चंदा का संघर्ष – पुष्पा पाण्डेय
किसी-किसी की जिन्दगी संघर्ष का पर्याय बन जाता है। चंदा जब आठ साल की थी तभी से संघर्ष के साथ जीना सीख लिया था। माँ को बिमारी ने छीन लिया और एक साल बाद ही पिता ने चंदा के लिए नयी माँ ला दी। खिलौने से खेलती-खेलती चंदा कब किसी के हाथों की खिलौना बन … Read more