घर ईटों से नहीं दिलों से बनता है – खुशी

रामानंद एक सीधे साधे ईमानदार आदमी थे जो एक सरकारी अध्यापक थे।स्कूल के बाद दो तीन ट्यूशन पढ़ाते फिर शाम को घर लौट कर बच्चों को पढ़ाते ।उनकी पत्नी रजनी गृह लक्ष्मी थी जो घर संभालती बचत करती और अपने पति का सहयोग करती।रामानंद किराए के घर में रहते थे उनकी बहुत इच्छा थी कि अपना घर हो इसलिए वो दोनों पति पत्नी पाई पाई जोड़ रहे थे।ईश्वर ने उनकी सुन ली और वो दो कमरों के अपने घर में चले गए जो स्कूल के पास था।

अब वो घर पर ओर ट्यूशन पढ़ाते थे ताकि घर के लिए लिया लोन का पैसा चुका सके।वक्त बिता बच्चे पढ़ लिख रहे थे कॉलेज में आ गए थे।बड़ा बेटा संजय इंजीनियर बनाना चाहता था इसलिए iit रुड़की से पढ़ रहा था।छोटा बेटा राघव सी ए कर रहा था और बेटी पारुल लॉ पढ़ रही थी।बच्चे पढ़ने में होशियार थे।इसलिए स्कॉलरशिप पर पढ़ रहे थे और माता पिता का नाम ऊंचा कर रहे थे संजय को प्लेसमेंट बैंगलोर मिली इसलिए वो वहां चला गया परंतु वो माता पिता का ध्यान रखता था और भाई बहन की भी जरूरतें पूरी कर रहा था।

राघव ने भी पहले अटेम्प्ट में ही CA क्लियर कर लिया।दोनो भाइयों ने मिलकर मां बाप को एक फ्लैट खरीद कर दिया जिसकी रजिस्ट्री माता पिता के नाम से थी।4 bhk का फ्लैट था।राघव माता पिता के साथ उसी शहर में रहने वाला था।क्योंकि उसकी नौकरी वही थी।छोटी बेटी पारुल का भी ये आखिरी साल था ।जिन लॉयर विवेक जी के अंडर वो काम सीख रही थी उन्होंने अपने बेटे श्रेयस के लिए पारुल का हाथ मांगा था।तो बस अगले साल पारुल की शादी।रजनी बोली पारुल का तो तय हो गया अब मेरे बेटों का भी सोचो जी उनके लिए भी अच्छी बहुएं ढूंढनी चाहिए।

पहले उन दोनों से पूछ लेते है उनकी कोई पसंद हो तो वैसे मुझे राजेश की बेटी मेघा अपने संजय के लिए बहुत पसंद हैं सेम प्रोफेशन भी है।ठीक है पहले इन दोनों से पूछते है संजय और राघव बेटे हमे तुमसे जरूरी बात करनी हैं रामानंद बोले कहिए पिताजी संजय ने कहा बेटा हम चाहते हैं तुम्हारा घर भी अब बस जाए हा बेटे अगर कोई पसंद हो तो बोलो रजनी ने कहा।भैया बता दूं पारुल बोली तू चुप कर संजय बोला बोलो बेटा कोई है तो पापा वो मेघा दी है ना अरे वाह तुमने तो मेरे दिल की इच्छा पूरी कर दी हम दोनों को भी मेघा बहुत अच्छी लगती हैं चलो तुम्हारा तो हुआ पक्का अब राघव जी आप भी बताइए पापा आप लोग ही देख लो ठीक है अगले दिन सब मेघा के घर गए और रिश्ता पक्का हो गया।

संजय के बंगलौर से 2 महीने बाद  आने के बाद विवाह तय हुआ और इस बीच मेघा भी अपना ट्रांसफर बैंगलोर में करवाने वाली थी ।मेघा संजय की शादी में मेघा के चाचा जी की बेटी पूजा भी आई थी वो सबको पसंद आई और इतना अच्छा घर वर देख रिश्ता पक्का हो गया।पूजा एक छोटे शहर में रहती थी इतनी अच्छी जिंदगी उसने देखी नहीं थी।6 महीने बाद राघव और पारुल दोनों की शादी हो गई ।पारुल अपने घर गई और पूजा राघव के घर घर में हर सुख सुविधा थी।कामवलिया थी किसी चीज का अभाव नहीं था।ये सब देख पूजा का दिमाग खराब होने लगा।पूजा को लगता ये सब हमारा होना चाहिए सबको छोड़ सिर्फ राघव को मेरी बात सुननी चाहिए।शाम का खाना सब साथ खाते पर पूजा को लगता बाहर जाना चाहियें।उसे लगता मेघा तो बैंगलोर में अपने पति के साथ मज़े कर रही है इन दोनों को हमारे गले बांध रखा है।

पूजा बात बात में चीड़ चीड़ करती ।मै अपने घर चली जाऊगी। भाई ऐसे मेघा ऐसी राघव का जब देखो दिमाग खाती।तुम्हारा भाई तो यहां रहता नहीं सारा दिन तुम ही अपने मां बाप का करते रहते हो।कभी कुछ कभी कुछ उधर मेघा की प्रेगनेंसी थी और डिलीवरी का टाइम पास था इसलिए संजय अपने माता पिता को बंगलौर ले गया । मेघा अपने सास ससुर के आने से बहुत खुश थी।पूजा और मेघा के स्वभाव में कितना अंतर था ये पता चल रहा था। सास ससुर के आने से वो खुश थी।उनकी आव भगत में लगी थी और कहा पूजा सारा दिन घर में चिक चिक करके रखती।मेघा और संजय दोनों ने नोट किया पापा मम्मी कमजोर हो गए है और चुप चुप भी रहते है।हा मम्मी मेघा का ध्यान रखती है पर सब कुछ पूछ कर कर रही है।मेघा से रहा नहीं गया शाम की चाय पर बोली मां एक बात बताइए क्या मैं आपकी बेटी नहीं हूं।ऐसा क्यों पूछ रही है बेटा रजनी बोली फिर आप का वो अपनापन कहा खो गया है।

जो हमें बचपन से मिला है ये घर आपका है फिर हर चीज पूछने की क्या जरूरत है।रजनी का दिल भरा हुआ था उसने सारी बातें मेघा को कह सुनाई।मेघा सुन हैरान थी कि पूजा ऐसा करेगी उसने निश्चय किया कि वो पूजा से बात करेगी।अगली सुबह जब मेघा ऑफिस।के लिए अपने बेडरूम में गई तो उसने पूजा को फोन लगाया और इधर उधर का हाल पूछा ।पूजा खुद ही बोल पड़ी तेरी कैसी कट रही है अब तो बूढ़ा। बूढ़ी तेरे पास आ गए है अब तेरा जीना हराम करेंगे। यहां तो रोज का था बेटा क्या बनाऊं क्या खाओगे।राघव टाइम हो तो पापा को डॉक्टर को दिखा देना।और वो मिट्टी का माधो सब याद रखता है पिछले हफ्ते मैने मॉल जाने को कहा तो मुझे लेकर नहीं गया।काम का बहाना बना दिया।बहन जीजा घूमे तो ठोक तुमने भी बहन बहुत ऐश काट ली अब भुगतो ये सिर दर्द ।

मेघा बोली तुम कैसी बातें कर रही हो मां पापा को हम बचपन से जानते हैं कितने कष्ट कर उन्होंने अपने बच्चों को पाला है।तुम्हे किसी चीज के लिए मना करते हैं जो तुम ऐसा कह रही हो।बहन तुम तो चुप करो इतना प्यार है तो रख लो और पूजा ने फोन रख दिया।मेघा पूजा के व्यहवार से परेशान थी उसने सारी बातें संजय को बताई संजय ने राघव से बात की राघव बोला वो मां पापा क्या आपको और भाभी को नहीं छोड़ती ।भाभी को डायन कहती हैं कि आपको फंसा लिया पिछले हफ्ते पारुल आई तो उसका अपमान किया अब मेरे पीछे पड़ी है कि इस घर को मेरे नाम कर।दो।तुम्हारे मां बाप इस घर में नहीं आयेंगे।भैया मैं जहनी मरीज बन रहा हूं सारा दिन कलेश मुझे बिना बताए अबॉर्शन करवा आई बोली घर देगा तो बच्चा करूंगी ।मै इसके साथ नहीं रहूंगा। तू परेशान मत हो संजय बोला पारुल को लेकर शनिवार को बंगलौर आ जा पूजा को ऑफिस के काम से बाहर जा रहा हूं।बता कर आना ।

शनिवार सब बैंगलोर में थे।राघव ने जो बताया उससे मेघा भी डर गई उसने अपने। माता पिता को सारी बातें बताई और उन्होंने पूजा के माता।पिता को पूजा को जब उसके माता पिता ने समझाया तो वो गुस्से में वकील के पास तलाक़ मांगने पहुंच गई इतने गंदे गंदे इल्ज़ाम लगाये और 6 महीने बाद मोटी एलुमनी लेकर वो आजाद हो गई।कोर्ट से निकलते।वक्त मेघा ने पूजा से कहा पूजा तुमने गलत किया।है।घर ईट पत्थर से नहीं दिलों से बनते है यदि तुम दिल में जगह बनाती तो घर तो तुम्हे खुद ही मिल जाता।पूजा बोली ज्यादा ज्ञान मत दो।कुछ दिन में तुम भी यू  ही अलग हो जाओगी। मेघा और संजय का संसार सुखी

 चल रहा था और कुछ महीनों बाद मेघा ने राघव की शादी भी उसी की कलीग मीरा से करवा दी।मीरा का परिवार रामानंद का पहला पड़ोसी था।सभी बच्चे अच्छा जीवन जी रहे थे और सुखी थे दोनो बहुएं अपने सास ससुर को माता पिता सा सम्मान देती थी।उधर पूजा ने कुछ दिन तो एलुमनी के पैसों पर ऐश की फिर दूसरी शादी कर ली।वहां से भी 1 साल में लड़ कर तलाक ले अलग हो गई।फिर किसी और पैसे वाले से शादी की तलाक का केस चल रहा है।अब ये उसका धंधा बन गया कि शादी करो और तलाक लो।आज जहां उसका केस था वहीं पारूल का भी था।पारुल को देख पूजा अकड़ कर आई और बोली और तेरा भाई कैसा है दूसरी भी है कि भाग गई पारुल बोली मेरी भाभियों को दिल में जगह बनानी आती हैं वो पत्थरों में नहीं दिलों में घर बसा कर बैठी है तुम्हारी तरह नहीं जो ईट पत्थर को घर समझती हैं जिनके लिए प्यार की कोई कीमत नहीं है जाओ तीसरे तलाक का पैसा लो और अकेले जीयो तुम जैसी औरतों के घर नहीं होते। पारुल आगे बढ़ गई और पूजा तीसरा तलाक ले पैसों का चेक लेने ।जहां पारुल और उसका परिवार संतुष्ट था वहीं पूजा में आज भी जलन और अधूरा पान था।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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