इस गुनाह की माफी नहीं – शुभ्रा बैनर्जी

सविता जी की उम्र अब सत्तर के करीब हो चुकी थी।शरीर तो कमजोर हुआ था,पर इच्छाशक्ति और भी मजबूत हो रही थी।पति अरिहंत जी उम्र में उनसे पांच-छह साल बड़े थे।एक बेटे और दो बेटियों का परिवार था उनका।बच्चों की शादी करवा कर चिंता मुक्त हो चुके थे दोनों।बेटियां तो अपने ससुराल में रह रहीं … Read more

समझौता अब और नहीं – मंजू ओमर

संध्या मैंने शिवानी के लिए एक लड़का देखा है अब मैं जल्दी से जल्दी उसकी शादी करके इस जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहता हूं सुरेश बोला।।लेकिन शिवानी तो अभी पढ़ रही है , वह तो अभी 20 साल की है। वैसे बीच मे ही पढ़ाई छुड़वाकर शादी कर देना ठीक नहीं है। अच्छा अब तुम … Read more

खामोश दीवारें और एक बहन की पीड़ा

मेरी छोटी बहन राधिका का स्वभाव शुरू से ही पानी की तरह निर्मल और पारदर्शी रहा है। छल-कपट, चालाकी या दुनियादारी की पेचीदगियां जैसे उसे कभी छू कर भी नहीं गुजरीं। घर में सब से छोटी होने के कारण वह सबकी लाडली तो थी, लेकिन उसमें नखरे या ज़िद नाम की कोई चीज़ नहीं थी। … Read more

टूटे हुए सपनो की सुबह

शिखा की आँखों के सामने का वो सुनहरा सपना, जो उसने पिछले कई महीनों से बुना था, एक पल में कांच की तरह टूट कर बिखर गया। जिन रिश्तेदारों ने कहा था कि भाभी माँ बनकर आएगी, उनके सारे वादे और सारी बातें उस ठंडी सुबह के कोहरे में कहीं गायब हो गई थीं। उसे … Read more

एक रात का सफर

आज, मोहिनी  ने वही किया था। वह अपने ही घर में एक चोर की तरह दबे पांव उठी थी। अलमारी से अपनी मां के गहनों का डिब्बा निकाला, कुछ नगद रुपये रखे और अपनी सालों की यादों को एक छोटे से बैग में ठूंसकर उस दहलीज को पार कर गई, जिसने उसे चलना सिखाया था। … Read more

विश्वासघात  – सुदर्शन सचदेवा

बारिश उस दिन भी हो रही थी… बिल्कुल वैसी ही, जैसी पाँच साल पहले हुई थी, जब आरती ने पहली बार अपनी सबसे अच्छी सहेली निधि का हाथ पकड़कर कहा था— “दुनिया चाहे कुछ भी कहे निधि, मुझे तुम पर हमेशा भरोसा रहेगा।” निधि मुस्कुरा दी थी। उस मुस्कान में अपनापन था, दोस्ती थी और … Read more

धोखा – डाॅ उर्मिला सिन्हा

   आज देव और कुमुद का चालीसवां वैवाहिक वर्षगांठ है। कुमुद अकेली बाहर गार्डेन में फूलों से सुखी पत्तियां छांट रही है।कल शाम में ही देव किसी जरुरी काम से बाहर चला गया । ” अचानक कौन सा काम आ गया,कल हमारा चालीसवां वैवाहिक वर्षगांठ है, फिर चले जाना” कुमुद देव को जल्दी-जल्दी अपने कपड़े लत्ते … Read more

विश्वासघात – खुशी

नंदिनी और पूनम आपस में घनिष्ठ सहेलियाँ । दोनों का एक-दूसरे के बिना गुज़ारा नहीं था। नंदिनी के पिता शहर के जाने-माने वकील थे और पूनम के पिता एक मुनीम। घर में माँ और एक भाई रवि था। घर की आमदनी कम और खर्च ज्यादा था, इसलिए कई बार नंदिनी पूनम की फीस भर देती, … Read more

परछाइयों की तलाश – अनीता रवि

ऐसे लगता है जैसे सारी मनौतियाँ पूरी करने कर के गंगा नहा आई हूँ या हज से लौटी हूँ या पवित्र रोमनगरी से हो आई हूँ । शब्‍दों के धागे जैसे मन की भावनाओं को गूँथ ही नहीं पा रहे । बस महक रही हूँ मैं अखंड तृप्ति के फूलों की सुगंध से । विश्‍वास … Read more

विश्वास की कसौटी

अगले कुछ दिन नेहा के लिए किसी मानसिक यातना से कम नहीं थे। वह हर रात विकास के कपड़ों से किसी अजनबी परफ्यूम की महक सूंघने की कोशिश करती। जब विकास सो जाता, तो वह दबे पाँव उसका फोन चेक करने की कोशिश करती, लेकिन फोन में नया पासवर्ड लगा था जो उसे नहीं पता … Read more

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