खूबसूरत मन – लतिका श्रीवास्तव 

चंदा तुम अकेली यहां क्यों बैठी हो बाकी सब घूमने गई हैं तुम क्यों नहीं गईं विशाखा ने कमरे में अकेली बैठी लड़की को देख कर आश्चर्य से पूछा तो चंदा ने सिर  नीचे रखी पुस्तक में और झुका लिया। क्या हुआ चंदा मुझसे बताओ विशाखा ने उसके पास बैठते हुए स्नेह से कहा तो … Read more

*सहारा* – तोषिका

क्या बात है, बड़े खुश लग रहे हो श्यामलाल। क्या बात है ज़रा हमे भी तो बताओ, हस्ते हुए सूरज बोला। श्यामलाल मुस्कुराते हुए बोला “अरे ऐसी कोई बात नहीं है दोस्त बस आज मेरे बेटे नीरज का रिश्ता पक्का हो गया है कुछ महीनों में शादी है।” सूरज बोला “बधाई हो श्यामलाल! बधाई हो, … Read more

सहारा – बिमला रावत जड़धारी

राकेश अपने जीजा जी, गिरिश, को फोन करता है। फोन गिरिश की पत्नी सविता उठती है। हैलो, मैं राकेश बोल रहा हूॅं।भइया हम सविता बोल रहे हैं। सब ठीक तो है? आज कैसे फोन कर दिया? अरे आपकी दीदी नहीं रही तो आप ने यहॉं आना ही छोड़ दिया। हम भी तो आपकी बहन है। … Read more

सहारा – सुनीता माथुर 

    घर में बहुत चहल-पहल थी इतने मेहमान आए हुए थे अनुराग और उसकी पत्नी अनुपमा दोनों ही व्यस्त थे और मेहमानों की व्यवस्था में, घर की सजावट में लगे हुए थे क्यों ना लगें उनकी इकलौती बेटी अनुश्री की सगाई और शादी जो थी! उज्जैन शहर के बहुत बड़े हीरे के व्यापारी सियाराम जी का … Read more

तू मेरा सहारा है – जगनीत टंडन

“स्नेहा, जल्दी चल, अभी तक तैयार नहीं हुई क्या..” नीना स्नेहा के घर पहुंचते ही चिल्लाई। माला भी वहां आ गई थी। “नीना, जल्दी आने की कोशिश करना बेटा, जब तक तुम सब घर नहीं आ जाओगी तब तक दिल डरता ही रहेगा। आज इसका मोबाईल भी सीमा लेकर गई हुई है” “अरे आंटी, घबराइए … Read more

असली खूबसूरती शरीर नहीं मन होता है – प्रिया सैनी

शहर के एक कॉलेज में आरव नाम का लड़का पढ़ता था। वह बहुत समझदार और शांत स्वभाव का था। उसे बाहरी दिखावे से ज्यादा लोगों के व्यवहार और दिल की अच्छाई मायने रखती थी। उसी कॉलेज में सिया भी पढ़ती थी। सिया बहुत साधारण दिखने वाली लड़की थी—ना कोई खास मेकअप, ना स्टाइलिश कपड़े। अक्सर … Read more

सहारा – खुशी

रामनाथ अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे।घर में पत्नी नीता 3 बच्चे नवीन ,विवेक और आरती।बड़ी बहन कमला जो विधवा हो गई थी इसी कारण वो भी मायके वापस आ गई ।उसकी भी दो बेटियां थीं और मां शीला ये परिवार था।रामनाथ एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। सब बच्चे पढ़ने वाले थे।नीता … Read more

अपने कब पराए बन जाते है वक्त ने बताएं – मंजू ओमर

मांजी ओ मांजी विमला ने रजनी जी को झकझोरा तो रजनी जैसे नींद से जाग उठी हो, क्या हुआ मांजी आप ऐसे कैसे गुमसम सी उदास बैठी हो। इतना सुनते ही रजनी के गालों पर दो आसूं की बूंदें लुढक गई। फिर विमला ने उनको जमीन से उठाया और सोफे पर बिठाया। विमला जल्दी से … Read more

अनजाना बना जीने का सहारा – अंजना ठाकुर

अम्मा सब्जी ले लो आज तुम्हारी पसंद की भिंडी लाया हूं एक दम ताजी और नरम  ,और अम्मा तुम बनाती भी बहुत अच्छी हो ऐसी भिंडी मैने किसी के हाथ की नहीं खाई  ।वैसे तो तुम सब खाना अच्छा बनाती हो पर भिंडी की बात ही अलग है एक ही साँस मै कमल बोलता चला … Read more

असली खूबसूरती शरीर नहीं मन होता है। – मधु वशिष्ठ

मम्मी मैंने तो अब के बैकलेस गाउन ही लेना है, लहंगा-चोली तो मामा जी के घर वाली शादी में ही पहना था। जब से मौसी जी के बेटे निखिल की सगाई की तारीख निर्धारित हुई है,ऐसा लगता है घर में शौपिंग का मौसम आ गया हो। फोन पर भी अगर बात होती थी तो सिर्फ़ … Read more

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