सिलसिला – गीतांजलि गुप्ता

मंजूषा कुछ दिनों पहले ही हमारे पड़ोस वाले फ़्लैट में आई थी। पतली दुबली स्मार्ट दिखने वाली कुछ चालीस वर्ष की आयु होगी उसकी। परिवार के नाम पर वो और उसकी माँ ही थे। घर के बाहर एक कार खड़ी रहती पर वो उसे कभी कभार ही निकालती, तब जब माँ बेटी साथ में कहीं … Read more

असल हकदार – दर्शना जैन

स्कूल के वार्षिकोत्सव में स्कूल के होनहार व मेहनती बच्चों का सम्मान था। बच्चों की सूची में प्रशांत का भी नाम था। उसका नाम पुकारे जाने से पहले प्रिंसिपल ने उसके बारे में बताया,” विगत छ: वर्षों से प्रशांत हमारी स्कूल का छात्र है। बचपन में हुए एक हादसे में उसका दायाँ हाथ लगभग निष्क्रिय … Read more

इज्जत – उमा वर्मा

सुबह  सुबह मुहल्ले में चर्चा हो  रही थी ।वह जो कोने वाली मंदिर है न, उसमें एक लड़की आई है जिस पर माँ  आती हैं ।वह जो कुछ कहती है सब सच होता है ।सभी माँगने वाले की मुराद पूरी हो जाती है ।मुझे इन बातों पर जरा भी विश्वास नहीं था ।फिर भी सोचा … Read more

लायक बेटा – रुचिका खत्री

“कविता बेटा आज मानव ने ऑफिस से छुट्टी ले ली है ना……..आनंदी जीजी आने वाली हैं………कहीं भूल तो नहीं गया….?” कविता को जल्दी जल्दी नाश्ता बनाते हुए देखकर मैंने कहा। “हां मम्मी छुट्टी तो ले ली है लेकिन कुछ अर्जेंट काम आ गया है इसीलिए 2 घंटे के लिए ऑफिस जाना पड़ेगा लेकिन आप चिंता … Read more

बहू भी औलाद है – शुभ्रा बैनर्जी 

बचपन में एक कहावत सुनी थी कि एक आंगन से उखाड़ कर दूसरे आंगन में लगाया गया पेड़ कभी जीवित नहीं बचता।मेरा मन कभी नहीं स्वीकारा इस सत्य को।कितने ही पेड़ पड़ोस के घर से मांगकर लाती रही और लगाती रही थी मैं। सकारात्मक सोच की धूप और प्रेम के पानी से सभी आज जिंदा … Read more

यह मेला है – डा. नरेंद्र शुक्ल

तो देखिये साहिबान । इस मेले का सबसे हैरतअंगेज़ खेल । इस खेल में आप देखियेगा कि एक कलाकार किस तरह से समूची तलवार अपने मुंह में डाल लेता है । टिकिट केवल दस रूपये । मौका हाथ से न जाने दीजिये । ऐसा खेल आपने पहले कभी नहीं देखा होगा । जल्दी कीजिये । … Read more

हमार समधिन बहुतै प्यारी – सुषमा यादव

जी हां, सही सुना आपने,हम आये हैं बेटी , दामाद के घर पेरिस। अब हम इतनी दूर से आए हैं तो भई, हमारी समधन हमसे मिलने जरूर ही आयेंगी। उनके साथ समधी जी भी आये, समधिन जी,हम सबके गले लग कर गालों पर पुच्च, पुच्च की,अब आये समधी जी आगे, बच्चों से मिले और हमारी … Read more

मोर्चे – मुकुन्द लाल 

 प्रचंड धूप की तपिश के साथ-साथ ग्राम कचहरी का वातावरण भी गर्म होता जा रहा था। पंँचायत में उपस्थित मुखिया, सरपंच और पंँचों के उठाये गये प्रश्नों का जवाब रविप्रकाश के गिरोह के सदस्यों द्वारा दिया जा रहा था, जिसको फरियादी पक्ष अपने बहस के माध्यम से काट रहा था। रविप्रकाश के कुख्यात आदमियों और … Read more

दिल की दुआ – लतिका श्रीवास्तव 

वो कुछ नहीं करता है… वो कौन..!मेरा बेटा सूरज …! हां वो कुछ ऐसा नहीं करता जो आज कल की दुनिया में कुछ करने लायक की परिभाषा में फिट हो सके..मसलन मेरे   भाई का लड़का पूरी यूनिवर्सिटी में टॉप किया है और अभी विदेश में जॉब ऑफर मिला है….करोड़ों का ऑफर है….अब वो वहीं … Read more

औलाद – कामिनी मिश्रा कनक

चंदन के घर पर हर साल गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी की स्थापना की जाती है ।       इस साल चंदन के पिता बहुत बीमार हैं …… जिसकी वजह से चंदन की माँ ने चंदन को गणपति जी को लेने के लिए अकेले बाहर जाने से मना कर दिया । चंदन बहुत परेशान है कि … Read more

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