सीख – खुशी

रागिनी और राम का एक प्यारा सा परिवार था।जिसमें राम के पिता नंदकिशोर और उसकी मां रमा थे ।तीन बच्चे महक, प्रफुल और नरेन थे।सुखी परिवार था दादा दादी बच्चों को अच्छी शिक्षा देते।राम कुमार बैंक में थे और नंदकिशोर सरकारी अध्यापक थे।उनकी गाँव में जमीन थी जिसको  आधा बेच उन्होंने  एक मकान बनवा लिया था

जिसे आगे जाकर राम कुमार ने और पैसा लगा बढ़िया करवा दिया था।नीचे हाल ,रसोई पूजा घर और दादा दादी का कमरा।ऊपर चार कमरे थे।जिसने से दो बच्चों के एक रागिनी और राम का और तीसरा गेस्ट रूम था। बच्चे भी अच्छे से पढ़ रहे थे।दादा जी शिक्षा देते और दादी संस्कार और सीख।

बच्चे अच्छे संस्कारी व आज्ञाकारी थे। महक का नेवी में सिलेक्शन हो गया और वो  तमिलनाडु चली गई।प्रफुल बैंक में लग गया और नरेन मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर ।माता पिता और दादा दादी बच्चों की तरक्की से खुश थे। महक ने अपने साथ काम करने वाले राजन को अपना जीवन साथी चुना वो मलयाली थे परिवार केरल में था

और राजन नौकरी के क।रण तमिल नाडु में था। दोनों परिवारों की स्वीकृति से यह विवाह सम्पन्न हो गया। अब प्रफुल्ल के लिए लड़कियां देख रहे थे। उसी बीच प्रफुल्ल के मामा के बेटे की शादी आई और सब लोग  वहां गए। उनके पड़ोसी की बेटी किरण प्रफुल्ल को भा गई प्रफुल्ल उससे शादी करना चाहता था।

उसने यह बात अपनी मां को बताई। मां ने अपने भाई से बात की मामी बोली घर तो अच्छा है परन्तु किरण किसी से ज्यादा मेल जोल नहीं रखती।अरे लड़कियां कहा ज्यादा बोलती है कोई नहीं चलो रिश्ते की बात चल।ते है।इस प्रकार किरण और प्रफुल  की शादी हो गई।

शुरु के दिन तो घूमने फिरने में लग गया फिर प्रफुल ऑफिस जाने लगा।किरण सारा दिन अपने कमरे में रहती या मायके में।दादी और रागिनी बोलती भी की बेटा अब तुम्हारा घर यह है रोज रोज़ मायके जाना अच्छा नहीं तुम यहां दिल लगाओ ।हमारे साथ उठो बैठो पर  किरण पर कोई असर नहीं था ।

वो सिर्फ उस घर में खाने और सोने के लिए आती।इसी बीच किरण के भाई की शादी पक्की हो गई अब तो कहना ही क्या ? मा अकेली है उनकी मदद करनी है शादी की तैयारियों में अब तो 2 चार दिन रुक भी जाती।एक बार रागिनी ने दबे शब्दों में ये बात किरण की मां को बोली भी थी कि रोज बेटियों का मायके आना अच्छा नहीं लगता तो किरण की मां ने उतर दिया था

कि आपकी दूर है इसलिए ऐसा कह रही है।उधर किरण शादी से 20 दिन पहले ही वहां चली गई और इधर रागिनी की तबीयत खराब हो गई और उसे हॉस्पिटल ले जाना पड़ा।प्रफुल ने फोन पर किरण को बताया कि मां एडमिट है उनकी सर्जरी है ।किरण बोली मै कैसे आऊं यहां बहुत काम है।दादी वही से गुजर रही थीं 

उन्होंने अपने हाथ में फोन ले कर कहा बहु तुम्हारा मायका ससुराल से बढ़ कर है क्या? जो सिर्फ तुम्हे वही की चिंता है तुम्हारी सास हॉस्पिटल में है ।पति बुला रहा है पर तुम कुछ सुनना ही नहीं चाहती ।इस घर को अपना मानो तब ना।दादी गुस्से में चली गई

और किरण प्रफुल्ल से लड़ने लगी तुम्हारी दादी ने मेरा अपमान किया अब मै नहीं आऊंगी।प्रफुल और नरेन ने हॉस्पिटल संभाला।प्रफुल की बहन और जीजाजी भी आ गए तो सब अच्छे से हो गया।मां डिस्चार्ज होकर घर आ गई।हर रिश्तेदार किरण का पूछ रहा था पर क्या जवाब देते।

प्रफुल की मामी बोली मैने तो पहले ही कहा था कि मिलन सार लड़की नहीं है।घर में जोर शोर से तैयारी चल रही हैं शादी की।दो दिन बाद किरण के माता पिता रागिनी से मिलने और शादी का न्योता देने आए।दादी ने उन्हें भी कहा आपकी बेटी ने अब तक इस घर को नहीं अपनाया।किरण की मां रानी बोली बच्ची है अभी भाई की शादी के अरमान है ना इसलिए ।

अरे अब बहु है तो ससुराल के प्रति भी तो कोई फ़र्ज़ है। सास दस दिन हस्पताल में थी एक घंटे का समय ना मिला उसे।राम बोले चलिए कोई नहीं बेटा चाय नाश्ता देखो।बस जी हम आपको शादी का न्योता देने आए थे विकास जी बोले किरण के पिता ।भाई साहब शादी निपटा कर आ जाएगी।

माफ कर दीजिए ।अरे भाई माफी नहीं मांगिए बच्चे हैं सीख जाएंगे।राम कुमार बोले । नंदकिशोर ने भी कहा बच्चे सीख जाते है बस उन्हें सही सीख की जरूरत होती हैं। बहुत आग्रह करके गए वो लोग और प्रफुल तो दामाद था उसे तो हफ्ता भर पहले ही पहुंचना था।

सबके जाने के बाद प्रफुल और नरेन बैठे थे।बोला भाई इसलिए मैं शादी नहीं करूंगा लड़कियों को समझ ही नहीं होती की किसे ज्यादा तरजीह देनी चाहिए।रागिनी और राम कुमार तो रागिनी की तबीयत के कारण विवाह में नहीं जाने वाले थे।दादा दादी शादी वाले दिन ही नरेन और महक के साथ जाने वाले थे।

महक रुक गई थी मां की देखभाल के लिए राजन बच्चों के साथ चले गए थे। प्रफुल पहले गया किरण का मुंह चिड़ा हुआ था।उसे दादी पर गुस्सा था।शादी हो गई प्रफुल्ल ने कहा घर चलो।किरण बोली मै नहीं आ रही हूं मैं यही रहूंगी। प्रफुल्ल बोला तुम्हारी मर्ज़ी आना हो आ जाना ।

तुम्हे मेरी या मेरे घर वालो की कुछ नहीं पड़ी।प्रफुल अगले दिन घर लौट आया ।फुल टाइम मेड लगी हुई थी अब महक को भी वापस जाना था।उसने भी किरण से बात की पर किरण ने उसे भी मना कर दिया।महक बोलीं प्रफुल सब टाइम पर छोड़ दो।उधर किरण के मायके पर रहने से उसकी भाभी सुमन ने अपने पति विनय को कहा दीदी अपने घर क्यों नहीं जाती।

अरे चली जाएगी कुछ दिन तुम्हारे साथ रहना चाहती है।सुमन बोली अच्छा शुरू में सब ठीक था फिर सुमन और विनय हनीमून पर गए वहां से वापिस आ कर भी किरण अपने घर नहीं गई थी और उसका हर बात में बोलना सुमन को पसंद नहीं था।सुमन ने विनय से कहा अब तो महीना हो गया भेजो इन्हें ।

विनय ने अपनी मां से कहा तो वो बोली बेटे ये जाना ही नहीं चाहती।मां ये क्या बात हुई।किरण का घर तो वो है।सुमन भी गुस्से में अपने घर चली गई क्योंकि किरण उसे भी टोकती रहती थी।सुमन के जाने से विनय नाराज़ हो गया और अपने माता पिता से बोला यदि ये अपने घर नहीं गई तो मै अलग हो जाऊंगा।

इसकी बेवकूफी की सजा हम क्यों भुगते। विकास बोले कुछ तो हल निकालना होगा अगले दिन से सब का व्यवहार किरण के प्रति बदल गया।विनय तो वैसे ही नाराज़ था किरण ने बोल दिया अपनी चहीती को बुलाओ दो दिन से मायके में है विनय बोला तुम तो 3 महीने से हो।

पापा देखो ये मुझे क्या कह रहा है किरण बोली बेटा ठीक तो कह रहा है तुम अपना घर परिवार छोड़ कर यहां बैठी हो और तुम्हारे कारण बहु भी चली गई हमारी समाज में इज्जत है चार दिन की ब्याही बहु घर चली गई चलो जी बहु को लाते है।मै भी चलू किरण बोली विनय बोला नहीं।

सब सुबह के गए शाम को आए सब सुमन के आगे पीछे घूमते कोई किरण पर ध्यान नहीं देता था किरण को अपने दिन याद आ रहे थे कैसे मां दादी प्रफुल उसके आगे पीछे घूमते थे।दादा जी तो रोज पूछते थे कि क्या लाऊ सैर से वापस आते हुए पर मैं किसी की कोई बात नहीं सुनती थी।

आज सब बाहर गए पर किरण को छोड़ कर।किरण ने प्रफुल को फोन लगाया मुझे लेने आ जाओ मै अपने घर आना चाहती हूं।ठीक है मैं आ रहा हूं प्रफुल बोला सब हंसने लगे विनय बोला जीजाजी तीर निशाने पर लग गया।थैंक्स टू सुमन भाभी अरे क्या थैंक्स तुम मेरे कॉलेज फ्रेंड हो तुम लोगों को तो मै अच्छे से जानती थी इसलिए दीदी को सही राह दिखाना जरूरी था

विकास बोले सही मै बहु जो हम ना कर पाए वो तूने कर दिया।अगले दिन सपरिवार आने का वादा  ले कर सब घर आ गए। किरण तैयार बैठी थी कही जा रही हो।हा अपने घर प्रफुल लेने आ रहा है।तभी प्रफुल का फोन आया आज काम है कल आऊंगा।किरण बोली मै खुद आ जाती हूं नहीं रात हो रही है मै कल आऊंगा।

विनय बोला हा एक दिन और रह ले।किरण अपने कमरे में चली गई।रानी को बुरा लग रहा था पर विकास और विनय के सामने वो चुप थी बेटी का घर भी तो बसाना था।अगली सुबह पकवानों की खुशबू से घर महक रहा था ।किरण प्रफुल्ल को फोन लगा रही थी वो उठा ही नहीं रहा था।

12 बजे गाड़ी की आवाज आई सपरिवार प्रफुल किरण को लेने आया था।सुमन किरण के कमरे में आई बोली कोई तुमसे मिलने आया है।  कौन है किरण बोली देख लो किरण बाहर आई तो पूरे परिवार को देख खुश हुई चलो बहूजी अपने घर रागिनी बोली हा बेटा आज तुम्हारी पुनः विदाई है अच्छे से अपने ससुराल धर्म को निभाना सभी ने खाना खाया

और किरण का सामान गाड़ी में रखा जा रहा था।सुमन आगे आई और बोली दीदी आती रहना ये घर आपका भी है परंतु अब असली घर वो है हम हमेशा आपके साथ हैं कुछ गलती हो गई हो तो माफ कर देना।विनय ने भी कहा ये सब तुझे तेरे ससुराल का महत्व बताने के लिए किया था।

बेटा ये सीख है मायका ससुराल बराबर है और दोनों के प्रति तुम्हारे कर्तव्य भी दादी बोली। किरण बोली जी दादी मुझे समझ आ गया है कि पहले मेरे ससुराल है फिर मायका ।नहीं बेटा दोनों परिवार तुम्हारे है बस तालमेल की जरूरत है।सब लोग घर आ गए।घर दुल्हन की तरह सजा था नरेन बोला भाभी वेलकम रागिनी ने आरती उतार कर किरण को अंदर लिया।

वीडियो कॉल पर महक और राजन भी थे सारा परिवार बहुत खुश था।कमरे में आ कर किरण ने प्रफुल से भी माफी मांगी।प्रफुल ने उसे गले लगा लिया और शरारत से बोला भई आज ही मेरी दुल्हन घर आई है अब मै अपनी तन्हाई के हिसाब पूरे करूंगा।किरण शर्मा उसके सीने से लग गई।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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