रिश्तो के रंग – मधु वशिष्ठ

डोर बेल बजने पर दरवाजा खुला तो सामने मिसेस भसीन को मुस्कुराते हुए खड़ा पाया। उन्हें अंदर आने को कहा तो झट से बोली ,नहीं बहन जी ,आप तो हमारे घर आती नहीं ,मैं भी आपके घर नहीं आऊंगी। अरे भाई ,अगर नहीं आना था तो डोर बैल क्यों बजाई ?मन मन में ही कहते … Read more

“रंग बदलते रिश्ते ” – कमलेश आहूजा

मीना सुबह के काम से निपटी ही थी कि,भाभी का फाेन आ गया।मीना ने फोन उठाया-“नमस्ते भाभी,कैसे हैं आप लोग?” “मीना हम सब ठीक हैं। तुम्हें एक गुड न्यूज़ देनी थी,अंजु का रिश्ता पक्का कर दिया है।शादी भी अगले महीने है,बस तुम जल्द से जल्द आ जाना सब काम तुम्हें ही करना है आख़िर तुम … Read more

गरीबी का रंग – शुभ्रा बैनर्जी 

“अरे रहने दे बेटा,तेरी छोटी बुआ को बुलाने से कोई फायदा नहीं।नहीं आएगी इस बार भी।मुंह फुलाए बैठी रहेगी अपने घर,और यही सोचती रहेगी कि मैं क्यों नहीं गया उसे बुलाने। कितने साल हो गए उसे,यहां आए।बाकी तीनों जिज्जी हर त्योहार में सपरिवार आ जाती हैं एक बार बुलाने से।बस तेरी छोटी बुआ ही नहीं … Read more

रिश्तों के भी रंग – बिमला रावत जड़धारी

राहुल अपनी मम्मी का अंतिम संस्कार करके घर पहुंचा साथ में उसके पापा, जीजा जी, रिश्तेदार और पड़ोसी थे सब अपने अपने घर जा रहे थे। थोड़ी देर में उसके दोनों जीजा जी भी अपने घर चले गए । घर में दोनों बहनें ,पापा और राहुल थे। पंडित जी भी कल आने का बोल कर … Read more

*रिश्तों के भी रंग* – तोषिका

रंग हमारी पहचान बन गए है, आजकल रंग के बिना कुछ भी नहीं है। ऐसा मिष्टी अपने आप से ही बोल रही थी कि तभी पीछे से उसकी नानी आई और बोली *रिश्तों के भी रंग होते है* और आज तक उन रंगों को कोई भी रंग पीछे नहीं छोड़ पाया है। अरे नानी मैं … Read more

रिश्तों के भी रंग – डोली पाठक

तुमसे जो वस्तु मंगाई थी वो ले आई तुम??? बड़ी-बड़ी दाढ़ी और चेहरे से काईंया दिखने वाले उस तांत्रिक ने जब ये प्रश्न किया तो उसकी बड़ी बहू नंदिता हड़बड़ा गई और कांपते स्वर में बोली – जी जी हां लाई हूं…  अपने आंचल के कोने से किसी स्त्री के अंतःवस्त्र निकाल कर उस तांत्रिक … Read more

रिश्तो के रंग बदलते हैं – गीता वाधवानी

 दो पक्की सहेलियां ममता और नम्रता। बचपन से साथ-साथ। स्कूल में साथ-साथ और उसके बाद कॉलेज में साथ-साथ फिर उसके बाद नौकरी  भी साथ-साथ। दोनों के घर भी साथ-साथ ही थे।       फिर एक दिन अचानक नम्रता के लिए राज का रिश्ता आया। लंबा, गेहुआ रंग हैंडसम राज। ममता बहुत खुश थी लेकिन राज को देखने … Read more

निस्वार्थ रिश्ते – रेखा जैन

नूपुर चार महीने की नन्ही सी सिया को अपनी गोद में ले कर बैठी हुई थी। चारों तरफ भीड़ थी, रोने चीखने की आवाजें, शोर, और सिसकियां बता रही थी कि इस घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सामने ही नूपुर की ननद सौम्या और ननदोई अजय के शव पड़े थे।  दोनों किसी … Read more

रिश्तों के रंग – खुशी

हमारे मोहल्ले में एक बाबा आता था सबके घर नहीं पर गिने चुने घरों में वो भिक्षा लेता था।उनमें एक हमारा घर भी था।मेरी दादी मेरी मां कमला को बहुत गुस्सा करती थी कि क्यों देती हैं इस बूढ़े को रोज खाना बाकी लोग तो फिर भी बचा खुचा देते थे मां जैसे ही आवाज … Read more

रिश्तों के भी रंग -निधि गुप्ता

मांसी को बचपन से ही रंगों से बहुत प्यार था। उसके कमरे की दीवारें तरह-तरह की पेंटिंग से भरी रहती थीं। कहीं नीले आसमान में उड़ते पक्षी, कहीं हरे खेत, तो कहीं लाल-पीले फूल। मांसी कहती थी कि रंग सिर्फ कागज़ पर नहीं होते, रिश्तों में भी होते हैं। मांसी की मां अक्सर मुस्कुराकर कहती, … Read more

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