कुलकलंकिनी

राधिका के मुंह से ‘हिस्से’ का नाम सुनते ही घर का माहौल एकदम से बदल गया। जो पिता कुछ देर पहले बेटी के आंसुओं पर पिघल रहा था, उसकी आंखें अचानक कठोर हो गईं। भाई विकास, जो बचपन में राधिका के लिए किसी से भी लड़ जाता था, आज उसी राधिका पर गरजने लगा। उसने … Read more

समर्पण – खुशी

राधा एक गरीब घर की बच्ची थी। मां लोगों के घरों में बर्तन मांजती थी और पिताजी रिक्शा चलाते थे।राधा मां के साथ लोगो के घर जाती थी। यूही कोई 5 साल की होगी वो लोग भी उसे मां के साथ कोई छोटा मोटा काम बता देते। पर राधा पढ़ना चाहती थीं जब वो बच्चों … Read more

संस्कार – खुशी

कविता एक भरे पूरे परिवार की बेटी थी। मास्टर्स किया हुआ था।परिवार में पिताजी  राम कुमार जो पेशे से एक व्यवसाई थे।उनका डिस्पोजेबल का बिजनेस था।दो भाई नितिन और सचिन भी पिताजी का कारोबार देखते थे। उनकी पत्नियां सुमन और  विजया उनके दो दो बच्चे बड़े भाई के दो बेटे राहुल और संजय और छोटे … Read more

रिश्तो की कीमत – मधु वशिष्ठ

गांव में जाने के बाद ही पता चला कि मां काफी समय से बीमार है। खटिया पर लेटी हुई भाभी के कहने पर भी मां विश्वास नहीं कर पा रही थी कि सीमा और मैं वास्तव में उनसे मिलने ही आए हैं। काफी कमजोर हो गई थी मां। अब उसका पूरा चेहरा झुर्रियों से भरा … Read more

भरोसा – मंजू ओमर

ये क्या दीदी ये कैसा व्यवहार करते है आप लोग ज्योति के साथ। मैंने तो आपको और आपके व्यवहार को देखकर आपके बेटे पंकज के लिए ज्योति का रिश्ता दिया था। मुझे नहीं पता था आप मेरे भरोसे को इस तरह तोड देंगी। वो तो मै न आती आपके घर तो मुझे पता ही न … Read more

बेटी यह तुम्हारे संस्कारों की परिक्षा है। – परमा दत्त झा

मां जीजाजी,-इससे आगे ट्विंकल बोल नहीं पाई और रोने लगी। क्या हुआ क्या किया रोहित ने?-मां ने आशंकित होकर पूछा। वे मेरे साथ अजीब व्यवहार करते हैं,माना कि मैं उनकी साली हूं मगर इसका क्या मतलब?-वह अपनी बात मां के सामने रखी। अच्छा,ऐसी बात है मां सब बातें समझ गयी।यह समस्या सुलझाना जरूरी है। मां … Read more

नई सोच – रश्मि वैभव गर्ग

सुम्मी …बुलाते थे सब उसको प्यार से। सुषमा नाम तो सिर्फ़ स्कूल में ही सुनती थी वह। अपने बहिन ,भाइयों में सबसे बड़ी होने की वजह से बचपन से ही ज़िम्मेदारी लेना उसके स्वभाव में ही आ गया था। पिता के यहाँ छोटा ही परिवार था  ,लेकिन उसको पारिवारिक तालीम अच्छी तरह से मिली थी।जैसे … Read more

“नहले पे दहला ” – कमलेश आहूजा

रमा बहुत क्रोधी और झगड़ालू स्वभाव की महिला थी।हर समय अपनी बहु से झगड़ा करती रहती थी,कभी काम को लेकर तो कभी दहेज को लेकर ताने देती रहती।बहु बेचारी बहुत सीधी थी कुछ नहीं बोलती और चुपचाप अपना काम करती रहती।रमा के पति रमेश जी बहुत सज्जन इंसान थे उन्हें रमा का इस तरह से … Read more

*एक बहु की समझदारी* – तोषिका

बधाई हो रमा जी, बधाई हो। ये रिश्ता पक्का हुआ, गले लगते हुए मीनू बोली। जी आपको भी बधाई हो , रमा बोली। मीनू का बेटा रमन उधर दूर खड़ा था। मीनू ने उसको बुलाया और कहा कि, “बेटा आकर अपनी होने वाली सास के पैर छू।” रमन का थोड़ा मुंह बना पर वो आ … Read more

बहू की समझदारी – अरुणा गर्ग

सुनैना का तीन महीने पहले ही विवाह हुआ था।वह एक सामान्य किन्तु खुली विचारों वाले परिवार की बेटी थी। उसने अपने मायके में अपनी मां को हमेशा परिवार में रहकर भी अपनी अलग पहचान बनाते देखा। वहीं पिता भी बहू बेटी को समान मानते।वह उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वह अपने ससुराल में भी सबके … Read more

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