दहलीज पार करा दो” (भाग- 3) – रीमा ठाकुर
बडी मुश्किल से काम मिलता है बडबडाई बाई” तूने ही कुछ किया होगा! अन्नू,,,, देख बाई, तू मेरा भरोसा तो करेगी नही “” सुम्मी,,, तू यही रूक मै जाकर पूछ कर आती हूँ! अचानक मोबाइल बज उठा, जिसकी धुन अंचल के लोकगीत की थी! हेल्लो,,, कोन, आभा ” सामने से आवाज आयी. सुम्मी बहन तू … Read more