फ़र्ज़ की डोरी – कृति रश्मि
“बहू, ये लाल रंग का भारी काम वाला लहंगा कितने का होगा?” विमला बुआ ने अपनी बड़ी भतीज-बहू, मानसी के कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा। उनकी नज़रें स्टेज पर बैठी अपनी सगी भतीजी और आज की दुल्हन, शिखा पर टिकी थीं। मानसी ने एक हल्की, लेकिन थकी हुई मुस्कान के साथ जवाब दिया, “बुआ … Read more