सोच – आरती झा”आद्या” 

ओह हो माँजी.. ये क्या। आपको भी ना चैन नहीं है। क्यूँ किया आपने ये सब..बहु साक्षी तौलिया ले बाथरुम में जाते ही बोली।  ठीक है ना बेटा तुम्हारा थोड़ा काम आसान हो गया.. सासु माँ सुधा ने कमरे से ही कहा।  लेकिन माँजी अब आप आराम करे। मैं और कमली सारे काम कर लिया … Read more

सदा सुहागन – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज नंदा की मां सदर्श ताई जी का देहांत हो गया था,सब लोग एकत्रित हुए थे।अधिकतर महिलाओं के मुंह पर एक ही बात थी कि बहुत ही सौभाग्यशाली थी,जो सुहागन ही मृत्यु को प्राप्त हुई।कुछ ये भी कह रही थी कि वैसे भी बहुत ही किस्मत वाली थी जो गरीब परिवार से आई थी और … Read more

वो रद्दी वाला  – दीपा माथुर

वो रद्दी वाला  – दीपा माथुर सुरेखा  वो रद्दी वाला सद्दाम भी ना सोच ही रही थी तभी मोबाइल की रिंग टोन ने जागते हुए स्वप्न मै विघ्न डाल दिया। कान की मशीन लगा कर फोन रिसीव किया हेल्लो कोन तनिक जोर से बोलो। मै आपका रद्दी वाला” “सद्दाम” “हा” “बहुत लंबी उम्र है रे … Read more

माँ की जगह कोई नहीं ले सकता – के कामेश्वरी

रूपा को जब पता चला कि रचना की माँ चल बसी हैं सुनकर उसे बहुत बुरा लगा क्योंकि रूपा और रचना दोनों बचपन की सहेलियाँ थीं । दोनों के परिवार एक-दूसरे को जानते थे । इसलिए शादियाँ हो गई परंतु आज तक दोनों एक-दूसरे से बिना बात किए नहीं रह सकती हैं । रूपा ने … Read more

घर की चौथी बेटी और संघर्ष – मंजू तिवारी

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का मौका था जब मैं 2004 में एक महिला महाविद्यालय से b.ed कर रही थी सुबह से ही महिला दिवस की बात हो रही थी लंच टाइम के बाद से महिला दिवस मनाया जाएगा और सभी लड़कियां अपनी अपनी स्पीच देंगी इससे पहले मैंने कभी महिला दिवस नहीं मनाया था ना ही … Read more

हरे कांच की चूड़ियाँ – कमलेश राणा

आज विम्मो की लगुन थी जब उसकी भाभी ने उसे हरे कांच की चूड़ियाँ पहनाई तो एक अलग सी उमंगें उन चूड़ियों की खनकती आवाज़ के साथ उसके मन में सर उठाने लगीं जैसे ही ये खनकतीं वह चौंक सी जाती और फिर अपने हाथों को देखकर मुस्कुरा देती। आज उसे अपने हाथ बहुत सुंदर … Read more

विजयपथ – आरती झा आद्या

चारु तुम..अपनी बेटी की जिद्द पर उसकी दोस्त की  कत्थक क्लास में एडमिशन कराने आई माधवी अपनी सहेली चारु को उस एक कमरे के घर में देख आश्चर्य चकित रह गई थी। माधवी तुम…मुझे देखते ही बच्चियों को कत्थक के लिए ताल देती चारु आगे बढ़ गले लग गई। चारु तू यहां कैसे… कब से … Read more

फुलवा – अनुराधा श्रीवास्तव “अंतरा “

’’फुलवा, अरी हो फुलवा। कहाॅं मर गयी, जब जरूरत होती है तो इस लड़की का कहीं पता नहीं चलता है। खेल रही होगी कहीं लड़कों के साथ कंचा, गोटी। आने दो, मार मार कर चमड़ी ना उधेड़ दी तो मेरा भी नाम कमली नहीं।’’ कमली बड़बड़ाती जा रही थी और घर का काम समेटती जा … Read more

जीवन एक संघर्ष – रश्मि प्रकाश

“ माँ सोच रही हूँ प्रिया को बुला लूँ ।” राशि ने अपनी माँ से कहा जो बहुत समय बाद मायके आई थी  लगभग पाँच साल पहले वो ये शहर छोड़ कर कहीं और चली गई थी । “ तुम अभी तक उसको भूली नहीं हो पाँच साल हो गया यहाँ से गए आज भी … Read more

हम बुरा क्यो ना माने – संगीता अग्रवाल

” बहू जल्दी जल्दी हाथ चलाओ नितेश के दोस्त होली खेलने आते ही होंगे फिर अर्चना भी तो आ रही है जमाई जी के साथ अपनी भाभी की पहली होली पर !” सरला जी पकोड़े तलती हुई अपनी बहू मीनाक्षी से बोली। ” जी मम्मीजी बस होने वाला है !” मीनाक्षी मुस्कुराते हुए बोली।  इधर … Read more

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