पड़ोसन – निभा राजीव “निर्वी” : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : रचना एक कामकाजी महिला थी। वह घरेलू औरतों को बिल्कुल पसंद नहीं करती थी क्योंकि उसके दृष्टिकोण से एक गृहिणी वही महिला बनती थी, जिसके अंदर बाकी कोई काबिलियत ना हो ।वह स्वयं एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत थी और उसके पति भी एक ऊंचे ओहदे पर पदस्थापित थे।        रचना … Read more

बहू की नौकरी से हमें क्या फायदा?——- – राशि रस्तोगी

“मौज मस्ती करने का बहाना चाहिए बहू को.. सुबह निकल जाती है तैयार होकर, देर रात को वापस आएगी.. कोई मदद तो भूल ही जाओ, उसके लिए जितना कर सकते हो कर दो!” गुस्से में रमा जी बड़बड़ा रही थी| चारु जो आज ऑफिस से जल्दी वापस आ गयी थी, बाहर खिड़की से आती हुई … Read more

“अहंकार” – ऋतु अग्रवाल

   रूपल दिखने में बहुत प्यारी बच्ची थी। अपनी माँ के अनुशासित लालन-पालन में उसके तौर तरीके भी संयमित हो रहे थे। पढ़ने लिखने व अन्य गतिविधियों में भी अच्छी थी। इन्हीं सब गुणों के चलते स्कूल,रिश्तेदारी और पड़ोस में रूपल की बहुत तारीफ होती थी। सब लोग रूपल की प्रशंसा करते थकते ना थे।              रूपल … Read more

हिंदी मेरी पहचान – नीतिका गुप्ता 

मिस सिया,, टू हूम विल यू गिव द क्रेडिट ऑफ योर सक्सेस..?? जस्ट ए मोमेंट आई विल आंसर यू ऑन सियाज बिहाफ … रोहन माइक हाथ में लेकर पत्रकारों से रूबरू हुआ और आगे कहा सिया इज गिविंग द होल क्रेडिट ऑफ हर सक्सेस टू मी… चारों तरफ से तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी … Read more

किसी गरीब के साथ ऐसा करना सही है – गुरविंदर टूटेजा 

 नीतिका डस्टिंग कर रही थी कि ऊषा आ गई…!! अरे ! अभी तो मेरी सफाई भी नहीं हुई और तुम आ भी गई…!! आज एक मैडम नहीं है बाहर गयी हैं तो मेरा काम जल्दी हो गया…मैं करा देती हूँ साथ में..बातें भी करने लगी…!! मैंने कहा पहले तुम एक हाॅस्टल में काम करती थी … Read more

अनूठी प्रेम कहानी – कमलेश राणा

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में क्वाँर के महीने में दशहरे से शरद पूर्णिमा तक टेसू और झेंझी के विवाह का उत्सव बच्चों द्वारा मनाया जाता है,,  मिट्टी का टेसू बनाकर बांस के हाथ पैर लगायेजाते हैं, कौड़ी की आँखें और मुँह बनाया जाता है,,और उसे कुर्ता पायजामा पहनाते है,, यह काम लड़के करते हैं,,  … Read more

 अहंकार कभी न करना   –  विभा गुप्ता 

   ” सुनो, अगर आप इजाज़त दो तो मैं अपनी पढ़ाई पूरी कर लूँ।” विनिता ने अपने पति विनय से पूछा जो ऑफ़िस की कुछ फ़ाइलों को देखने में व्यस्त था।पत्नी की बात सुनकर उसने तुरन्त हाँ कह दिया क्योंकि वह भी चाहता था कि विनिता अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ले।               विनिता अपने चार भाईयों के … Read more

अहंकार के छटते बादल – तृप्ति शर्मा

कितनी जमती थी न दोनों में ,कितनी बातें कितनी छेड़खानी और पता नहीं कितने ही खेल खिलौने आपस में बांट लिया करते थे वो हमेशा । इन सबके बीच पता नहीं चला कब दोनों बचपन लांघ बड़े हो गए, पर अब सबकुछ बदल गया था । सुहानी और अनंत के बीच अब पहले जैसा कुछ … Read more

मेरी मां की भाषा हिंदी,,,,,, – मंजू तिवारी,

मेरी मां की भाषा हिंदी जिससे मेरा दिल का नाता है। किसको बोलने में मुझे बड़ी सहजता का अनुभव होता है। भाषा कोई भी बुरी नहीं होती है। लेकिन जो भाषा हमारी मां की होती है उस भाषा को बोलने में बड़ा ही आनंद आता है मौलिकता होती है कोई बनावटीपन का स्थान होता ही … Read more

 ” दिल के अरमां आंसुओं में बह गए ” – अनिता गुप्ता 

मी लॉर्ड! मैं मानता हूं कि मेरे बेटे ने शराब के नशे में बहक कर गलती की है और मैं इस गलती को सुधारने के लिए भी तैयार हूं।” शहर के पहुंचे हुए नेताजी ने कटघरे में खड़े हुए कहा। ” आप इसे गलती कहते हैं ? अपराध किया है आपके अहंकारी बेटे ने अपराध।” … Read more

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