालों को भी बोलना है। सब काम अच्छे से निपट जाए बस।कमली ने सोचा ठीक तो कह रही है सासु जी, बहुत कर्मठ थी

मेरी माॅं, कभी किसी का अहसान नहीं लिया। मेरे सुसराल में भी तो कहां आती थी। जब कभी बीमार होती थी तो डाॅक्टर

को दिखाने के नाम पर आती थी बस। जैसे ही थोड़ा ठीक होती घर जाने की जिद्द करने लगती।उस दिन भी देवर जी ने

बताया था।भाभी मैं अभी बाजार से आ रहा हूॅं। आपके गाॅंव के लोग मिले थे, उन्होंने बताया आपकी माॅं जी की तबीयत

खराब है, आपको याद कर रही है। कह रही है कितने महीनों से नहीं आयी। आप जितनी जल्दी हो सके चले जाना।कमली

यह बात अपनी सास को बताती है, तो  सास कहती हैं, तुम कल ही जा कर अपनी मां को अपने साथ यहॉं ले आओ। यहीं

डाॅक्टर को दिखा देंगे। अब वह यहीं रह लेगी हम लोगों के साथ।दूसरे दिन कमली अपनी मां को लेने जाती है। परन्तु वह

मना कर देती है, कहती है,;अब मेरा समय आ गया है, और मैं चाहती हूॅं मेरे प्राण यहीं निकले, बेटी के सुसराल नहीं।;मां

तेरी उमर ही क्या है? ठीक हो जाएगी, थोड़ा बुखार ही तो है। चल मेरे साथ। वहाॅं डॉक्टर को दिखा देंगे। तुम इतना क्यों

सोचती हो।कमली जबरदस्ती अपनी मां को अपने साथ ले आती है। आते हुए डॉक्टर को दिखा कर दवाई ले आती है।

दवाई खा कर वह एक हफ्ते में ठीक हो जाती है। जैसे ही भरोसी ठीक होती है, वह कमली से घर जाने की जिद्द करने लगती

है। कमली गुस्सा होती है और कहती है,मां तुम मुझे बहुत परेशान कर रही हो। अब मैं तुम्हें छोड़ने नहीं जाऊंगी। यहीं रहो

अपने नाती- नातिन के साथ। वह तो मेरे सास ससुर बहुत अच्छे हैं, कुछ भी नहीं बोलते। क्या मैं तेरे आगे – पीछे ही घूमती

रहूॅं?  तुम मेरी परेशानी क्यों नहीं समझ रही। बिमला रावत जड़धारी तभी कमली की सास आयी,कमली कैसे बोल रही

है अपनी माॅंजी से। इस तरह कौन बोलता है। और बोल क्या रही है कमली? कुछ जानती भी है तेरी मां ने कितने कष्ट

सहकर तुझे पाला और फिर तेरे दोनों बच्चें पाले। तुझे कोई परेशानी ना हो इसलिए वो यहाॅं नहीं रहती। आज उसे थोड़ी सी

तकलीफ क्या हुई, तुझे परेशानी होने लगी।बेटा बीस साल की थी तेरी माॅं जब तेरे पापा की मुत्यु हुई और तुम आठ महीने

की थी। तेरे दादी और ताई ने इतना परेशान किया तेरी माॅं को। बेचारी दिन भर भूखी खेत में काम करती, तब जाकर रात

को दो रोटी मिलती। उसमें से एक रोटी वह सुबह के लिए बचा लेती थी। कभी कोई शिकायत नहीं करी। तुझे तो दादा जी

के डर के दूध पिला देते थे। दादा जी का आदेश था कि तीनों बच्चें मेरे साथ ही खाना खाएंगे। तब दादा जी तुम्हें अपने हाथ से

दाल पिलाते थे। ताऊजी को किसी से कोई मतलब नही था, ना ही अपने बच्चों से, ना ही तुमसे।उस दिन मैं रमा दीदी के

पास कुछ दिनों के लिए आई हुई थी। एक दिन तेरे दादाजी एक रात के लिए दूसरे गाॅंव गये हुए थे। उस दिन तुम भूख से रो

रही थी, जब तेरी मां ने पूछा कि क्यों रो रही है शायद इसे भूख लगी है, तभी तेरी ताई बोलीअभी तो मैंने इसे दूध दिया

है। वैसे ही रो रही होगी।; तभी बगल से चाची सास रमा, आयी, बोली;आज सुबह से तेरी लड़की रो रही है। शायद इन्होंने

आज इसे भूखा रखा है, तेरे ससुर जी तो बहुत ध्यान देते हैं। पर इन दोनों का बस चले तो तुम मां बेटी को भूखा मार दे। मैं

दूध लायी हूॅं, ले, कमली को पिला दे।तभी भरोसी के ससुर जी भी वापस आ जाते हैं। रमा दीदी की बात सुन कर अपनी

पत्नी और बहुत बड़ी बहु को बहुत डांटते हैं। और कहते हैं,अच्छा हुआ पटवारी नहीं मिला और मैं वापस आ गया। तुमने तो

इन दोनों को मार ही दिया था। अरे तू कैसे औरत है जो अपनी दोनों बहू और बच्चों में भेदभाव करती है। अरे घर तो ईंटों से

नहीं दिलों से बनता है । तुम्हें तो बड़ी बहू को समझाना चाहिए था पर तुम उसी के साथ मिलकर छोटी बहू को परेशान

करने लगी। भगवान ने तो पहले ही इसे इतनी बड़ी सजा दी है इसका पति छीन कर। तुम लोगों को तो इसका सहारा बनना

चाहिए था पर उल्टा उसे ही परेशान कर रहे हो। छोटी बहू, तुम क्यों इतना अत्याचार सह रही हो। इस घर में तुम्हारा भी

उतना ही हक है जितना बड़ी बहू का। मैं आज ही अपने रहते दोनों बहूओं  को अलग – अलग हिस्सा दे देता हूॅं। बाद में

बेचारी के साथ ना जाने क्या हो? कम से कम ये अपना और अपनी बेटी का पेट तो भरेगी।;तब तेरी माॅं ने बोला;मुझे घर,

खेत कुछ नहीं चाहिए। मैं चाहती हूॅं मेरी बेटी और मुझको सब अपने दिल में जगह दे ताकि मेरी बेटी को सब का प्यार

मिले। तब रमा दीदी ने समझाया भरोसी बहू, तुम और तुम्हारा बच्चा ठीक रहे तो दिलों में भी जगह बन जाएगी। तुम्हारे

ससुर जी ठीक बोल रहे हैं, अपना हिस्सा लेकर अपने बच्चे को अपने ढ़ंग से पाल।तभी भरोसी की जिठानी चिल्लाई;तुम

कौन होती हो हमारे बीच में बोलने वाली। इस घर और खेत के कोई हिस्से नहीं होंगे। मैं हिस्से नहीं होने दूंगी।तभी तेरे

दादाजी बोले तुम कौन होती हो मना करने वाली। मैं आज और अभी सब के हिस्से करता हूॅं।;बिमला रावत जड़धारी उस

दिन के बाद से तेरी माॅं ने कितने कष्ट सहे पर तुझे किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी। ना ही तुमसे अपने किसी कष्ट का

जिक्र किया। आज भी तुझे कोई कष्ट नहीं देना चाहती। बेटा आज तेरी बारी है अपनी मां को सारे सुख और प्यार देने की।

मैंने तेरी माॅं से बोला तो था कि अब यहीं रहो दो चार महीने, जब बिल्कुल ठीक हो जाओगी तब कमली छोड़ आएगी। मेरे

बोलने में और तुम्हारे बोलने में फर्क है। प्यार से समझा, बोल कुछ महीने यहीं रह, अगर नहीं मानी तो बोल कुछ दिन बाद

में छोड़ आऊंगी अभी खेत में निराई करनी है, हो सकता है मान जाए।;कमली ने अपनी मॉं जी को समझाया, पर वह कुछ

नहीं बोली। अब वो सुबह नाश्ता करती और कमली के साथ खेत में चली जाती और वही पगडंडी में बैठ जाती। जब कोई

बोलता कि मैं तुम्हारे गॉंव गया अभी वहीं से आ रहा हूॅं तो वह उस से सब का कुशल मंगल पूछती। फिर भारी मन से कमली

के साथ घर आ जाती। बीस दिन हो गए, अब वह घर जाने की जिद्द नहीं करती। सब को लगा भरोसी का मन लग गया।रात

को सब किचन में खाना खाने के लिए बैठे थे, कमली रोटी बना रही थी, सासु जी सब के लिए खाना रख रही थी। तभी माॅं

बोली;मेरी वजह से तुम सब को बहुत परेशानी हो रही है। मुझे माफ कर दो।;कैसी बातें कर रही हो। हमें भला क्यों

परेशानी होगी। हमें तो अच्छा लग रहा है कि सब मिलकर रहते हैं और कमली को भी अब तुम्हारी चिंता नहीं रहती। वरना

बोलती रहती थी कि माॅं अकेली है ठीक तो होगी ना।;भरोसी कुछ नहीं बोली। सब खाना खा कर अपने – अपने कमरे में चलें

गये। कमली किचन सिमट कर माॅं के पास चली गई। कमली को आदत थी कि सोने से पहले अपनी माॅं के पास जरूर बैठती

थी। उस दिन जब कमली गयी तो मॉं जी बोली,;अपनी सास ससुर जी की खूब सेवा करना, कभी किसी चीज की कोई कमी

मत होने देना। बेटा घर ईंटों से नहीं दिलों से बनता है। तू उन के दिल में अपने लिए जगह बना। ये जो मेरे गले में सोने की

चेन और बुंदे और अंगूठी है, इसे अपने पास संभाल कर रखना। चेन नाती की बहू को और बुंदे नातिन को देना। ये अंगूठी तेरे

लिए है। ले अपने पास रख लें। और मायके का मोह मत करना। भगवती माॅं कृपा से तेरे सुसराल में सब कुछ है। किसी चीज

की कोई कमी नहीं है। उस घर में और खेत में तेरी ताई जी की नजर है। खेत दे देना उन लोगों को, घर अगर तुझे रखना हो

तो रख लेना। कभी मन करे तो बच्चों को लेकर चली जाना। बगल में जो चाची सास का परिवार है वह तेरा पूरा मान करेंगे।

कभी किसी के घर कोई शुभ काम हो और तुझे बुलाएंगे तो तेरे रहना का ठिकाना हो जाएगा। बिमला रावत जड़धारी माॅं

जी, क्या बातें लेकर बैठ गयी। सो जा अब, ला पैरों में तेल लगा दूॅं।;हाॅं बेटा, ले अच्छे से मालिश कर दे। पैरों में तेल की

मालिश से बहुत अच्छी और गहरी नींद आती है। आज मुझे बहुत नींद आ रही है। मैं शांति से सोना चाहती हूॅं।ठीक है माॅं,

मैंने तेल लगा दिया है, अब सो जाओ। सुबह आराम से उठना, कल खेत में नहीं जाना।; कमली सुबह चाय बना कर सभी को

दे रही थी।;कमली अपनी माॅं को चाय दे दी क्या? दिखायी नहीं दे रही कहॉं है।;सासु जी, अभी मां कमरे में है, शायद सो

रही है। सो रही है।तबीयत तो ठीक है? देख जरा, कमरे में ही चाय ले जा।ठीक है सासू जी, मैं  देखकर आती हूं। चाय

भी वहीं दे दूंगी।माॅं जी उठ, चाय पी ले। आज देर हो गई उठने में, तबीयत ठीक है क्या ? उठ माॅं, आज क्या हो गया? ऐसे

तो पहले कभी नहीं सोई और रजाई भी नीचे फेंकी हुई है।कमली  नीचे से रजाई उठाकर ऊपर रखती है और अपनी मॉं जी

को हिलाती है। भरोसी का शरीर एकदम ठंडा हो रखा था। वह डर जाती है और अपनी सास – ससुर और पति को बुलाती

है।कमली की सास बोलती हैइतनी सुबह तो कोई डॉक्टर भी नहीं मिलेगा।;कमली का पति डॉक्टर को लेने उसके घर

जाता है।कमली अपनी माॅं के हाथ पैरों में तेल की मालिश करती है ताकि उसके शरीर में गर्माहट आ जाए। कमली रोए जा

रही है;उठ माॅं मैं तुझे अभी घर छोड़कर आती हूॅं। चाय नहीं पीनी तो मत पी पर बोल क्यों नहीं रही। कल रात को तो मुझे

समझा रही थीं। एक बार तो जिद्द करके बोलती कि मुझे घर जाना है। कैसे नही छोड़कर आती।;तभी डॉक्टर आता है।

कमली डॉक्टर को बोलती है डाक्टर साहब, जल्दी से माॅं जी को दवाई दो ताकि जल्दी से ठीक हो जाऐ और मैं माॅंजी को

घर छोड़कर आ जाऊं।;डॉक्टर जब देखता है और बताता हैसोए-सोए में हार्ट फेल हो गया, अब कुछ नहीं हो सकता।पूरे

गांव में खबर फैल गयी। गाॅंव वाले इक्कठा होने लगे। कमली के मायके भी खबर पहुँचा दी। ताऊजी के बच्चों ने दाह संस्कार

करने से मना कर दिया परन्तु पड़ोस की चाची के बड़े बेटे राकेश ने बोला;मैं जा रहा हूॅं। उनका अंतिम संस्कार मैं

करुॅंगा।;कमली के सुसराल में भी खुसर – फुसर हो रही थी कि कौन अंतिम संस्कार करेगा।;कमली, तुम करोगी अपनी माॅं

का अंतिम संस्कार।पर सासू जी मैं कैसे कर सकती हूॅं?हाॅं, क्यों नहीं कर सकती। करने में तो तेरा बेटा भी कर सकता है

पर मैं चाहती हूॅं कि तुम करो।राकेश भी कमली के गाॅंव पहुंच जाता है।;कमली, तुम रहने दो, मैं करूॅंगा सब काम।नहीं

बेटा, कमली को ही करने दो। भरोसी की आत्मा को भी शांति मिलेगी।तभी कमली का पति आता है;क्या सोच रही है

कमली? पंडित जी आ गए हैं।राकेश कमली के साथ ही रहता है ताकि उसे अकेला पन ना लगे। कमली को अपनी मॉं जी

की एक एक बातें याद आ रही थी।राकेश कमली का पूरे कार्य में साथ देता है। पितृ भोज में कमली के मायके से बहुत से

रिश्तेदार और ताऊजी के दोनों बेटे भी आए थे। कमली के सुसराल से भी सभी थे। सारा काम भी अच्छे से निपट गया।

ताऊजी के दोनों बेटे और राकेश रात कमली के घर ही रुकते हैं। रात को सभी  बैठे बातें कर रहे थे। तभी कमली के ताऊजी

का बड़ा बेटा बोला कमली तुम्हारे सुसराल में इतनी सारी खेती की जमीन और इतना बड़ा घर है तो तुम्हें वहाॅं के खेत और

मकान का क्या करोगी? माॅं ने कहा कि उसे हम दोनों भाई आपस में बॅंट ले। अब तुम्हरा मायका तो रहा नहीं।;तभी राकेश

बोला मायका कैसे नहीं रहा। जब तक हम है कमली का मायका भी है। कमली पूरे अधिकार से मेरे घर आएगी। मेरा घर ही

कमली का मायका है।तभी कमली की सास बोली देखा कमली, तेरी मॉंजी नहीं रही पर तेरी माॅं ने सब के दिलों में तेरा

मायका बसा रखा है। जहाॅं तक वहॉं की जमीन और मकान की बात है वो तेरी मर्जी है उसका क्या करना है जी सासू जी,

मुझे पता है मुझे क्या करना है। खेत की जमीन इन दोनों भाइयों के लिए और मकान मैं अपने पास रखूंगी। पर उस मकान

की चाबी राकेश चाचाजी के पास रहेगी। चाचाजी को जब भी जरूरत होगी उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। और कभी

मायके जाऊं तो अपने रहने के लिए किसी का मुंह ना देखना पड़े। मैं जानती हूॅं राकेश चाचाजी मुझे पूरा मान सम्मान देंगे

और मैं उनके यहां पूरे सम्मान से भी रहूॅंगी। क्यों भाई, सही कहा ना मैंने ताऊजी के दोनों बेटे कुछ ना बोल पाए।-

 बिमला रावत जड़धारी

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