गरीबी का रंग – शुभ्रा बैनर्जी
“अरे रहने दे बेटा,तेरी छोटी बुआ को बुलाने से कोई फायदा नहीं।नहीं आएगी इस बार भी।मुंह फुलाए बैठी रहेगी अपने घर,और यही सोचती रहेगी कि मैं क्यों नहीं गया उसे बुलाने। कितने साल हो गए उसे,यहां आए।बाकी तीनों जिज्जी हर त्योहार में सपरिवार आ जाती हैं एक बार बुलाने से।बस तेरी छोटी बुआ ही नहीं … Read more