नई सोच – रश्मि वैभव गर्ग

सुम्मी …बुलाते थे सब उसको प्यार से। सुषमा नाम तो सिर्फ़ स्कूल में ही सुनती थी वह। अपने बहिन ,भाइयों में सबसे बड़ी होने की वजह से बचपन से ही ज़िम्मेदारी लेना उसके स्वभाव में ही आ गया था। पिता के यहाँ छोटा ही परिवार था  ,लेकिन उसको पारिवारिक तालीम अच्छी तरह से मिली थी।जैसे … Read more

“नहले पे दहला ” – कमलेश आहूजा

रमा बहुत क्रोधी और झगड़ालू स्वभाव की महिला थी।हर समय अपनी बहु से झगड़ा करती रहती थी,कभी काम को लेकर तो कभी दहेज को लेकर ताने देती रहती।बहु बेचारी बहुत सीधी थी कुछ नहीं बोलती और चुपचाप अपना काम करती रहती।रमा के पति रमेश जी बहुत सज्जन इंसान थे उन्हें रमा का इस तरह से … Read more

*एक बहु की समझदारी* – तोषिका

बधाई हो रमा जी, बधाई हो। ये रिश्ता पक्का हुआ, गले लगते हुए मीनू बोली। जी आपको भी बधाई हो , रमा बोली। मीनू का बेटा रमन उधर दूर खड़ा था। मीनू ने उसको बुलाया और कहा कि, “बेटा आकर अपनी होने वाली सास के पैर छू।” रमन का थोड़ा मुंह बना पर वो आ … Read more

बहू की समझदारी – अरुणा गर्ग

सुनैना का तीन महीने पहले ही विवाह हुआ था।वह एक सामान्य किन्तु खुली विचारों वाले परिवार की बेटी थी। उसने अपने मायके में अपनी मां को हमेशा परिवार में रहकर भी अपनी अलग पहचान बनाते देखा। वहीं पिता भी बहू बेटी को समान मानते।वह उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वह अपने ससुराल में भी सबके … Read more

समझदारी – करुणा मलिक

चाँदनी ! इस तरह रोज बहसबाजी करके बैग उठाकर चले आने का क्या तुक है?  मैंने तो पहले ही कहा था कि मुझसे किसी की हाँ में हाँ नहीं मिलाई जाएगी पर आपको तो मेरी शादी की जल्दी पड़ी थी।  बेटा, हाँ में हाँ मिलाने की क्या बात है….. अमन ने कौन सी गलत बात … Read more

एक बहू की समझदारी – निभा राजीव “निर्वी”

सौम्या ने फोन पर नर्म स्वर में अपनी ननद वर्षा को समझाने का प्रयास कर रही थी,”- देखो वर्षा, पति-पत्नी में तो ऐसे छोटे-छोटे नोक झोक होते ही रहते हैं लेकिन बात को इतना बढ़ाना नहीं चाहिए। शांति दिमाग से चीजों को सोचो समझो और उन्हें सुलझाने का प्रयास करो। उसकी बात पर उधर से … Read more

ममता की कोई सीमा नहीं। – मधु वशिष्ठ

जबसे नीता की शादी तय हुई है तब से उसके तो रंग ढंग ही बदल गए हैं।कभी बहुत खुश ,कभी उदास।  मन में 100 तरह के विचार उथल-पुथल मचाते रहते थे क्योंकि पति का घर सुदूर प्रदेश में था, इसलिए एक बार के बाद दूसरी बार मिलना तो ना हुआ और कभी बातें भी नहीं … Read more

बहु की समझदारी – खुशी

कमला एक घर में रहने वाली महिला थी जिसने घर में कुछ जोड़ना नहीं सीखा था।खाना घूमना नए कपड़े या फिर हर साल 3 महीने के लिए मायके जाना यही उसका शगल था।बहने समझाती भी दीदी जीजाजी की इतनी कमाई नहीं है थोड़ा बचाओ पर कमला चीड़ जाती इसलिए बहने भी कुछ नहीं कहती।पहले कमला … Read more

बेटी! ये तुम्हारे संस्कारों की परीक्षा है – सुदर्शन सचदेवा

“मम्मी, मैं ऑफिस के लिए लेट हो रही हूं… प्लीज़ आज आप पापा को दवाई दे देना,” रिया ने जल्दी-जल्दी बैग उठाते हुए कहा। “बेटा, मैं भी मंदिर जा रही हूं,” सासू माँ सावित्री जी ने शांत स्वर में जवाब दिया। रिया कुछ पल रुकी, फिर बिना कुछ बोले खुद ही पानी और दवाई लेकर … Read more

एक बहु की समझदारी – सुदर्शन सचदेवा

जयपुर के एक बड़े लेकिन शांत घर में सावित्री देवी अपने बेटे रोहन और बहु प्रिया के साथ रहती थीं। घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी, लेकिन सावित्री देवी के मन में एक डर हमेशा रहता था— “आजकल की बहुएं कहाँ बुज़ुर्गों को समझती हैं…” प्रिया शादी के बाद जब इस घर में … Read more

error: Content is protected !!