ज्यादा ना सही थोड़े बहुत वचन  तो मैं भी निभा लूं-हेमलता गुप्ता : Moral stories in hindi

अरे अरे…. गायत्री जी… आज नाश्ता वास्ता रहने दीजिए !क्यों… आज नाश्ता नहीं करने का विचार है क्या? आज क्या बाहर खिलाने ले जा रहे हो? हां… ऐसा ही समझ लो… आज हम दोनों अपना टेस्ट करवाने जा रहे हैं! क्यों… हम कोई बीमार थोड़ी है जो हमारा टेस्ट होगा,! अरे.. बीमार नहीं है इसलिए … Read more

क्या कमी है तुम्हारे ससुराल में – पूजा शर्मा   : Moral stories in hindi

भगवान का दिया क्या नहीं है नीति के पास ससुराल में, नहीं है तो संतुष्टि। कितना प्यार करने वाले सास ससुर ख्याल रखने वाला पति निलेश और दो प्यारे से बच्चे अरु और सार्थक, अरु यूकेजी में पढ़ती है और सार्थक अभी ढाई साल का ही है। उसके ससुर प्राइमरी स्कूल मैं टीचर थे जो … Read more

बच्चों का दायित्व – मंजू ओमर: Moral stories in hindi

दरवाजे की बेल बजी तो रागिनी ने उठकर दरवाजा खोला तो सामने उपासना खड़ी थी ,उसको अचानक देखकर रागिनी ने पूछा अरे उपासना तुम ,तुम कब आई इलाहाबाद से उपासना कुछ न बोलकर रागिनी के गले लगकर रोने लगी ।अरे उपासना क्या हो गया क्यों रो रही हो आओ अंदर बैठो फिर बात करते हैं … Read more

दायित्व – आरती झा आद्या : Moral stories in hindi

माधवी आज जब से बेटे का ओरिएंटेशन प्रोग्राम अटेंट कर घर आई है। उसका मन कभी अतीव प्रसन्नता का अनुभव कर रहा है और कभी दौड़ कर अतीत की ओर भागता हुआ गम के सागर में डूब रहा है।  आज ओरिएंटेशन प्रोग्राम में कई बेटियों को अपना परिचय देते देख वो अभिभूत हुई जा रही … Read more

श्रद्धांजलि (अंतिम भाग ) – बीना शुक्ला अवस्थी: Moral stories in hindi

बदले में सुकन्या की हॅसी सुनाई दी – ” मुझे इतना मूर्ख कैसे समझ लिया? एक बार धोखा खाने के बाद दुबारा धोखा खाना मेरा स्वभाव नहीं है। मैं जानती हूॅ कि तुम कोई चाल चलकर मुझसे वो सारे प्रमाण प्राप्त करने का प्रयत्न करोगे लेकिन सूचना के लिये बता दूॅ कि मेरे अपहरण और … Read more

श्रद्धांजलि (भाग 9 ) – बीना शुक्ला अवस्थी: Moral stories in hindi

सुकन्या ने मेट्रो में मिली लड़की रजनी की बात भी उसे बताई। मृत्युंजय चाहता था कि सब कुछ पुलिस को बताकर वरदान को गिरफ्तार करवा दिया जाये जबकि सुकन्या चाहती थी कि वरदान का दाम्पत्य पूरी तरह बरबाद हो जाये और उसके पास अपनी पत्नी और बच्चों के पास लौटने के रास्ते बन्द हो जायें। … Read more

श्रद्धांजलि (भाग 8 ) – बीना शुक्ला अवस्थी: Moral stories in hindi

सुकन्या का अब थोड़ा काम ही शेष रह गया था। वह वरदान का सिर तब तक सहलाती रही जब तक वह सो नहीं गया। इसके बाद उसने अपने आटो मैटिक कैमरे से अपनी और वरदान की वैसी ही तस्वीरें खींची जैसी गृह प्रवेश वाले दिन खींची थी लेकिन इस बार सुकन्या का चेहरा स्पष्ट नजर … Read more

श्रद्धांजलि (भाग 7) – बीना शुक्ला अवस्थी: Moral stories in hindi

आखिर वह दिन आ गया जिसकी वरदान से अधिक सुकन्या को प्रतीक्षा थी। सुमन जी को समझाकर सुकन्या अपने फ्लैट में आ गई लेकिन आने के पहले अपनी योजना को साकार रूप देने के लिये कमरे में इस तरह छुपाकर दो आटोमेटिक ऐसे कैमरे रख दिये जो निर्धारित समय के बाद बिना छुये या बटन … Read more

श्रद्धांजलि (भाग 6) – बीना शुक्ला अवस्थी: Moral stories in hindi

यहॉ आकर उसकी सोंच को एक दिशा मिलनी शुरू हो गई। उसने नीलिमा के आफिस में फोन किया तो उसे पता चला कि आफिस में  सेकेट्री की जगह के लिये इंटरव्यू तो लिया गया है लेकिन अभी तक बॉस को कोई लड़की उचित नहीं लग रही है। दूसरे दिन सुकन्या नीलिमा के आफिस गई। वहॉ … Read more

श्रद्धांजलि (भाग 5) – बीना शुक्ला अवस्थी: Moral stories in hindi

नीलिमा की अचानक मृत्यु की खबर सुनकर सुकन्या के मम्मी पापा तुरन्त आये लेकिन लाख समझाने पर भी सुकन्या आने को तैयार नहीं हुई। रोते हुये कहा उसने – ” मैं नीलिमा का मृत शरीर देखने नहीं जा सकती। मैं कभी उसे मृत नहीं मानूॅगी, मेरे लिये नीलिमा कभी नहीं मर सकती। आप लोग जाइये।” … Read more

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