संस्कार – पूनम अरोड़ा

आज फिर काशी अब तक नहीं आई थी। नीता को ऑफिस जाने में देर हो रही थी, वो खुद ही बड़बड़ाती जा रही थी “कितनी बार उससे कहा है कि मेरे जाने से पहले आ जाया कर, बाद में आने से अभय को दरवाजा खोलने उठना पड़ता है और उसकी नींद खराब होती है लेकिन … Read more

एक अजनबी  – आरती झा आद्या 

विवाह के तीन चार साल हो गये थे। विश्विद्यालय की परीक्षा में हिन्दी साहित्य में स्वर्ण पदक विजेता स्वाति चाह कर भी घर गृहस्थी के अलावा कुछ नहीं सोच पा रही थी। कभी लिखना पढ़ना गुनगुनाना यही जिंदगी थी उसकी। हिन्दी साहित्य से जुड़ी हुई कोई भी प्रतियोगिता हो.. महाविद्यालय या विश्विद्यालय की तरफ से … Read more

माँ का मान  – पूनम अरोड़ा

बचपन में  गर्मी  की छुट्टियाँ  में  लगभग हर वर्ष  ही नानी के  घर जाना होता। हमारी  मामी जी  मोहल्ले की स्थानीय कीर्तन  मंडली की सदस्या थीं। हर दो तीन बाद वहाँ  किसी न किसी के घर या मंदिर में  कीर्तन  का प्रोग्राम  होता। मामी जी तो जातीं  ही थी कभी-कभी  वो  हमें और मम्मी  को … Read more

भगवान ऐसा दामाद सबको दे – सविता गोयल

” आ गई बेटा, बहुत इंतज़ार करवाती है अपनी मां को ,, सरला जी अपनी बेटी के लाड लडाते हुए बोलीं।   ” अरे मां, अभी दो महीने पहले ही तो आई थी …. पता है मेरे आने के नाम से ही मेरी सासु मां का जी उठ जाता है। कहने लगती हैं कि तेरे बिना … Read more

  * सीख * – पुष्पा जोशी

‘मेडम जी मीनू बेबी जी आई है, आपसे मिलने’. शारदा ने दामिनी जी से कहा. ‘कौन? मीनू आई है.उसे यहीं ले आ. ‘अपने कमरे में किताबों की अलमिरा  जमाते हुए दामिनी जी ने कहा.दामिनी जी अभी कुछ दिन पूर्व, हायर सेकण्डरी स्कूल की प्राचार्या के पद से सेवा निवृत्त हुई है.मीनू उनके पड़ोस में रहती … Read more

कीमत – नंदिनी

सुबह का समय ,सब अपने अपने काम पर लग चुके थे ,मां नाश्ता बनाने में,पापा चाय सँग पेपर पड़ने में,दादी गेहूं साफ करने में, हम भाई बहन तैयार होकर स्कूल जाने में । कल तो रविवार की छुट्टी है माँ से आलूबड़े बनवाएंगे रवि चहक कर अपनी बहन बड़ी बहन रुपाली से बोला आज तो … Read more

परम्परा – नंदिनी

कहते हेना एक स्त्री दीवारों, छत को घर बनाती है ,एक स्त्री घर में सुकून लाती है एक स्त्री घर की अन्य महिलाओं के मनोभावों को समझ ,अपनापन देकर घर को जन्नत बनाती है । ऐसे ही सुशीला ने अपने घर को जन्नत बनाया । ये कहानी  60 70 के दशक की है ,सामान्य ग्रामीण … Read more

लोग क्या कहेंगे..? – रोनिता कुंडू

क्या कहा डॉक्टर ने अनु..? विभा जी ने पूछा…  अनु:  मम्मी जी..! सब खत्म हो गया… अब मैं अकेले दोनों बच्चों को कैसे पालूंगी..?  विभा जी:   क्यों क्या हुआ..? ऐसे क्यों बोल रही हो…?  अनु:   मम्मी जी…? कैंसर है उनको और वह भी लास्ट स्टेज…  विभा जी के पैरों तले, मानो ज़मीन खिसक … Read more

अब है संघर्ष – गुरविंदर टूटेजा 

दिव्या दादी की गोद में सिर रखकर बैठी है उसके आँसू लगातार बह रहें हैं…दादी पापा हमें छोड़कर क्यूँ चले गये मैं क्या करूँगी दादी…पापा दोनों  भाईयों (सनी व वंश ) को हमेशा कहते थे कि मेरी बेटी को कुछ मत कहा करों इसने तो एक दिन विदा होकर चलें जाना हैं…पर पापा पहले ही … Read more

जरूरत की माँ  – पूनम अरोड़ा

बहुत दिनों बाद आज आभास का फोन आया। कुशल क्षेम के आदान प्रदान के पश्चात बोला “माँ आपको तो पता है कि रिया की डिलिवरी की डेट नज़दीक आ गई है, उसे आराम की और आपकी देखभाल की बहुत “ज़रूरत” है, आप अपना और पापा का ज़रुरी सामान पैक कर के रखना, मैं सन्डे को … Read more

error: Content is protected !!