मेरे अपने – मंजू मिश्रा 

  किटी पार्टी अपने चरम पर थी। सभी पूरा मजा ले रहे थे। की श्रीमती मेहता का आगमन और सब उनसे मुखातिब हुए – “अरे वाह गजब तैयारी तभी इतनी देर लगी आप तो बिजलियाँ गिरा रही हैं।”      “अरे कहाँ जी जब से सास ससुर यहां रहने आये हैं,नाक में दम कर रखा है।कहीं जाना हो … Read more

बड़ी नही होना चाहती – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

“आज देव की छुट्टी थी इसलिए आराम से बैठ कर अखबार पढ़ रहा था। पत्नी रानी चाय बना कर लाती है उसी समय बाॅस का फोन आ जाता है।” “लम्बी वार्ता होती है इसलिए देव चाय पीना भूल जाता है। तभी रानी आती है…कहती है – अरे आपकी चाय तो बिलकुल ठण्डी हो गईं।” “कोई … Read more

अपमान –  बेला पुनीवाला

स्वाति सुशांत नाम के लड़के से बहुत प्यार करती थी मगर स्वाति के पेरेंट्स ने स्वाति को सुशांत से शादी करने के लिए मना कर दिया था क्योंकि सुशांत एक मिडिल क्लास फॅमिली से था और मामूली सी जॉब करता था और स्वाति के पेरेंट्स बहुत ही अमीर थे, स्वाति के पेरेंट्स स्वाति की शादी … Read more

मातृत्व का अपमान – अर्चना कोहली “अर्चि”

“बेटा! यह अंकित अंकल की बड़ी बेटी पायल की तसवीर है। बहुत ही संस्कारी और सुशील है। हिंदू कॉलेज में प्रोफ़ेसर है। हमें तो पसंद है। अगर तुम्हें पसंद हो तो बात चलायें”। रमा ने पीयूष से कहा। “कितनी बार कहा है, मेरे कमरे में न आया कीजिए। तसवीर को बिना देखे ही पीयूष गुस्से … Read more

*राॅकी* –  मुकुन्द लाल

शरद ने जैसे ही अपने पड़ोसी अनिल के मकान के गेट को खटखटाया, अनिल गेट खोलकर तुरंत बाहर आ गया। वह आश्चर्यचकित होकर अनिल और उसके साथ आये कुत्ते को देखता रह गया। कुत्ते के गले से बंधी जंँजीर को शरद अपने हाथ में पकड़े हुए था। कुछ क्षण के बाद उसने बेरूखी से कहा, … Read more

संवेदनशीलता – मनोज श्रीवास्तव

मई माह का अंतिम सप्ताह, प्रचंड गर्मी शाम होते और विकराल।पेड़ों का एक पत्ता भी नहीं हिल रहा।बच्चों की छुट्टी के साथ जेठ की लगन का जोर।सारे यातायात के साधनों पर भीड़ का दबाव। आजमगढ़ से दिल्ली को लगभग सोलह सौ किमी अप डाउन करने वाली परिवहन निगम की एक्सप्रेस सेवा की यह बस जैसे … Read more

 धड़कन – विनय कुमार मिश्रा

आज हाथों में शिमला की दो टिकटें लिए अपनी जिंदगी के गुजरे तमाशे याद आ रहें हैं.. “इससे पहले तो घर में नई शादी ही नहीं हुई, शिमला घूमने जाएंगे ये निर्लज्ज” मन मसोसकर गाँव में ही रहना पड़ा था। क्यूंकि तब पैसों की तंगी भी थी। लव मैरिज तो नहीं हुई थी, मगर इनसे … Read more

भेदभाव – कुमुद मोहन

“तू फिर आ गई! कितनी बार मना किया कमला का पीछा छोड़कर अपनी मां के साथ कूड़ा उठाया कर पर मजाल है जो इस कमबख्त के कान पर जूं रेंगती हो!” दादी का सुबह सुबह का रोज का डायलॉग सुनकर छः साल की नन्ही रिंकी मुँह लटकाऐ दरवाज़े के बाहर निकल जाती! गुनिया सफाई वाली … Read more

दिखावे के रिश्ते –   पूजा अरोरा

शाम को दफ़्तर से थकी हुई जब 7 बजे घर पहुंचीं ही थी वंशिका  तो घर की हालत देख कर दिमाग फ़ट गया| गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया| “ये क्या माँ, मीरा आज नहीं आयी? बिना बताये छुट्टी ले ली|” “नहीं आयी बहू, पता नहीं क्या हुआ आज! कोई खबर भी नहीं की” मंजु … Read more

 कतरन – विनय कुमार मिश्रा

टोकरी में कुछ भुट्टे लिए, वो तीन गरीब और फटेहाल बच्चे आज फिर रोज की तरह,दोनो तरफ की रोड के बीच में लगे घास पर बैठ गए। उनमें से बड़ी लड़की जो तकरीबन दस साल की होगी। उसने अंगीठी जला लिया। भुट्टे सिकने लगे थे। मैं अपने सब्जी का ठेला लगाए उनके सामने ही था। … Read more

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