जब जागो तभी सबेरा – कमलेश राणा
जब जीवन में नैराश्य का घोर अंधकार छाया हो, जीवन नैया झंझावातों के भंवर में हिचकोले खा रही हो, दूर दूर तक किनारा नज़र न आ रहा हो तब रोशनी की नन्हीं सी किरण भी उम्मीद जगा जाती है, जीने की, आगे बढ़ने की। नवीन के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था। वह … Read more