जड़ें – सारिका चौरसिया

सौंदर्य की प्रतिमूर्ति स्वंय को सर्वगुण सम्पन्न समझने वाली लेखा जी का मानना था कि दुनिया की किसी भी उपलब्धि और सफलता पर सिर्फ उनका ही अधिकार हो सकता है। इस बदगुमानी में की घर -बाहर आस-पड़ोस की सभी औरतें उनकी सुंदरता और गुणों से चिढ़ती हैं लेकिन पहनावे ओढावे में सभी उनकी ही नकल … Read more

होवे वही जो प्रभु रची राखा – संगीता अग्रवाल

” देखिये सुशीला जी आपकी बहु के गर्भ मे पल रहे बच्चे का लिंग मालूम नही हो पा रहा है !” डॉक्टर सुशीला जी जो की अपनी बहु के गर्भ मे पल रहे बच्चे का लिंग जानने आई थी से बोली। ” ऐसे कैसे डॉक्टर पहले भी तो एक बार तुमने लिंग पता लगाया है … Read more

दर्द का रिश्ता – ऋतु गुप्ता

बड़ी अम्मी नजमा तेज बुखार में तप रही थी और छत पर बैठी चुपचाप स्नेह भरी नजरों से नूर को निहार रही थी, जो पास के ही छज्जे पर चढ़ कर पतंग उड़ा रहा था।नजमा नूर से कहना चाहती थी कि बेटा संभाल कर कहीं पतंग के चक्कर में चोट मत मार लेना,पर नूर की … Read more

ईगो… – आशीष व्यास 

अभी एक साल भी नहीं हुआ था दोनों की शादी को कि दोनों में झगड़ा हो गया किसी बात पर … जरा सी अनबन हुईं और दोनो के बीच बातचीत बंद हो गई …वैसे दोनो बराबर पढ़ें – लिखे , दोनो अपनी नौकरी में व्यस्त तो दोनों का इगो भी बराबर … वहीं पहले मैं … Read more

काश कामिनी प्यार का मतलब समझ पाती – मीनाक्षी सिंह

छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए प्यार से भी जरूरी कईं काम हैं प्यार सबकुछ नहीं जिन्दगी के लिए एफएम पर स्लो वोईस में ये गाना सुनते हुए कामिनी अतीत में गुम हो गयी ! कितना प्यार करता था राघव उसे ! जान  छिड़कता था उस पर ! … Read more

अंजान बेटा – माता प्रसाद दुबे

सुबह के आठ बज रहे थे,प्रसिद्ध तीर्थ स्थान हरिद्वार के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचते ही यात्रियों की भीड़ स्टेशन से बाहर निकलने लगी। प्रकाश अपनी ऑटो रिक्शा स्टार्ट करके सवारी के आने का इंतजार कर रहा था। सामने एक बुजुर्ग महिला के साथ कुली उसका सामान लेकर आ रहा था। “आइए माता जी!कहा … Read more

दहेज लोभी – पिंकी सिंघल

अपने बेटे विराट के लिए सुंदर सुशील संस्कारी बहू ढूंढने के लिए चौधरी परिवार जी जान से जुटा हुआ था। पिछले 1 साल में लगभग एक दर्जन लड़कियां देखने और रिजेक्ट करने के बाद एकता ,जो कि पेशे से एक मेकअप आर्टिस्ट थी,से विराट का रिश्ता तय हो गया । विराट एमबीबीएस पूरी कर चुका … Read more

सहारा – पुष्पा पाण्डेय

सूरज बाबू सरकारी दफ्तर में क्लर्क थे। माता-पिता और पत्नी सुलेखा के साथ रहते थे। शादी के दस साल हो गये, पर आँगन किलकारियों से वंचित रहा। पोते- पोती को तरसते माता पिता क्रमशः अंतिम यात्रा पर चले गये। आस-पड़ोस और परिचितों ने बच्चा गोद लेने की बात कही। कई बार जाकर शिशु आश्रम से … Read more

कांधा – कंचन श्रीवास्तव

+++++++ उम्रदराज विदूर पति के लिए पत्नी के बिना जीना क्या वास्तव में आसान होता है भाई? ‘अभी कुछ ही घंटे खत्म हुई पत्नी की शव के पास बैठे राम ने पहले से विदुर अपने करीब बैठे सहकर्मी जो साथ के मुलाजिम है’ से पूछा , तो उन्होंने फफकते हुए मानों कुछ साल ही पहले … Read more

मिठास – रश्मि स्थापक

संजना खामोश बैठी है। बाहर वाले इस बड़े कमरे में बिछी तखत पर सासू माँ का एकाधिकार होता था।उनकी सारी गतिविधियों का केंद्र था यह।और आज पहली संक्रांति उनके बिना।कल ही शहर से आई यहाँ पहला त्योहार होने से आना तो था ही।वह यही सोच रही थी कि अम्माँ तिल के कितने लड्डू बनातीं थीं … Read more

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