साए से सवेरे तक
सुनंदा ने कसम खाई थी कि जिस उपेक्षा, अकेलेपन और तिरस्कार के साए में उसका अपना बचपन बीता था, उसकी परछाई भी नयनतारा पर नहीं पड़ने देगी। उसने अपनी हर सांस, अपनी हर ख्वाहिश अपनी बेटी के नाम कर दी। नयनतारा भी विलक्षण प्रतिभा की धनी निकली। जब वह छोटी थी, तो स्कूल से लौटते … Read more