*मैंने यह तो नहीं चाहा था* – पुष्पा जोशी : Moral Stories in Hindi

शालीन आज बहुत खुश था। उसे लग रहा था उसे खुशियों का खजाना मिल गया है, जिस माँ के मुख से बेटा सुनने के लिए उसके कान तरस रहै थे, उन्हीं माँ की आज चिट्ठी आई थी। वह मन ही मन गुन रहा था कि ‘मेरी माँ की चिट्ठी आई है……. मेरी माँ ने मुझे … Read more

 प्रायश्चित – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

सुरेश बाबू की आंखों में आज पश्चाताप के आंसू बह रहे थे उन्होंने पत्नी यशोदा के जाने के बाद दूसरी शादी वसुधा से कर ली थी। पहले तो वसुधा ने चिकनी – चुपड़ी बातों में उलझाकर उनके बच्चों को अपना बच्चा कह कर बहुत प्रेम और स्नेह जताया था और सुरेश बाबू भी बच्चों को … Read more

 हमसफ़र की अहमियत – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

रूपा ओ रूपा कहां हो पति राकेश की आवाज सुनकर रूपा दौड़ी आई हाँ बोलिए क्या हुआ..? अरे होना क्या तुम ध्यान नहीं रख सकती हो देखों मेरी इन दोनों कमीजों के बटन ही गायब हैं तुम यार करती ही क्या रहती हो दिनभर..?  सारे दिन तुम्हारा काम ही क्या है घर में ?  वो … Read more

 तकदीर फूटना – सुदर्शन सचदेवा : Moral Stories in Hindi

रोहित एक होशियार इंजीनियर लड़का था | मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी खासी नौकरी छोड़कर उसने खुद का स्टार्टअप  शुरु किया  | एक ऐप जो गांवो में किसानों को सीधे ग्राहकों से जोड़ता था | दोस्तों ने कहा – पागल हो गया है क्या ? लेकिन रोहित  को अपने ऊपर भरोसा था | शुरुआत के दिनों … Read more

 तकदीर फूटना – लक्ष्मी कानोडिया : Moral Stories in Hindi

नेहा एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थी। नेहा और अमित ने प्रेम विवाह किया था। नेहा और अमित की शादी की कुछ दिन बाद ही नेहा के ससुर की मृत्यु हो गई थी। अमित अपनी मां सुशीला को अपने साथ ही मुंबई ले आया था मगर बनारस की रहने वाली सुशीला देवी को मुंबई … Read more

 सूझबूझ – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू : Moral Stories in Hindi

रमा जैसे ही नाश्ता लेकर कमरे में दाखिल हुई लिये लिये ही बड़बड़ाई ……. चादर तो समेट लेते सुबह से ज्यों का त्यों कमरा पड़ा है अरे जहां पड़े हो कम से कम उसे तो समेट लिया करो  । नहीं…… उसी में सोये रहेंगे कहते हुए जैसे ही नाश्ता बेड पर रखने लगी रवि खुद … Read more

 माथे को चूम लिया – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू : Moral Stories in Hindi

बिट्टू की थाली में फेका हुआ खाना देखकर दादी खूब बड़बडाईं। ” कितनी बार मना किया खाना कम परसो दोबारा दे देना पर सुने तब तो , मानों किसी बात का कोई असर ही नही पड़ता,बड़बड़ाते रहो करेगी अपने ही मन का जो उसे अच्छा लगेगा” और अपने बिस्तर पर जा कर बैठ गईं ,अब … Read more

 प्रायश्चित – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

 आज सिया मेरे पीछे पड़ गई कहने लगी ! दादी हम होटल जा रहे हैं ! मम्मी पापा भी जा रहे हैं! आप भी चलो!  मैं तुरंत सिया से बोल उठी! नहीं बिटिया अब इस उम्र में होटल कहां जाऊंगी ?तुम लोग बाहर खा कर आओ ! मैं अपने लिए घर पर ही कुछ बना … Read more

 मुंह मोड़ना – पूनम सारस्वत : Moral Stories in Hindi

दिल तोड़ने वाले तुझे दिल ढ़ूंंढ रहा है…. पार्श्व में गाने के बोल मंजरी के कानों में पिघले शीशे से लग रहे थे और वह न चाहते हुए भी आंसुओं के समुद्र में भीगी जा रही थी। रह रह कर वह खूबसूरत पल उसे याद आ रहे जो उसने अमित के साथ गुजारे थे, हाथों … Read more

 सुहाना सफ़र  – पूनम सारस्वत : Moral Stories in Hindi

हर सोमवार की तरह आज भी मैं निकला था सफर पर उसी जानी पहचानी रास्ते पर जिस पर चलते हुए अब लगभग साल भर हो चुका है। बस अभी दस मिनट में चलेगी, क्योंकि सवारी आए या नहीं आए इसे नियत समय पर निकलना होता है। सही है समय का बंधन भी कितना जरूरी है, … Read more

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