औलाद – कामिनी मिश्रा कनक

चंदन के घर पर हर साल गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी की स्थापना की जाती है ।       इस साल चंदन के पिता बहुत बीमार हैं …… जिसकी वजह से चंदन की माँ ने चंदन को गणपति जी को लेने के लिए अकेले बाहर जाने से मना कर दिया । चंदन बहुत परेशान है कि … Read more

बेटियां मायके मे बेटे का नही एक माँ का फर्ज निभाती है – संगीता अग्रवाल

” माँ एक ऐसा शब्द जो दुनिया का सबसे छोटा शब्द है पर है कितना विशाल । इस एक शब्द मे औलाद की सारी दुनिया समाई होती है और ये शब्द जब है से थी मे बदलता है तो लगता है सारी दुनिया उजड़ गई हो । माँ है से माँ थी तक आना बच्चो … Read more

बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहां से खाओगे…? – रोनिता कुंडू

 बेटा..! थोड़ा बाथरूम तक ले चल मुझे…! कब से चिल्ला रहा हूं…?  मदन जी ने अपने बेटे कार्तिक से कहा…  कार्तिक:  ओह…हो… तंग आ चुका हूं अपने जीवन से… ऑफिस से थक कर घर आओ, फिर इनकी चाकरी में लग जाओ… चलिए…! बस मेरा अब यही काम ही तो रह गया है… कार्तिक ने चिढ़ते … Read more

खुशनसीब पिता – गुरविंदर टूटेजा

राजीव की पत्नी को गुजरे दो साल हो गये थे वो मान नहीं रहे थे पर माँ व दीदी ने पीछे पड़कर दूसरी शादी करा ही दी…रीमा जब उनकी पत्नी बनकर आयी तो साथ में चार साल का बेटा वंश भी लाई…!!!!    उसने पहले दिन ही एक शर्त राजीव के सामने रखी कि वो अब … Read more

बे-औलाद – माता प्रसाद दुबे

पापा! क्या मम्मी अब नहीं आएगी?”सात साल की बच्ची रिया अपने पापा रजनीश से सवाल करते हुए बोली।”हा बेटी!अब तुम्हारी मम्मी यहां नही आएगी?”रजनीश अपनी बेटी रिया को दुलारते हुए बोला।”ठीक है..पापा!वह न ही आए तो अच्छा है..हमेशा दादी और आपसे लड़ाई करती है..मुझे भी डांटती रहती है..जरा भी प्यार नहीं करती मुझसे वह बहुत … Read more

बे औलाद ही सही – के कामेश्वरी

सुबह से कंचन और उसके बेटे शान के बीच कहा सुनी हो रही थी। शान अपनी जिद पर अड़ा हुआ था कि आप इस घर को मेरे नाम कर दीजिए बस यही एक रट लगाए बैठा था आगे कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं था । हम दोनों तब ही बात करेंगे कहकर पैर पटकते … Read more

संस्कारी बेटा – मीनाक्षी सिंह 

शर्मा जी ,आपके बेटे ने पिछली साल भी तो एसएससी का पेपर दिया था ,इस साल भी दे रहा हैँ ! पास नहीं हुआ था क्या ?? पड़ोसी पांडेय जी चुटकी लेते हुए शर्मा जी से बोले ! हाँ जी ,फिर से दे रहा हैँ ,दो नंबर से रह गया था ! शायद उतनी मेहनत … Read more

“गिरगिट” (बदलते चेहरे) – कविता भड़ाना

“बहादुर जरा बाहर बस के ड्राइवर और कंडक्टर भैया को चाय पिला दो” बेटी का 12वा जन्मदिन मनाकर लौटी रीमा ने अपने घर के बावर्ची को आवाज देकर कहा और बस में साथ गए बच्चो को उनके रिटर्न गिफ्ट देकर विदा करने लगी….दो बच्चो को उनके मम्मी पापा अभी लेने नहीं आए तो उन्हें फोन … Read more

मिलन  – पुष्पा जोशी

‘क्या बात है सरिता? पूरे तीन दिन हो गए हमारे विवाह को,मगर तुम पता नहीं,कहाँ खोई हो,तुम्हारा उदास चेहरा अच्छा नहीं लगता,यहाँ अगर किसी बात से तुम्हें परेशानी है,तो मुझे बताओ,जब तक नहीं बताओगी मुझे पता कैसे चलेगा ।भ‌ई मैं सागर हूँ, कोई भगवान तो नहीं जो घट-घट की जानते हैं।’ सागर ने अपनी गहरी … Read more

औलाद का सुख – पुष्पा जोशी

औलाद का सुख क्या होता है? ये गिरिराज बाबू से बेहतर और कौन जान सकता है. १०१ वर्ष की आयु पूरी कर वे अनन्त में विलीन हो गए. जाते समय उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं  थी, एक शांति का भाव था. होटो पर मुस्कान और ऑंखों में चमक लिए वे इस दुनियाँ से चले … Read more

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