फर्ज की आहुति
देवानंद को लगा कि इतने सालों बाद शायद भाभी का दिल पिघल गया हो, और वैसे भी अनन्य उनकी अपनी ही भतीजी थी। अपनी लाडली के सुनहरे भविष्य की खातिर देवानंद अपना आत्मसम्मान एक तरफ रखकर फिर से कामिनी के आलीशान बंगले पर पहुँचे। उन्होंने विनती करते हुए कहा, “भाभी, अनन्य का दाखिला यहाँ के … Read more