आंसुओं की कीमत – मधु वशिष्ठ

मम्मी आप नया नौकर क्यों नहीं रखती हो? ” प्रिया बोली”।  बेटा ,मैंने साथ वाली आंटी को बोला तो है, थोड़ा ठीक हो जाऊं ,तो बाहर बैठकर कोई काम वाली ही ढूंढ लूंगी। सिर दर्द से फटा जा रहा है ,जरा थोड़ी अदरक वाली चाय तो बना देना । सवेरे से काम कर कर के … Read more

सबक – करुणा मलिक

अरे! लडके की माँ क्यूँ नहीं आई, आना चाहिए था।  उनका तो कल शाम तक पक्का प्रोग्राम था पर आधी रात में सर्दी के साथ ऐसा बुखार चढ़ा कि आँख खोलने की भी हिम्मत नहीं थी सुबह…. वो तो उनकी बहन वही ं है, उसके भरोसे छोड़ कर आए नहीं तो, आज का आना तो … Read more

प्यार – खुशी

मैं बालकनी में खड़ी इधर उधर देख रही थी।तभी एक ट्रक और एक गाड़ी आ कर रुके ।मुझे लगा चलो पड़ोस में कोई आया है कुछ दिन से सामने वाले फ्लैट में काम चल रहा था।गाड़ी में से एक डैशिंग सा आदमी उतरा और दूसरी तरफ से एक लड़की जो बिल्कुल सांवली थी चाहे तो … Read more

हैसियत – एम. पी. सिंह

सेठ मोहन दास आज जयपुर के जाने माने मार्बल एक्सपोर्टर है. ये सब उनकी मेहनत का नतीजा था. उनका बेटा रोहित भी एम.बी.ए. करने के बाद पिताजी के साथ काम करने लगा था. रोहित के आने के बाद एक्सपोर्ट की नई उचाईयो क़ो छू लिया. वैसे रोहित के दादाजी की साइकिल रिपेयर की दुकान थीं … Read more

“बेटियां भी होती हैं बुढ़ापे का सहारा ” – कमलेश आहूजा

“मम्मा,आप बैठो मैं बुआ के लिए चाय लेकर आती हूं।”नेहा की छोटी बेटी बोली।“सच नेहा,तू बड़ी किस्मत वाली है..तेरी दो बेटियां हैं,दोनों कितनी सेवा करती हैं तेरी?शादी के बाद भी तेरे दुख सुख में साथ खड़ी रहती हैं।” नन्द स्नेहा की बात सुनकर नेहा कुछ पलों के लिए अतीत में खो गईं.. नेहा को जब … Read more

असली खूबसूरती शरीर नहीं मन होता है – संजय सिंह

अरुण एक पढ़ा लिखा नौजवान था। अच्छी खासी नौकरी सरकारी विभाग में करता था ।परंतु इस नौकरी और पैसे ने उसको घमंड से पूरी तरह भर दिया था ।उसके विचार घमंड से पूर्व पूरी तरह भरे हुए थे। उसके माता-पिता उसे हमेशा साधारण व्यक्तित्व अपनाने को कहते थे। परंतु वह अहंकार में इतना डूब चुका … Read more

ससुराल में सास का सहारा – गीतू महाजन

“यह बेटियां कब से अपने मां-बाप का सहारा बनने लगी”।अपने पति नमन के मुंह से ऐसी कड़वाहट भरी बात सुनकर शालिनी हैरान रह गई।वो जानती तो थी की नमन एक संकीर्ण  सोच वाला व्यक्ति है पर उसकी सोच इतनी गिरी हो सकती है उसे यह नही पता था। “क्यों.. क्या बेटियां अपने माता-पिता की औलाद … Read more

खूबसूरत मन – लतिका श्रीवास्तव 

चंदा तुम अकेली यहां क्यों बैठी हो बाकी सब घूमने गई हैं तुम क्यों नहीं गईं विशाखा ने कमरे में अकेली बैठी लड़की को देख कर आश्चर्य से पूछा तो चंदा ने सिर  नीचे रखी पुस्तक में और झुका लिया। क्या हुआ चंदा मुझसे बताओ विशाखा ने उसके पास बैठते हुए स्नेह से कहा तो … Read more

*सहारा* – तोषिका

क्या बात है, बड़े खुश लग रहे हो श्यामलाल। क्या बात है ज़रा हमे भी तो बताओ, हस्ते हुए सूरज बोला। श्यामलाल मुस्कुराते हुए बोला “अरे ऐसी कोई बात नहीं है दोस्त बस आज मेरे बेटे नीरज का रिश्ता पक्का हो गया है कुछ महीनों में शादी है।” सूरज बोला “बधाई हो श्यामलाल! बधाई हो, … Read more

सहारा – बिमला रावत जड़धारी

राकेश अपने जीजा जी, गिरिश, को फोन करता है। फोन गिरिश की पत्नी सविता उठती है। हैलो, मैं राकेश बोल रहा हूॅं।भइया हम सविता बोल रहे हैं। सब ठीक तो है? आज कैसे फोन कर दिया? अरे आपकी दीदी नहीं रही तो आप ने यहॉं आना ही छोड़ दिया। हम भी तो आपकी बहन है। … Read more

error: Content is protected !!