मैं कितना गलत सोचती थी – किरन विश्वकर्मा

बात कई वर्ष पहले की है…..  मेरे घर के सामने कुछ दूरी पर एक परिवार रहने आया….पति- पत्नी दस वर्ष का बेटा और गोद में बेटी। चूकि हम लोगों के घर बहुत छोटे-छोटे थे और कॉलोनी में अभी बहुत कम ही लोग रहते थे तो शाम होते ही सभी लोग घर के बाहर कुर्सी डाल … Read more

अस्तित्व  – उमा वर्मा

दिन का उजाला धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा था, कब से खिड़की के पास खड़ी है गायत्री, समय का पता ही नहीं चला ।अंधेरे ने पंख पसारने शुरू किए तो उठकर खिड़की बंद कर दिया ।घर में अकेली है गायत्री ।बेटा अपनी ससुराल गया हुआ है प्रिया को लिवाने।हर साल गरमी की छुट्टियां होते ही … Read more

मन का संघर्ष – अनीता चेची

मानस ने जैसे ही किशोरावस्था में प्रवेश किया उसके मन के भीतर एक संघर्ष शुरू हो गया। उसका मन तरह-तरह की कल्पना करने लगा ।कक्षा की लड़कियां उसे अपनी और आकर्षित करती। पढ़ाई की तरफ ध्यान बिल्कुल भी ना लगता ।इस बदलाव को वह समझ ही नहीं पा रहा था। घर में मां की बीमारी … Read more

सौ रुपये का बोरा – सीमा पण्ड्या

बेटियाँ #पाँचवा जन्मोत्सव, कहानी क्रमांक १ लंबे इंतज़ार और अथक प्रयासों के बाद आख़िर मेरा स्थानांतरण गृह नगर हो ही गया। बहुत ख़ुश थे हम लोग कि अब सभी अपने मित्र, सहयोगियों और रिश्तेदारों के बीच में रहेंगे ।पत्नी भी ख़ुश थी क्योंकि उसका ससुराल के साथ-साथ मायका भी यहीं था। बच्चे भी अति प्रसन्न … Read more

वो खौफनाक दोपहर  – डॉ उर्मिला शर्मा

मंजुला हमेशा की तरह सुबह चाय के साथ समाचार पत्र पढ़ रही थी। सुबह में वो समाचारों के हेडलाइंस ही प्रायः देखती थी। विस्तृत जानकारी वाली खबरों को वह शाम को पढ़ती या किसी फुरसत के क्षणों में पढ़ती थी। सरसरी नजर अखबार पर डालते हुए उसकी नजर एक खबर पट आकर अटक गई- “अमुक … Read more

गलत आदमी-कह – देवेंद्र कुमार

मैं रिक्शा में बाजार जा रहा था। एकाएक आवाज आई, “सर, प्रणाम।” और एक स्कूटर रिक्शा के पास आकर रुक गया। मैंने रिक्शा वाले से रुकने को कहा। स्कूटर सवार ने मेरे पैर छू लिए। मैंने उसे पहचान लिया—वह मेरा पुराना छात्र यशपाल था। उसने कहा, “मैंने तो आपको दूर से पहचान लिया था,” फिर … Read more

क्या मर्द रो नहीं सकते (पार्ट -1) – मीनाक्षी सिंह

चांदनी – ये क्या यार ,विभू के जाने में बस 15 दिन बचे हैँ ! मेरा दिल बैठा जा रहा हैँ ! तुम हो कि अपनी ही धुन में मस्त ! कभी फ़ोन ,कभी टीवीं ,कभी सैर पर निकल जाते हो ! आखिर किस मिट्टी के बने हो तुम ! सुन रहे हो ना ,मैं … Read more

गिफ़्ट – नंदिनी

चलो जी आज शिखा से मिलते हैं और जानते हैं आखिर उसकी अनोखी जन्मदिन की गिफ़्ट डिमांड थी क्या ….. तीन भाइयों के परिवार में शादी हुई  शिखा की, छोटी बहू बनकर आई घर में, विशाल की दुल्हनिया बन कर । सास ससुर ,दो जेठानी उनके प्यारे दो बच्चे दिन भर चाची चाची करते । … Read more

दिल के रिश्ते  – नेकराम 

यह बात 12 मार्च 2011 की है रात का वक्त था मैं ड्यूटी से छुट्टी करके घर लोटा ही था कि — उस दिन मां बड़ी चिंतित थी मेरे घर आते ही बोली दवाई मैंने ले ली है और गोली भी खाली अब मेरी बात सुनो गौर से मेरी उम्र का कुछ ठिकाना नही कब … Read more

सीख – अभिलाषा कक्कड़

बच्चे जैसे ही सात आठ साल की उम्र में पहुँचते हैं तो बहुत ही जिज्ञासु प्रकृति के बन जाते हैं, ख़ासकर लड़के ..लड़कियाँ थोड़ी ठहरी स्वभाव की होती है । वो अपनी गुड़िया या फिर छोटे से टेडी बीअर में ही ख़ुश रहती है । मेरा बेटा जब आठ बरस का हुआ तो हमारे दोस्त … Read more

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