अपने आत्म-सम्मान की रक्षा उसके खुद के हाथ में है – डॉ. पारुल अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

सुहानी, जो पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और उसे नौकरी करने का भी शौक था, शादी के बाद जब ससुराल आई, तो उसे अपने ससुराल में यह समझने में देर नहीं लगी कि यहां के लोग पढ़ी-लिखी बहू को आसानी से अपनाने वाले नहीं हैं। ससुराल में वह पहली बहू थी जिसने न केवल उच्च … Read more

पापा! नीता की जगह अगर आपकी बेटी होती तो… – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

नीता और रमन की शादी का दिन था। यह वह दिन था जिसका नीता ने बचपन से सपना देखा था। अपने मन में अनेक सपनों और उम्मीदों के साथ वह रमन के साथ फेरे लेने के लिए तैयार थी। मंडप में सजी हुई नीता के चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान थी, उसकी आँखों में … Read more

हमारी बहू वो सबकुछ करेगी जो उसे अच्छा लगता है – गुरविंदर टूटेजा : Moral Stories in Hindi

निहारिका की आदत थी कि वह हमेशा अपनी मांग में बिदीं लगाती थी। पार्थ को निहारिका की यह छोटी सी आदत बहुत पसंद थी। जब भी निहारिका बिना बिदीं के होती, पार्थ उसे देखकर तुरंत कहता, “निहू, तुमने बिदीं क्यों नहीं लगाई? तुम बिदीं में बहुत सुंदर लगती हो।” पार्थ का यह प्यार भरा आग्रह … Read more

एक नई शुरुआत – मधु झा,, : Moral Stories in Hindi

शीतल नौ महीने बाद पहली बार मुस्कुराई थी, अपनी नन्हीं सी गुड़िया का चेहरा देखकर उसकी सारी शिकायतें, दर्द, और मायूसियाँ जैसे एक पल में खत्म हो गईं। ऐसा लगने लगा था जैसे उसकी जिंदगी में एक नई सुबह आई हो, जिसने उसके जीवन को फिर से खुशियों से भर दिया हो। शीतल की शादी … Read more

मेरी बेटी ने ही मुझे जख्म दिया – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

एक दिन रमेश जी को  पता चला कि उनकी बेटी ने कोर्ट में शादी कर ली है। उन्हें यह सुनकर गहरा आघात पहुंचा, लेकिन उन्होंने सोचा कि शायद उसने अपनी खुशी के लिए यह निर्णय लिया होगा। पिता का दिल हर दुख सहन कर सकता है अगर उसे यकीन हो कि उसकी संतान खुश है। … Read more

हर रिश्ते में प्यार और अपनापन होना जरूरी है – अंजना ठाकुर : Moral Stories in Hindi

 सीमा और उसके पति की दो बेटियां थीं, और उनके लिए यह दो बेटियां ही उनका संसार थीं। उन्होंने यह निश्चय कर लिया था कि उनकी बेटियां ही उनका सहारा होंगी, और इसी कारण उन्होंने और बच्चे न करने का फैसला किया। सीमा और उसके पति ने अपनी बेटियों को सबसे अच्छे संस्कार और शिक्षा … Read more

आत्म-सम्मान की सीमा – पूजा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

रचना के जीवन में यह घटना एक ऐसे अंधेरे पलों में आई, जिसे वह कभी भूल नहीं सकती। कोचिंग से लौटने के बाद जब वह अपने कमरे में गई, तो गुस्से और दुःख से भर गई थी। उसने अपना बैग मेज पर फेंका और कुर्सी पर थक कर बैठ गई। उसकी आंखों में अपार गुस्सा … Read more

खुशियों के दीप – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

शकुन के चेहरे की खुशी आज देखते बन रही थी।सही मायने में तो दीपावली आज मन रही थी शकुन के घर खुशियों के दीप जो जले थे। नाचती फिर रही थी शकुन ।आज तीन सालों बाद घर में खुशियों के दीप जलें है । नन्ही मुस्कान भी नई मां की गोद पाकर खुश थी । … Read more

अफ़सोस – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

देवी अपने माता-पिता की तीसरी संतान थी उसके दो भाई थे । माता-पिता भाई अत्यधिक लाड़ प्यार के कारण उसे घर से बाहर निकलने नहीं देते थे। जब भी वह कहती थी कि माँ बाहर भाइयों को खेलते हुए देखूँगी तब भी माँ बाहर बैठने नहीं देती थी कहतीं थीं कि लड़कियों को चारदीवारी पार … Read more

मायके में हस्तक्षेप ना करो बिटिया रानी – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

प्रतिदिन की तरह फोन पर आरना का पहला सवाल….. ” हैलो मम्मी क्या कर रही हो …??”  “कुछ नहीं बेटा वो सब्जी बना रही हूं…!” ” तुम क्यों सब्जी बना रही हो…? भाभी कहां गई …..?” ” आज रेनू के कमर में दर्द है इसीलिए वो लेटी है, मैंने सोचा तब तक मैं ही सब्जी … Read more

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