बहु की समझदारी – मधु वशिष्ठ

पब्लिक डीलिंग वाले सरकारीऑफिस में  नीता ,शशि और मैं  एक कमरे में ही बैठते थे लेकिन फुर्सत के क्षण सिर्फ लंच ब्रेक में ही मिलते थे। कमरा बड़ा होने के कारण और सहकर्मी भी हमारे ही कमरे में लंच करने के लिए आते थे। मोहन जी और नितिन जी के सहकर्मी भी उसी कमरे में … Read more

बहू की समझदारी – रंजना गुप्ता

यह कहानी है एक ऐसे परिवार की, जहाँ संपत्ति और संपन्नता तो थी, लेकिन आपसी तालमेल और समझदारी की कमी थी। इस कहानी के केंद्र में है एक बहू, जिसने अपनी सूझबूझ, धैर्य और बुद्धिमत्ता से न केवल बिखरते हुए परिवार को संभाला, बल्कि सबको यह सिखाया कि असली समझदारी क्या होती है। ​सुंदरपुर गाँव … Read more

नई सोच – रश्मि वैभव गर्ग

सुम्मी …बुलाते थे सब उसको प्यार से। सुषमा नाम तो सिर्फ़ स्कूल में ही सुनती थी वह। अपने बहिन ,भाइयों में सबसे बड़ी होने की वजह से बचपन से ही ज़िम्मेदारी लेना उसके स्वभाव में ही आ गया था। पिता के यहाँ छोटा ही परिवार था ,लेकिन उसको पारिवारिक तालीम अच्छी तरह से मिली थी।जैसे … Read more

एक बहू की समझदारी – राहुल कुमार

परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल सजाया है, बिखरते हुए एक आँगन को प्रेम से पुनः संवारा है। बहू की पावन समझदारी ने मिटा दिया हर फासला, अनुभव और नई उमंगों का अद्भुत सेतु बनाया है। ​बनारस के पुराने मोहल्ले में स्थित शर्मा निवास अपनी पुरानी ईंटों और लकड़ी के नक्काशीदार दरवाजों के लिए जाना … Read more

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