दूरदर्शिता – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral Stories in Hindi
शाम के साढ़े सात बजे रहे थे,दिवाकर जी अभी तक घर नहीं लौटे थे। “न जाने कितना काम करने में मन लगता है इन्हें! जिंदगी भर तो काम करते ही रहे, अब रिटायरमेंट के बाद भी चैन नहीं!” अनुराधा जी बड़बड़ाते हुए बार-बार ड्राइंग रूम से बाहर निकल सड़क पर झांकती और फिर अंदर लौट … Read more