दर्द कि इंतहा -मंजू ओमर : Moral stories in hindi

शुभी कबसे देवेश को फोन कर रही थी लेकिन देवेश का फोन नहीं उठ रहा था । काफी देर हो गई थी देवेश को गए हुए । शुभी सोचने लगी इतनी देर क्यों लगा गई देवेश को अमित शुभी का भाई उसको ट्रेन में बैठाने ही तो गये थे देवेश ।दस बजे की ट्रेन थी … Read more

मयूरी और परिंदा -शिव कुमारी शुक्ला Moral stories in hindi

मयूरी एक आठ बर्षीय बच्ची सुबह के समय अपनी बालकनी मे बैठी  कामिक्स पढ़ने में तल्लीन थी। तभी एक परिन्दा घायल अवस्था में वहाँ आ गिरा। वह तड़प रहा था। उसके शरीर से खून निकल रहा था। पहले तो उसे देख वह सहम गई, फ़िर उठकर उसके लिए पानी लाई और अपने मम्मी- पापा को … Read more

ये क्या अनर्थ कर दिया तुमने -रश्मि सिंह Moral stories in hindi

सविता-बहू, मैंने तुझे हमेशा इतना प्यार दिया, हमेशा बेटी माना, तू अपनी माँ की एक बात नहीं मान सकती। प्रीति (सविता की बहू)-मम्मी आप कुछ भी माँग लो पर ये पाप मुझसे नहीं होगा। सविता-बस इस सुई को ही तो निकलना है, फिर सब दर्द-पीड़ा से मुक्ति मिल जाएगी। हर महीने के कीमियोथेरेपी का दर्द … Read more

वो एक फरिश्ता थी -सुषमा यादव Moral stories in hindi

राजस्थान के कोटा में स्नेहा को मेडिकल कोचिंग के लिए उसके माता-पिता ले गए थे । उसे एक पीजी होस्टल में रखा था पर वहां की मकान मालकिन स्नेहा से अपने बच्चों को पढ़वाने लगी। जिसके कारण उसकी पढ़ाई में विघ्न पड़ रहा था। उसके पापा ने उसे एक अलग कमरा किराए पर ले कर … Read more

दिल का रिश्ता -रश्मि झा मिश्रा Moral stories in hindi

“नीलिमा नाम है ना तुम्हारा… तुम ही आई थी ना काम के लिए…!” ” हां साब… नीलिमा ही है… मेरी बेटी है… अब अकेले से नहीं होता मुझसे… इसलिए सोचा इसे भी लगा दूं काम पर…!” ” वह तो ठीक है… पर मुझे दिन भर वाली बाई चाहिए…!” मिलिंद बाबू ने पूछते हुए कहा…” यह … Read more

दिन में तारें दिखायी देना -संध्या सिन्हा Moral stories in hindi

अभी खाना डाइनिंग टेबल पर लगाया ही था कि.. डोरबेल  “ डिंग-डाँग..”  मैं देखती हूँ.. कह कर मैंने मेन डोर खोला तो… “ब्लिंकिट” का डिलीवरी बॉय था.. “ जी मेम आपका सामान.. “इधर रख दो “ मैंने सोफ़े के पास रखने को कहा.. “ क्या माँ…  तुम्हारा कितना ऑर्डर आता हैं…कभी bbnew . कभी blinkit, … Read more

आइसक्रीम -अंकित चहल Moral stories in hindi

कल इतवार था। इतवार को हमारे यहाँ साप्ताहिक बाज़ार लगता है। सब्जी से लेकर लगभग सभी घरेलू सामान, बाज़ार में आसानी से मिल जाता है। आसपास के लोग भी इसी बाज़ार में ख़रीदारी करने आते हैं।                     मैं भी हर हफ्ते की भाँति सब्जी, दालें और कुछ सामान लेकर आ रहा था।  आइसक्रीम वाले के पास … Read more

लो जी संभालो-शुभ्रा बैनर्जी Moral stories in hindi

स्वाति जी का छोटा सा परिवार था।छोटे से कस्बे में सबसे बड़ी दुकान थी,उनके पति गोविंद जी की।स्वाति जी अपने बेटे की शादी को लेकर बड़ी चिंतित रहतीं थीं।सिठानी सी सजी-धजी स्वाति जी गजब की खूबसूरत लगतीं थीं अब भी।अब बहू भी उन्हीं की टक्कर की चाहिए थी,जो बीस हो उनसे।गोविंद जी ने कारोबार शुरू … Read more

देवरानी जी , हां मैं गंवार हुं-स्वाति जैन Moral stories in hindi

रीमा की शादी को अभी एक ही महिना हुआ था !! संयुक्त परिवार होने की वजह से घर में किसी ने भी उस पर काम का बोझ नहीं डाला था !! रीमा की जेठानी सीमा घर की सारी जिम्मेदारियां खुशी खुशी निभाती थी !! घर में सास और नंनद भी थे मगर सीमा की वजह … Read more

जीवन का सवेरा (भाग – 3) – आरती झा आद्या : Moral stories in hindi

रोहित वहाँ से उठकर आरुणि और उनकी सहेलियों के साथ चलते हुए बोला, “सच कह रही थी योगिता, मन बहुत शांत लग रहा है। हृदय शांति सुकून से भर गया है।” उसके चेहरे पर एक गहरे आनंद और शांति की मुस्कान थी, जो उसके मन की स्थिति को प्रकट कर रही थी। उसके वचनों में … Read more

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