रंग -अनुज सारस्वत

आज ब्रज में होली रे रसिया होली रे रसिया बरजोरी रे रसिया आज ब्रज में होली रे रसिया “ घर के स्पीकर पर यह गाना बज रहा था जो दादू ने लगाया था इतने में 20 वर्षीय अनिकेत अपने रूम से बाहर आया और झुंझलाते हुए दादू से बोला “दादू आप यह बंद करो मुझे … Read more

आईना –  हनी पमनानी

आजकल के रिश्ते डिजिटल हो गए हैं अच्छा किया तो लाइक बुरा किया तो ब्लॉक, बात करनी है तो कॉल रिसीव नहीं तो स्विच ऑफ। फेसबुक पर ओपन पब्लिक खोखले रिश्ते ।  पर इस  डिजिटल युग में एक मन का रिश्ता जो सब से छुपा कर आज तक रखा था बड़ी हिम्मत करके इस मंच … Read more

“एक रिश्ता भरोसे का” – सरोज माहेश्वरी

   भरोसा ! शब्द की पावनता, श्रेष्ठता को शब्दों में पिरो पाना अति कठिन है। यह भरोसा चाहें इंसान का खून के रिश्तों पर हो या इंसान का किसी अन्य इंसान पर हो….क्योंकि आज के युग में विश्वासघात और धोखे की जड़ें इतनी मजबूत हो गई है कि रिश्तों का कोई मोल नहीं रहा है परंतु … Read more

त्याग का रिश्ता… – विनोद सिन्हा “सुदामा”

डागडर साहिब कैसी है मेरी बहू…. विमला देवी ने भरे मन डाक्टर से बहू रश्मि का हाल पूछा… जी माँ जी अभी कुछ कहा नहीं जा सकता…हम कोशिश कर रहें..ईश्वर पर भरोसा रखिए… आखिर उसे हुआ क्या है..?? क्यूँ एकाएक दर्द उठा पेट में..क्यूँ बेहोश हुई… जी renal failure का केश है…. रेनल फेलर इ … Read more

खूबसूरत रिश्ता – संगीता अग्रवाल

वो बदहवास सी एक दिशा मे दौड़े जा रही थी ना उसे इस बात का पता था कि उसे जाना कहाँ है ना इस बात का भान था कि वो जा कहाँ रही है । डरी सहमी सी थी वो और जहाँ उसके कदम ले जा रहे थे वो भागी जा रही थी बस । … Read more

रिश्ता गुलाब सा – सीमा वर्मा

यह कहानी उस वक्त की है जब मैं जिला स्कूल की क्लास नाइन में पढ़ता था। हम सब मतलब मैं और मेरा भाई जो मुझसे तीन साल छोटा है तब वो क्लास सिक्स्थ में था।  उस घटना का प्रभाव मेरे दिल- दिमाग पर बाद के‌ दिनों तक छाया रहा था। क्योंकि तब दुनिया इतनी फैली … Read more

पवित्र रिश्ता – पुष्पा जोशी

उस रिश्ते को मैं क्या नाम दूं, समझ नहीं पा रहा हूँ, उनसे मेरा कुछ तो रिश्ता है, उस रिश्ते को मैं नकार नहीं सकता.न उसका नाम मालुम है,न उम्र .सच माने तो मैंने उन्हेंकभी देखा भी नहीं है.कभी उसे देखने का विचार भी नहीं आया.उनके कंठ  से निकली स्वर लहरी सीधे मेरे दिल में … Read more

अंजाना सा -जाना पहचाना – गीता वाधवानी

टीनएजर, युवा होते बच्चे, एक ऐसी दहलीज , जब मानसिक और शारीरिक बदलाव होते हैं। इसी उम्र में पढ़ाई और कैरियर सेट करने की चिंता होती है और इसी उम्र में भटकाव की भी स्थिति सबसे ज्यादा देखी जाती है। बच्चे, दोस्तों से कुछ ज्यादा ही घुल मिल जाते हैं और कई बार उनकी बातों … Read more

 इंसानियत का रिश्ता – विभा गुप्ता

मेरे पति का तबादला एक नये शहर में हुआ था।घर के कामों के लिए मैंने एक नौकरानी रखी थी जो समय पर आकर सारा काम कर जाती थी।मैंने नोटिस किया कि बाल-बच्चेदार होने के बावज़ूद भी उसे घर जाने की जल्दी नहीं होती है।एक दिन मैंने उससे पूछ लिया, ” रागिनी,तेरे बच्चे कितने हैं?, उनकी … Read more

वो सच में एक भाई का फर्ज़ निभा गया था – गीतू महाजन

भरी दोपहर में दरवाज़े की घंटी बजी तो नीता जी  बड़बड़ाते हुए बिस्तर से उठी,”यह कोरियर वाले भी इतनी दोपहर को ही आते हैं या कोई सेल्स गर्ल होगी।इन सब को यही समय मिलता है आने का।अभी-अभी तो फुर्सत से लेटी थी मैं”। दरवाज़ा खोला तो सामने एक तेईस चौबीस वर्ष का लड़का था। मुस्कुराते … Read more

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