संस्कार – पूनम अरोड़ा
आज फिर काशी अब तक नहीं आई थी। नीता को ऑफिस जाने में देर हो रही थी, वो खुद ही बड़बड़ाती जा रही थी “कितनी बार उससे कहा है कि मेरे जाने से पहले आ जाया कर, बाद में आने से अभय को दरवाजा खोलने उठना पड़ता है और उसकी नींद खराब होती है लेकिन … Read more