समझौता नहीं समझदारी – गीता वाधवानी
“पल्लवी क्या हुआ बड़ी थकी थकी और उदास सी लग रही हो “अपनी टेबल पर काम कर रही पल्लवी से उसकी कलीग तारा ने पूछा। तारा उसकी फ्रेंड भी थी और कलीग भी। पल्लवी-” अरे यार कुछ नहीं, बस वही रोज-रोज का समझौता,एडजेस्ट कितना करूं और कब तक करूं, ऐसे कैसे चलेगा? ” तारा-” चल … Read more