डायरी – भगवती सक्सेना गौड़
“हेलो, रविश जी, आ जाइये, प्रभा जी स्वर्ग सिधार गयी” सबेरे ही मेन्टल हॉस्पिटल से फ़ोन था। घबराकर कार निकाली और चल पड़ा, 2 घंटे का रास्ता था, और वो राह उसे अतीत की तरफ ले गयी। बचपन से माँ को या तो किचन समेटते देखा, या, मशीन में कपड़े सिलते या अपने कमरे में … Read more