बहु की समझदारी – मधु वशिष्ठ
पब्लिक डीलिंग वाले सरकारीऑफिस में नीता ,शशि और मैं एक कमरे में ही बैठते थे लेकिन फुर्सत के क्षण सिर्फ लंच ब्रेक में ही मिलते थे। कमरा बड़ा होने के कारण और सहकर्मी भी हमारे ही कमरे में लंच करने के लिए आते थे। मोहन जी और नितिन जी के सहकर्मी भी उसी कमरे में … Read more