दूरदर्शिता – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

शाम के साढ़े सात बजे रहे थे,दिवाकर जी अभी तक घर नहीं लौटे थे। “न जाने कितना काम करने में मन लगता  है इन्हें! जिंदगी भर तो काम करते ही रहे, अब रिटायरमेंट के बाद भी चैन नहीं!”  अनुराधा जी बड़बड़ाते हुए बार-बार ड्राइंग रूम से बाहर निकल सड़क पर झांकती और फिर अंदर लौट … Read more

ढलती साँझ – संगीता अग्रवाल  : Moral Stories in Hindi

” नीता …नीता !” माधव ने चीख कर पत्नी को पुकारा । ” क्या हुआ , आप इतने व्यथित क्यो हो ?” नीता जल्दी से रसोई से बाहर आई और पूछा । ” सब बंद कर दो कोई खाना नही बनेगा और फटाफट कुछ कपड़े बैग मे डालो हमें अभी निकलना है !” अश्रुपूर्ण आँखों … Read more

जीवन साथी बिन ना ढलती साँझ – रश्मि प्रकाश  : Moral Stories in Hindi

“ सही है तुम भी मुझे छोड़ कर चली गई…. कहाँ हम सोचा करते थे… जब साँझ ढलेगा इधर बरामदे में झूले पर बैठ कर बाहर का नजारा निहारा करेंगे और साथ में तुम्हारी पसंद का लिप्टन ग्रीनलेबल चाय का आनंद लिया करेंगे पर देखो ढलती साँझ तो है पर मै यहाँ अकेला रह गया…. … Read more

ढलती शाम – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

“पापा••• अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता “मैं••• सब कुछ छोड़-छाड़—  मुन्ना को ले घर आ रही हूं••• ! पर ये समय अंश पर गुस्सा करने का नहीं बल्कि हिम्मत से काम लेने का है••मेरी बच्ची•• ! जैसा तुम बता रही हो उस हिसाब से मुझे लगता है कि अंश की मानसिक स्थिति ठीक नहीं••!  पर … Read more

ढलती सांझ – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

********** पार्थ के जीवन की ढलती सांझ इतनी खुशनुमा और प्यारी होगी उसने सोंचा भी नहीं था।  उसे तो लगता था जब यौवन में  कोई सुख नहीं मिला तो  सांझ तो सन्नाटे और वीरानी का पर्याय होगी ही। अचानक कुछ ऐसा हुआ कि उसका पूरा जीवन ही बदल गया।‌ विवाह की शहनाइयों की गूॅज धीमी … Read more

अहंकार – पुष्पा पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

शहर की रहने वाली कुसुम की शादी गाँव में हुई। कुसुम के पिता को गाँव में ही एक पढ़ा-लिखा युवक उनके आदर्शों पर खरा उतरा और उसे अपना दामाद बना बैठे। तब कहाँ कोई लड़की  से उसकी पसंद  पूछता था। वैसे युवक प्रतिभाशाली था। इंजिनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। कुसुम को ससुराल वालों ने … Read more

बहुत याद आती है सासू मां की – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

देख बेटा तान्या….. तू नौकरी करना चाहती है ना…. बेशक कर….! पर याद रखना घर की व्यवस्था तो तुझे ही देखनी पड़ेगी…. स्पष्ट और सच बोलना शायद सही होगा …।     मुझसे ना …ये घर के कामों और तुम्हारी मदद के विषय में ज्यादा उम्मीद मत रखना…..  मैं उम्र के इस पड़ाव  ” ढलती सांझ ” … Read more

एक हाथ से ताली नहीं बजती – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

सुमन ,कहा हो आओ जल्दी ,देखो मेरी शर्ट कैसी लग रही है? पूरे पांच हजार की है | सुमन क्या पांच हजार? हा जी सुमन मैडम पांच हजार की है | सुमन ने गुस्से में बोला ,पांच हजार की हो या ,दस हजार  की,बिल्कुल अच्छी  नहीं है|बोल के रसोई में चली गई | रमन को … Read more

“मैं अपने अहंकार में रिश्तों के महत्त्व को भूल गई थी” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा : Moral Stories in Hindi

अहंकार एक ऐसा रोग है जिसपर बंदिशें न लगाई जाए तो उसकी वृद्धि चौगुनी होती चली जाती है ।चाहे इसका कारण धन हो, बल हो , या अत्यधिक ज्ञान का गुमान हो कुछ भी हो सकता है ।अहंकार का बुखार सिर पर चढ़ कर बोलता है। वह हमारी बुद्धि भ्रष्ट कर देता है और इसका … Read more

बहू कभी बेटी नहीं बन सकती – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

मोहिनी क्या कर रही है तू कितने दिनों से बेंच पर आकर नहीं बैठी क्या काम करती रहती है तेरे घर में तो बहू बेटी दोनों ही है…  सरिता ने आवाज देकर कहा- पड़ोस में रहने वाली सरिता मोहिनी की सबसे खास दोस्त है..  हमेशा दोनों सुबह टहलने जाते हैं योग करते हैं और शाम … Read more

error: Content is protected !!