तुम मेरे लिए सब कुछ हो – के कामेश्वरी

कमल रेलवे में नौकरी करते थे । उनके दो बड़े भाई और चार छोटी बहनें थीं । बहनें सुंदर नहीं थी और उनके गुणों में भी कमी थी । सब की सब माँ पर गई थी । तेज़तर्रार लड़ाकू टाइप की । बड़े भाई दोनों शादियाँ करके अपनी ज़िंदगी आराम से गुज़ार रहे थे । … Read more

गुल्लक टूट गयी… – दीप्ति सिंह

———————  पति की तेरहवीं के पश्चात ललिता ने तीनों बेटों के समक्ष एक प्रश्न रखा कि “अब वह अकेली कैसे रहेगी ” ? बड़े बेटे ने तुरन्त कहा ” माँ !  तुमने ही कहा था यह घर मेरा है अतः मैने भी कह दिया हमें हिस्सा नही चाहिए और ना हम यहाँ रहने आएगें। इसलिए … Read more

अहंकार – डाॅ संजु झा 

अहंकार  मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।अहंकारी  मनुष्य को अच्छे-बुरे ,अपने-पराए का विवेक नहीं रहता है।अहंकार  मनुष्य की बुरी वृत्ति है।जगविख्यात  है कि अहंकार के कारण  ही प्रकांड पंडित, महान ज्ञानी,बलशाली  रावण का समूल नष्ट हुआ था। अहंकार  से सम्बन्धित वर्षों पढ़ी हुई कहानी मुझे याद आ रही है,जिसे लिखने का प्रयास कर  रही हूँ।प्राचीन … Read more

 झूठा अहंकार ” – सीमा वर्मा

‘ ओह … माँ, आप भी ना !   न जाने किस जमाने की बातें कर रही हैं  ?  कहाँ मैं इतनी पढ़ी-लिखी ,होशियार, सीनियर बैंक प्रबंधक और कहाँ वह साधारण बी .ए पास प्राइवेट स्कूल का टीचर ‘सुशांत’ कहीं से भी कोई बराबरी दिखती है हम दोनों में ?  वो तो आपके कहने में आकर … Read more

करुण अन्त – डा. मधु आंधीवाल

नन्हीं सी परी उतरी है , आज मां के द्वार, सब कर रहे थे , उसका इन्तजार पापा की नन्ही गुड़िया , मां की थी परछाई, भाई का दुलार थी , दादी का अभिमान, परी होती गयी बड़ी, सुकोमल काया  रूप का खजाना , मां पापा का सपना  अपनी गुड़िया को बनाना था दुल्हन, देखा … Read more

वो गर्वीले पल‌‌‌! – -प्रियंका सक्सेना

‘अहा,कितने खूबसूरत पल‌ थे वो मेरी ज़िन्दगी के! आइए आपको भी ले चलती हूॅ॑ मेरे साथ, उन‌ पलों को जी लेती हूॅ॑ एक बार फिर….   मैं कलकत्ता के इंस्टिट्यूट ऑफ़ हाइजीन एंड पब्लिक हेल्थ से डिप्लोमा इन डायटीशियन कर रही थी।मैं बात कर रही हूँ सन् १९९२ की, कोलकाता उस समय कलकत्ता के नाम … Read more

 अहंकार हुआ चूर-चूर – अनु अग्रवाल

लक्ष्मी निवास में आज सुबह से ही चहल-पहल थी….हो भी क्यों न…. आखिर…घर के इकलौते वारिस चिराग की शादी की तैयारियां जो चल रहीं थीं……….घर मेहमानों से भर चुका था….आज हल्दी का कार्यक्रम था। तभी कामिनी जी(चिराग की  माँ) ने सबकी नज़रों से बचकर अपनी भाभी नम्रता को कमरे में चलने का इशारा किया…. “भाभी……..ये … Read more

 अहंकार टूट गया – गीता वाधवानी

कानपुर में ममता जी का संयुक्त हंसता खेलता परिवार। दो बेटे अमित और सुमित। बड़े बेटे अमित की पत्नी सीमा और दो बेटे खुश और राहुल। छोटे बेटे सुमित की पत्नी रेखा और उनकी दो बेटियां साधना आराधना। ममता जी के पति सुधांशु जी का कुछ समय पहले ही देहांत हो गया था। पूजा पाठ … Read more

परिंदे-कहानी-देवेंद्र कुमार

===== राजकुमार अभय का जन्मदिन निकट आ गया है। एक महीना पहले से ही जन्मदिन समारोह की तैयारियाँ होने लगी थीं। पूरा नगर किसी नई नवेली दुल्हन की तरह सजा दिया गया था। हर दिन नृत्य-संगीत की महफिल जमती थी। न जाने कहाँ-कहाँ से कलाकार बुलाए गए थे। जन्मदिन का भव्य समारोह राजधानी के बीचोंबीच … Read more

श्राद्ध की खीर – ऋतु गुप्ता

ह्रदेश जी की पत्नी का आज पहला श्राद्ध था, बहू और बेटे ने हर चीज उनकी पत्नी रमा की पसंद की बनाई थी । तर्पण भी बहुत मन से किया था, और जो ब्राह्मणी श्राद्ध का भोजन करने आईं थी उन्हें बड़े चाव से खाना खिला दान दक्षिणा देकर विदा किया।  खाने में भी खीर, … Read more

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