रिश्तो के रंग बदलते हैं – गीता वाधवानी

 दो पक्की सहेलियां ममता और नम्रता। बचपन से साथ-साथ। स्कूल में साथ-साथ और उसके बाद कॉलेज में साथ-साथ फिर उसके बाद नौकरी  भी साथ-साथ। दोनों के घर भी साथ-साथ ही थे। 

     फिर एक दिन अचानक नम्रता के लिए राज का रिश्ता आया। लंबा, गेहुआ रंग हैंडसम राज। ममता बहुत खुश थी लेकिन राज को देखने के बाद उसके मन में एक बार यह बात अवश्य आई थी कि काश! इसके साथ मेरी शादी हो जाए।  

 फिर कुछ समय बाद नम्रता की शादी राज से हो गई। अब ममता खुद को अकेला महसूस करती थी। नम्रता उसे कहती थी कि जब भी दिल करे मिलने आ जाना और फिर हम ऑफिस में तो रोज मिलते ही है। 

     एक बार नम्रता की तबीयत बहुत खराब हो गई थी तो वह ऑफिस नहीं गई। शाम को ममता उससे मिलने आ गई। नम्रता ने उसे जिद करके अपने पास ही रोक लिया और उसके घर पर फोन करवा दिया। 

 ममता का जब भी मन होता वह नम्रता से मिलने आ जाती थी और उसके आने से राज को भी अच्छा लगता था। धीरे-धीरे राज और ममता में दोस्ती हो गई थी। 

 एक बार ममता ने ऑफिस से छुट्टी ली थी, तब नम्रता ने सोचा कि क्यों ना मैं ममता के घर जाकर उसे सरप्राइस दूं और अपने घर पर भी सबसे मिलकर आऊं। 

 ऐसा सोचकर वह ममता के घर पहुंच गई। ममता की मां ने कहा कि -” अरे बेटी नम्रता, आज तुम ऑफिस नहीं गई? ” 

 नम्रता -” आंटी वो मैं ममता से मिलने——” 

 ममता की मां -” ममता तो कह रही थी आज ऑफिस जाना बहुत जरूरी है छुट्टी नहीं मिल सकती। ” उन्होंने नम्रता की पूरी बात सुनी ही नहीं। 

 नम्रता नमस्ते करके वहां से निकल गई और अपने मायके चली गई। कुछ देर बैठने के बाद वह अपने घर वापस लौट गई।      गीता वाधवानी 

 मैं सोच रही थी कि ममता घर पर भी नहीं है और ऑफिस में भी नहीं है, वह कहां चली गई। अगर उसकी मम्मी से कहूंगी,तो उन्हें टेंशन हो जाएगी मैं पहले ममता से बात करूंगी।  

 अगले दिन जब नम्रता ने ममता से पूछा-” तुम कल ऑफिस क्यों नहीं आई थी और तुम घर पर भी नहीं थी, कहां गई थी ममता? ” 

 ममता-” जरूरी काम से कहीं जाना था। ” 

 नम्रता को ममता का जवाब बड़ा अजीब लगा। उसने सोचा कि ममता कुछ छुपा रही है, पहले तो वह ऐसा नहीं करती थी। 

 थोड़े दिनों बाद ममता ने फिर छुट्टी ले ली। इसी तरह दो-तीन हफ्ते बीतने के बाद ममता ऑफिस नहीं आई थी, उस दिन नम्रता को बहुत तेज सिर दर्द हो रहा था इसीलिए वह हाफ डे लेकर घर चली गई। उसने देखा कि बाहर से ताला नहीं लगा हुआ है। इसका मतलब राज घर पर है और वह वर्क फ्रॉम होम कर रहा है। उसने दरवाजे पर घंटी बजाई। 10 मिनट खड़े रहने के बाद भी राज ने दरवाजा नहीं खोला। उसने फिर बेल बजाई। 

 अब जब दरवाजा खुला, तो नम्रता हैरान रह गई क्योंकि दरवाजा खोलने वाला राज नहीं था बल्कि ममता थी। 

 ममता भी उसे देखकर सकते में आ गई। अपने बेडरूम में राज और बिस्तर का हाल देखकर वह सब कुछ समझ गई और वह ममता पर चिल्लाने लगी। तो यह है तुम्हारा जरूरी काम। तुम तो मेरी बेस्ट फ्रेंड थी, तुम्हीं ने मुझे धोखा दिया और राज तुम कहते थे कि तुम मुझसे प्यार करते हो,तो यह सब क्या है? ” 

 राज-” नम्रता तुम्हें कुछ गलतफहमी हो रही है, ममता तो बस वैसे ही मिलने आई थी। ” 

 नम्रता -” हां, मुझे तो कुछ दिखता नहीं है मैं अंधी होने के साथ-साथ बेवकूफ भी हूं। ” 

 ममता-“राज, मुझे लगता है अब नम्रता से कुछ भी छुपाने का कोई फायदा नहीं है, इस सब सच बता दो। ” 

 राज-” नम्रता, मुझे तुम्हारी सहेली ममता से प्यार हो गया है और अब मैं इसी के साथ रहना चाहता हूं, मैं तुम्हें तलाक के साथ पूरा खर्चा भी दूंगा। ” 

 नम्रता -” मुझे तुम्हारी भीख नहीं चाहिए, लेकिन एक बात हमेशा याद रखना की बचपन से साथ रहने वाली हम दोनों बेस्ट फ्रेंड, जब मुझे  धोखा दे सकती है तो तुम्हें भी एक दिन धोखा देगी।” 

 दोनों के घर वालों को यह बात सुनकर जबरदस्त धक्का लगा। ममता के माता-पिता ने उसे बहुत समझाया और डांटाभी। लेकिन वह अपनी जिद पर अडी रही। आखिरकार राज और नम्रता का डिवोर्स हो गया और राज ममता से शादी करके उसके साथ रहने लगा। 

 ममता जब ऑफिस में थी, तब एक दिन नम्रता अपना कुछ सामान लेने राज के घर गई थी। तभी वहां अचानक ममता आ गई और नम्रता के ऊपर चिल्लाने लगी कि तुम मेरे पति के पास क्या लेने आई हो। तुम्हें मेरे पीछे से मेरे घर आने की कोई जरूरत नहीं है। अपने सामान के बारे में मुझसे कहो और वह राज के ऊपर भी चिल्लाने लगी। 

 नम्रता ने कहा-” धोखा देने की फितरत तुम्हारी है, मेरी नहीं, मेरा पति छीन कर, मुझ पर ही शक कर रही हो। शर्म आनी चाहिए तुम्हें। ” 

     ममता राज पर भी शक करती थी। अब दोनों के बीच झगड़े बढ़ते जा रहे थे। किसी के सुख चैन को छीन कर, कोई स्वयं कैसे सुखी रह सकता है। गीता वाधवानी  

 एक बार राज ने नम्रता को फोन करके मिलने के लिए बुलाया। वे लोग एक कैफे में कॉफी पीते पीते बातें करने लगे। 

 राज-” नम्रता, मैंने तुम्हें माफी मांगने के लिए बुलाया है। मैं तुम्हारे साथ बहुत गलत किया। मुझे माफ कर दो। ममता से शादी करके मैं पछता रहा हूं। वह मुझ पर शक करती है और रात दिन मुझसे लड़ती रहती है। समझ नहीं आ रहा कि उसे कैसे समझाऊं? ” 

 नम्रता -“राज, मैंने देखा है रिश्तो के भी रंग बदलते हैं, तुम दोनों ने मुझे धोखा दिया और अब तुम आपस में प्यार से रह नहीं पा रहे हो। मेरी बेस्ट फ्रेंड ने, मेरा पति मुझसे ले लिया और मेरे पति ने धोखेबाज का साथ दिया। अब तुम्हें समझ में आ गया होगा कि यह प्यार नहीं था केवल आकर्षण था। आकर्षण खत्म होने पर ऐसा ही होता है। अब तुम्हें ममता के साथ ही जीवन जीना है और अपना रिश्ता निभाना है। कैसे भी करके उसे समझाओ कि वह तुम्हारे ऊपर शक ना करें, मैं बस इतना ही कर सकती हूं कि एक बार उससे बात करके उसे समझाऊंगी। ” 

 राज को अफसोस हो रहा था कि नम्रता जैसी समझदार पत्नी को उसने खो दिया है। वह मन ही मैन खुद को कोस रहा था। 

 फिर नम्रता ने, ममता से बात करके उसे समझाया कि वह राज पर शक ना करें। 

 लेकिन ममता ने उसे समझने की बजाय उस पर इल्जाम लगाने शुरू कर दिए। तब नम्रता ने उससे दूरी बना ली और यही सोचा कि अब अपना रिश्ता तुम दोनों खुद संभालो,मैंने तो रिश्तो के बदलते रंग देख कर बहुत कुछ सीख लिया है। 

 अप्रकाशित स्वरचित गीता वाधवानी दिल्ली 

साप्ताहिक प्रतियोगिता विषय #रिश्तों के भी रंग

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