अपमान का बदला कुछ यूँ लिया” – भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

“मत डरो तम घिरी राहों के अंधेरों से, जब अंधेरा होता है तभी हम सितारों को देख पाते है”  कब कौनसी रात का अंधेरा, एक रोशन सितारा लेकर आएगा कोई नहीं जानता। उम्र के कौनसे पड़ाव में, कौनसी घटना हमारी ज़िंदगी का रुख़ मोड़ देगी कुछ नहीं कह सकते। संभावनाओं से भरी ज़िंदगी जब करवट … Read more

डर हुआ दूर* – नीरजा नामदेव

———-        अनिका अपने पति और बच्चों के साथ खुशहाल जिंदगी बिता रही थी ।कुछ दिनों से उससे पेट में दर्द होने लगा ।शुरू में तो उसने उसे सामान्य रूप से लिया ।लेकिन जब दर्द बढ़ने लगा तो अपने पति सुशांत के साथ वह वहीं के डॉक्टर के पास गई। उन्होंने अनिका को कुछ टेस्ट करवाने … Read more

खबर – टीना सुमन

सुबह रोजमर्रा के काम से फुरसत पाकर पहला दीदार अखबार का किया ,जैसे ही पहले पेज पर नजर पड़ी ,आंखों में खुशी का धुंधलापन छा गया ।मन तकरीबन 10 साल पहले चला गया। “बीबीजी आपको पता है नीचे वाले फ्लैट के गुप्ता जी के यहां क्या कांड हो रहा है ,और दो फ्लैट छोड़कर  रहने … Read more

जुड़वा कली – डा. मधु आंधीवाल

रमन और सोनी की मित्रता पूरे कालिज में चर्चित थी । एक पवित्र प्रेम का अद्भुत संगम । कुछ लोगो को तो विश्वास ही नहीं होता था कि इस पाश्चात्य रंग में रंगी दुनिया में इतना निर्मल गंगाजल की तरह प्यार भी हो सकता है। दोनों ने प्रण किया कि जब तक पूरी तरह अपने … Read more

*किटी पार्टी* – *नम्रता सरन “सोना”*

“आईऐ… आईऐ… मिसेस अरोरा… वेलकम इन माय होम…वॉओ..न्यू सारी….फैंटास्टिक…. योर चॉइस इज़ ऑसम….” रजनी ने कुछ ज़्यादा ही चाशनी घोलते हुए कहा। “थैंक्स… रजनी…. कल ही सूरत से पार्सल आया है… सोचा आज इसका श्रीगणेश कर दूं…”मिसेस अरोरा इठलाती हुई बोलीं। “आओ …शाईनी… वेलकम…यू आर लुकिंग सो ब्युटीफुल…” रजनी ने एक और आगंतुक महिला का … Read more

यही तो ज़िंदगी है – के कामेश्वरी

पूरी दुनिया कोरोना नामक बीमारी के दहशत से पीड़ित है । लोग घरों से बाहर निकलने के लिए डर रहे थे । एक दूसरे से मिलना क्या अपने घर के दरवाज़े भी नहीं खोल रहे थे । पूरे भारत में लॉकडाउन हो गया । सभी लोग घरों में बंदी हो गए पर कुछ लोग ऐसे … Read more

मां का श्राद्ध   – डॉ  अंजना गर्ग

“सर मुझे कल की छुट्टी चाहिए।” सुनील ने अपने बॉस अभिषेक से कहा। “सुनील तुम्हें पता है दो दिन बाद रिपोर्ट सबमिट करनी है। छुट्टी का तो सोचो ही मत।” बॉस ने सुनील से कहा। ” सर मजबूरी ना होती तो मैं कभी नहीं कहता।” सुनील ने कहा। ” ऐसी क्या मजबूरी है सुनील? बॉस … Read more

एक मुट्ठी आसमान – कमलेश राणा

यश को जब मैंने पहली बार देखा था तब वो गोरा चिट्टा प्यारा सा शर्मीला सा 10-12 साल का बच्चा था,, जो मेरे सामने आने में भी शरमा रहा था और अपनी माँ के पीछे दुबका ही जा रहा था,, उसकी वो भाव भंगिमा आज भी मुझे वैसी ही याद है जैसे कल की ही … Read more

आंखों देखा दृश्य – कंचन श्रीवास्तव

दिव्या को देखकर रमा को लगा , मेरी सोच गलत है । वरना आज जो कुछ वो देख रही उसे स्वीकारने की जगह नकार देती अब नकार नहीं सकती क्योंकि आंखों देखा हाल है। इसी दृश्य को तो देखकर उसे वर्षों पुरानी स्वयं बीती घटना याद आ गई। हुआ ये था कि आर्थिक तंगी के … Read more

सफल औरत के पीछे कौन?’ –  सुषमा तिवारी

रोशनी अब सच में अफसोस कर रही थी, ये कैसी गलती हो गई उससे! गिरीश  ने कहा था कि ज्यादा आज्ञाकारी मत बनो, पर उसे ही भूत सवार था कि घरवालो को कम से कम बता देना सही है। गिरीश  ने कहा भी था कि “रोशनी! तुम्हारी बात समझेगा कोई नहीं, फालतू का माहौल खराब … Read more

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