फ़र्ज़ की डोरी – कृति रश्मि 

“बहू, ये लाल रंग का भारी काम वाला लहंगा कितने का होगा?” विमला बुआ ने अपनी बड़ी भतीज-बहू, मानसी के कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा। उनकी नज़रें स्टेज पर बैठी अपनी सगी भतीजी और आज की दुल्हन, शिखा पर टिकी थीं। मानसी ने एक हल्की, लेकिन थकी हुई मुस्कान के साथ जवाब दिया, “बुआ … Read more

पत्थर के रिश्ते – आर्या विनोद

नंदिनी सुबह के चार बजे से ही उठकर घर के कामों में जुट जाती थी। रसोई से बर्तन खटकने की हल्की सी आवाज भी आती, तो उसे डर लगता कि कहीं उसकी सौतेली भाभी सुलेखा की नींद न टूट जाए। अगर सुलेखा की नींद टूट गई, तो नंदिनी का पूरा दिन तानों और गालियों के … Read more

आज़ादी – विविकता

“अरे बहन जी! आजकल की बहुओं की तो किस्मत खुल गई। हमारे ज़माने में तो बस चाकरी और ससुराल वालों के ताने थे; सुबह से रात हो जाती थी और हमारा काम खत्म नहीं होता था—अपनी मर्ज़ी से तो कुछ कर ही नहीं सकते थे।” पूनम ने पड़ोसन कमला से कहा। “सौ आने सच कह … Read more

मेरा सहारा मेरी बेटी – मंजू ओमर

आज सरस्वती जी के आंख से आंसू बह रहे थे लेकिन होठों पर मुस्कान थी। तभी पडोस मे रहने वाली कावेरी ने आकर कहा अरे माता जी आज तो खुशी का मौका है तब भी आप रो रही है परिवार की परवाह किये बिना आपने इस उम्र मे ज़ो काम किया है उसका तो जवाब … Read more

तोरा मन दर्पण कहलाए ।। – अंजना ठाकुर

तोरा मन दर्पण कहलाए पुस्तक का आज विमोचन था इस अवसर पर काव्या को सभी की बधाई मिल रही थी पुस्तक मैं काव्या ने अपने जीवन की घटनाओं को खूबसूरती से वर्णन किया था किस तरह अवसाद से लेकर आत्मविश्वास का सफर तय किया । काव्या ने पहली प्रति अपने पापा को भेंट करी और … Read more

*असली खूबसूरती शरीर नहीं मन होता है* – तोषिका

मन के हारे हार, मन के जीते जीत होती है बेटा और तुम्हे पता है *असली खूबसूरती शरीर नहीं मन होता है* तुम कोशिश तो करो बेटा सब हो जाएगा। हौसला देते हुए रोशनी के पिता हरि ने बोला। रोशनी उदास होते हुए बोली “इसको कोई नहीं देखता है, क्या करूं मैं अपने इस अच्छे … Read more

असली खूबसूरती शरीर नहीं मन होता है – बिमला रावत जड़धारी

अरविंद, बेटा अरविंद।आया अंकल जी।क्या कर रहे हो?खाना बना रहा हूॅं, अंकल जी। आज मैं जल्दी आ गया तो सोचा खाना ही बना लेता हूॅं। सब्जी तो बन गयी, रोटी बनाना बाकी है।बहुत बढ़िया! चलो साथ बैठकर चाय पीते हैं। अभी खाना खाने में बहुत टाइम है।ठीक है, मैं अभी चाय बना देता हूॅं। आप … Read more

आंसुओं की कीमत – मधु वशिष्ठ

मम्मी आप नया नौकर क्यों नहीं रखती हो? ” प्रिया बोली”।  बेटा ,मैंने साथ वाली आंटी को बोला तो है, थोड़ा ठीक हो जाऊं ,तो बाहर बैठकर कोई काम वाली ही ढूंढ लूंगी। सिर दर्द से फटा जा रहा है ,जरा थोड़ी अदरक वाली चाय तो बना देना । सवेरे से काम कर कर के … Read more

सबक – करुणा मलिक

अरे! लडके की माँ क्यूँ नहीं आई, आना चाहिए था।  उनका तो कल शाम तक पक्का प्रोग्राम था पर आधी रात में सर्दी के साथ ऐसा बुखार चढ़ा कि आँख खोलने की भी हिम्मत नहीं थी सुबह…. वो तो उनकी बहन वही ं है, उसके भरोसे छोड़ कर आए नहीं तो, आज का आना तो … Read more

प्यार – खुशी

मैं बालकनी में खड़ी इधर उधर देख रही थी।तभी एक ट्रक और एक गाड़ी आ कर रुके ।मुझे लगा चलो पड़ोस में कोई आया है कुछ दिन से सामने वाले फ्लैट में काम चल रहा था।गाड़ी में से एक डैशिंग सा आदमी उतरा और दूसरी तरफ से एक लड़की जो बिल्कुल सांवली थी चाहे तो … Read more

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