असमंजस – कमलेश राणा

वीणा शुरू से ही बहुत नाजुक सी थी उसकी माँ कभी भी भारी भरकम काम उससे नहीं करवाती थी।शादी होकर ससुराल आई तो वहाँ भी जो भी मिलने आता यही कहता… कितनी प्यारी बहू लाये है आप… पतली पतली नाज़ुक सी। समय के साथ वह तीन बच्चों की माँ बन गई फिर भी उसकी कमनीयता … Read more

बात है साधारण सी, पर है गहरी – रोनिता कुंडू

सुनिए जी..! हम रोज़ इस पार्क में टहलने आते हैं और हमारे जाने तक, वह लड़का भी वहीं बैठा रहता है… वह इतनी देर ना तो अपने फोन को देखता है और ना ही किसी से बातें करता है… आज की पीढ़ी, वह भी इतनी गंभीर..? कितना अजीब है ना..? विमला जी ने अपने पति … Read more

सहारा – कान्ता नागी

सुमित एक नौजवान था,कुछ दिन पहले तक घर में खुशियां ही खुशियां थीं।घर में प्यार करने वाले माता पिता और प्यारी सी बहना सुमी जिसकी शरारतों से घर मे चहल पहल थी हंसी खुशी से जीवन की गाड़ी चल ही रही थी। सुमित अंग्रेजी में पी एच डी कर रहा था माता पिता का एक … Read more

क्या सबसे बड़ा रुपैया – मधु शुक्ला

डाकिया ने जब वंदना को डाक के रूप में नियुक्ति पेपर सौंपे तो वंदना की आँखों में आँसू आ गए। कितना संघर्ष किया था उसने यहाँ तक पहुँचने के लिए। यह उसका दिल ही जानता था। पढ़ाई को लेकर ताई की छींटाकशी “जितना पैसा पढ़ाई पर खर्च होता है। उतने में तो शादी हो जाती … Read more

मैं नहीं चाहती कि मैं नेनी बन कर पूरी जिंदगी बिता लूं… – भाविनी केतन उपाध्याय 

”  भाभी, आज तो आप बहुत देर से उठी… चाय नाश्ता भी बच्चों ने आप के हाथों में लाकर दे दिया । मैं तो इंतजार कर रही थी कि आप आकर अपने बच्चों के साथ साथ मेरे बेटे का टिफिन भी बना लेंगे रोज की तरह…!! आप नहीं आई तो फिर मैंने उसे परांठा और … Read more

“तू मेरा सहारा और मैं तेरा” – ऋतु अग्रवाल

     “सुभीत! आप समझ नहीं रहे। नौकरी करने का उद्देश्य एकमात्र पैसे कमाना नहीं होता। हम काम इसलिए भी तो करते हैं ताकि आत्मनिर्भर बन सकें, कुछ नया सीख सकें, स्वयं को व्यस्त रख व्यर्थ की बातों और उधेड़बुन से दूर रह सकें।” मालिनी अपना पक्ष रख रही थी।        “मालिनी! मैं तुम्हारी बातों से सहमत हूँ … Read more

यादों के सहारे जीवन नहीं कटता –   शकुंतला अग्रवाल ‘शकुन’

उमा अपने कमरे की खिड़की  से क्षितिज को निहार रही है । भास्कर अस्ताचल की ओर डग भर रहे हैं साँझ की लालिमा अपने यौवन पर है रात की अगवानी के लिए। उमा को अपना जीवन भी इस डूबते सूरज-सा लगने लगा। जयंत के जाने के बाद से उसकी हालत भी तो कुछ ऐसी ही … Read more

तुम आ गए हो…… विनोद सिन्हा “सुदामा”

कहते हैं जिंदगी और कुछ नहीं बस यादों का कारवाँ है.खट्टी मीठी भूली बिसरी यादों का कारवाँ…फिर चाहें यादें क्यूँ न हमारे भूले बिसरे दोस्तों की हो.. रिश्तेदारों की हो..हमारी हो…आपकी हो या किसी और की..यादें हर घड़ी हमारे इर्दगिर्द हमारे जेहन में मंडराती रहती हैं.. आज भी अच्छी तरह से याद है मुझे…. मैं … Read more

“बाहरी” – नीरजा नामदेव

अलीना को पढ़ना बहुत पसंद था ।जब भी समय मिलता है पत्रिकाएं पढ़ती। अब तो इंटरनेट पर भी उसे पढ़ने को बहुत सारी सामग्री मिल जाती थी। एक भी दिन ऐसा नहीं जाता जब वह पढ़े बिना रह पाती। आज ही उसने एक पत्रिका में कहानी पढ़ी शीर्षक था ‘आउटसाइडर’ जिसमें बेटा विदेश पढ़ने जाता … Read more

कम्मो – अभिलाषा कक्कड़

माँ हम कहाँ जा रहे हैं ?? माँ को कपड़े बेग में डालते देख नन्ही तीन बरस की कम्मो पुछने लगी ।ममता ने प्यार से बेटी की तरफ़ देखते हुए कहा.. तुम्हारी नानी बहुत बीमार है हम उन्हीं को देखने जा रहे हैं । अभी कुछ ही देर में तुम्हारे पापा आ जायेंगे तो हम … Read more

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