एहसास – बेला पुनिवाला : Moral stories in hindi

डॉली ने अपने पापा को फ़ोन लगाया, डॉली के पापा सामने से कुछ कह पाते, उस से पहले ही डॉली ने बात करना शुरू कर दिया,” हेलो, पापा ! कल आपको मेरे कॉलेज के कन्वोकेशन सेरेमनी में आना ही है, चाहे कुछ भी हो जाए। “      डॉली के पापा यानी मैंने कहा, कि ” मैं … Read more

दूसरी पारी का वह पहला दिन – नरेश वर्मा 

सोचा था कि आज देर से सोकर उठूँगा क्योंकि यह एक बंधन मुक्त सुबह होगी ।किंतु शरीर जो इतने वर्षों से चली आ रही दिनचर्या का अभ्यस्त रहा था उसने नियत समय सुबह के साढ़े पाँच बजे आँखें खोल दीं।अब शरीर का भी क्या दोष ,उस बेचारे को तो नहीं पता था कि इस सुबह … Read more

बोझ – रश्मि प्रकाश 

आज मनोहर लाल जी बहुत खुश थे … आखिर बहुत दिनों बाद उनका फ़ौजी बेटा चंदन घर जो आने वाला था।  गांव में उनका अपना छोटा सा घर था…हंसमुख पत्नी अब हमेशा बीमार रहने लगी थी क्योंकि चंदन उनका  इकलौता बेटा बहुत मन्नतों के बाद हुआ था … और उसके फ़ौज में चले जाने की … Read more

“मीठी मां” – कविता भड़ाना

“साचा तेरा नाम, तेरा नाम तूहि बनाए बिगड़े काम “ राम नाम के सुंदर भजन की मधुर लहरियां सुबह सुबह जैसे ही हवा में बही, पूरा वातावरण बेहद खुशनुमा और दिव्यता से ओत प्रोत हो गया… मधुर गीत में डूबे लोग प्रभु की भक्ति में लीन हो गए…महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया और … Read more

” धोखा तो था लेकिन… “ – डॉ. सुनील शर्मा

सीमा और राकेश की शादी को अभी दो सप्ताह ही हुए थे. विवाह परिवारों तथा एक जानने वाले के द्वारा हुआ था. राकेश किसी कम्पनी में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर था. सीमा ने तो एम बी ए करके अभी ज्वाइन ही किया था. देखने में राकेश काफी हैंडसम था. सीमा से पहली मुलाकात एक … Read more

गंगा के संघर्ष का सुख – शुभ्रा बैनर्जी

आज हमारी कॉलोनी में महिला दिवस के उपलक्ष्य में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया था।पिछले पच्चीस सालों से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण मैं भी आमंत्रित थी।मुख्य अतिथि के साथ मुझे भी मंच पर बैठाया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई।महिलाओं के सशक्तीकरण पर कविताएं और भाषण प्रस्तुत … Read more

 एक नई पहचान  – सारिका चौरसिया

विशिष्ट अतिथिगण मंच पर अपनी अपनी निर्धारित कुर्सियों पर विराजमान थे और सरस्वती वंदना के साथ ही अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह कार्यक्रम शुरू हो चुका था।सभागार की सबसे अग्रिम पंक्ति में जिलाधिकारी महोदया के ठीक सामने बैठी वह अपने विचारों में खो रही थी। विचार, लगभग तीस वर्षों के कठिन सफर के। … Read more

“माक़ूल जवाब” – स्मिता टोके “पारिजात”

बात उन दिनों की है जब घर में सिर्फ़ लैंडलाईन फोन ही होता था । उस दिन साक्षी को मार्केट जाना था इसलिए उसने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी । लेकिन ऑफ लेने के बावजूद सुबह की दिनचर्या में कोई आराम नहीं था । किचन में मदद करनेवाली घरेलू सहायिका भी उस दिन छुट्टी … Read more

पंख पखेरू – रश्मि प्रकाश 

“ देख रचित कहे दे रहा हूँ…कान खोलकर सुन ले…जब मैं बड़ा हो जाऊँगा ना मम्मी पापा हमेशा मेरे साथ रहेंगे…. तेरी बीबी तो झगड़ालूहोगी वो रहने ही नहीं देगी साथ में।” बचपन में अक्सर रंजन अपने छोटे भाई से कह कर लड़ता रहता था  “ ये देखो सुमिता हमारे बच्चे अभी मेरे कंधे तक … Read more

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