प्रणय अपहरण  – रवीन्द्र कान्त त्यागी

आजकल न जाने क्यूँ बचपन की यादों के गुब्बारे रह रहकर दिमाग में फट रहे हैं। कहते तो ये हैं कि  इंसान के आखिरी समय में ऐसा होता है मगर, तुरंत तो ऐसा एहसास नहीं हो रहा है। बात पचास साल से भी अधिक पुरानी है। बचपन में हम जोधपुर में रहते थे। हमारा मकान … Read more

 बदलता वक़्त – ममता गुप्ता

हे भगवान फिर से बेटी ही पैदा हुई हैं …?  कर्म फुट गए मेरी देवरानी नीता के तो पहले से ही एक बेटी हैं , अब एक औऱ हो गई …!!  न जाने कैसे दो दो लड़कियों का बोझ उठा पाएगी बेचारी…!! गर भगवान की कृपा से एक बेटा हो जाता तो इसका जीवन सुख … Read more

गोरे रंग पे ना इतना गुमान कर – रत्ना साहू

सौम्या! हां सौम्या नाम था उसका| लंबी छरहरी एकदम गोरी-चिट्टी कमर तक सिल्की बाल तीखे नैन नक्श जो कोई एक बार उसे देखता, देखता ही रह जाता। लेकिन उसका बस नाम ही सौम्या था बाकि बोली और स्वभाव में जरा भी सौम्यता नहीं थी। तीन भाई बहनों में सबसे छोटी थी पिता बड़े बिजनेसमैन थे … Read more

वक्त किसी के लिये रुकता नहीं.  –  संगीता त्रिपाठी 

दर्पण के सामने बैठी मीरा, बालों में झलकती सफेदी और चेहरे की गहरी लकीरें देख हतप्रभ थी। क्या ये वही मीरा है जिसके रूप सौंदर्य पर कॉलेज के सहपाठी दीवाने हुआ करते थे।इसी रूप ने तो कॉलेज का सबसे होनहार छात्र सुयश को अपने मोहपाश में बांध लिया था।अपने जिन लंबे केश और गहरी बड़ी … Read more

हिन्दी- दिवस – लेखिका-डाॅ संजु झा

सभी देशवासियों को हिन्दी -दिवस की शुभकामनाएँ!आज 14 सितम्बर  का दिन हमारे देश में हिन्दी-दिवस के रुप में मनाया जाता है।हिन्दी सिर्फ हमारी भाषा ही नहीं,बल्कि हमारी पहचान भी है।आज 60 करोड़ से ज्यादा लोग हिन्दी का इस्तेमाल करतें हैं।आजादी मिलने के  बाद 14 सितम्बर 1949 को संविधान-सभा ने एकमत से हिन्दी को राजभाषा का … Read more

 अहंकार – निधि जैन

क्या हो तुम संभव, तुमको कितनी बार समझाऊं कि बोलते समय गलत शब्दों का चयन मत किया करो, तुम शिखर से जिस अहंकार से बात कर रहे हो,तुमको पता भी है आज़ तुम्हारी वजह से उनको जेल जाना पड़ा, और उसके बाद भी तुम उनसे किस तरह से बात कर रहे हो, अपनी गलती को … Read more

*मैं गुम हो रहा था* – अर्चना नाकरा

मैं खाली ‘लिख लिख कर’ परिवार नहीं चला सकता था.. और बिना लिखे.. जी नहीं सकता था कशमकश के उन पलों में मेरी एक दोस्त ने मुझे टैक्सी चलाने की सलाह दी ! कुछ जमापूंजी मेरी, कुछ उसकी.. ‘बस गाड़ी और सवारी चल पड़ी थी’ पढ़ा लिखा लेखक ‘हिन्दी दिवस’ पर भीतर से दम तोड़ … Read more

वो ट्रेन वाला हादसा…. निधि जैन

उस दिन मुझे बहुत जल्दी में पहुंचना था, पर सड़क पर ट्रैफिक इतना था कि बस भी जल्दी ना पहुंचा पाई, मै जैसे ही स्टेशन पहुंचीं, ट्रेन का हॉर्न हो चुका था, ट्रेन चलने को तैयार थी, मै प्लेटफार्म की तरफ भागी, ट्रेन चल पड़ी, मै चढ़ नहीं पाई, अतत: मै प्लेटफार्म पर खड़ी रह … Read more

बेहद सुंदर धरा – विजया डालमिया 

झील के किनारे बैठी धरा अपने ही ख्यालों में गुम थी। अचानक किसी की आहट से उसकी तंद्रा भंग हो गई। झील में उसे किसी की झलक दिखाई दी। एक साया धीरे-धीरे उसी की तरफ बढ़ रहा था। पर यह क्या….. वह उसे नजर-अंदाज करके आगे की ओर बढ़ चला। धीरे-धीरे वह झील के एकदम … Read more

अहंकार बच्चो की खुशी से बड़ा तो नही है – संगीता अग्रवाल

” सार्थक ये तुम्हारे और सिमरन के बीच क्या चल रहा है ?” बेटे के घर आते ही सुहासिनी जी ने पूछा। ” वो माँ मैं….मै सिमरन से शादी करना चाहता हूँ! ” सार्थक ने अपनी माँ मधु जी से कहा. ” क्या….. पर बेटा वो तो हमारी जाति की नही है.. कहाँ हम ब्राह्मण … Read more

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