मइयत – विजय कुमारी मौर्य

“सेठ दुर्गा दास की मइयत में” …. हजारों की भीड़ थी। क्या हिन्दू, क्या मुसलमान, सिख, ईसाई सभी की आंखें नम थी? वे थे भी बहुत अच्छे इन्सान। क्या गरीब…. क्या अमीर,  ऊंच-नीच का भेदभाव लेश मात्र का भी न था। सबके दुख सुख में हमेशा खड़े रहते थे। परिवार में पत्नी सुशीला, अपने नाम … Read more

नींव का पत्थर – नम्रता सरन”सोना

“अरे भाभी! घर का तो नक्शा ही बदल दिया, ऐसा लग ही नही रहा कि यह वही घर है, जहाँ मेरा जन्म हुआ, जहाँ मैं पली- बढ़ी, सब कुछ बदल गया। हाँ,  पर अच्छा किया आपने रिनोवेशन करवाकर” संस्कृति ने चारों तरफ नज़र घुमाते हुए कहा। संयोगवश काफी समय के बाद संस्कृति मायके आई थी, … Read more

स्नेहिल छाँव – सपना शिवाले सोलंकी

“सुनों बहू ,इतनें सालों से खूब संभाल ली इस गृहस्थी को अब मेरे बस की बात नहीं …” रमा ने बड़े ही तल्खी के साथ कहा था। नेहा को सुनकर थोड़ा अजीब तो लगा पर उसनें बड़े ही प्यार से कहा, “जी मम्मी आप समझा दीजिएगा जैसा आप कहेंगी मैं वैसा कर लूँगी” और उस … Read more

सयानी बिटिया – सपना शिवाले सोलंकी

” मम्मी आज हम सब साथ खाना खाएंगे “ “अरे नहीं बेटे तुम तीनों बैठो मैं गर्मागर्म फुल्के उतार कर  देती जाऊँगी “ “बिल्कुल नहीं आज मैं आपकी कोई बात नहीं सुनुँगी “ विधि ने जोर देते हुए माँ से कहा। “मैंने डाइनिंग टेबल पर बाकि का खाना रख दिया है सलाद कट करके भी … Read more

 यादों के उफान  – किरण केशरे

माला जी अपने छोटे से खूबसूरत लॅान में धूप में बैठी हुई,ख्यालों में खो सी गई थी,,,,  बेटे सूरज का कनाडा से वीडियो कॉल आया था कल ही, बहुत सी बातें हुई, वह माला जी को बार बार कनाडा आने के लिए कह रहा था, क्योंकि दिनेश जी के जाने के बाद से वह अकेली … Read more

“तिरंगा मेरी शान है” – ऋतु गुप्ता

मालिनी ओ मालिनी सुनती नहीं क्या, कल सुबह हमारा स्वतन्त्रता दिवस है,इस कम्युनिटी हॉल के बाहर मैदान में तिरंगा फहराया जाएगा, बड़े-बड़े लोग आएंगे, देशभक्ति का आलम होगा, और तू है कि अपने काम पर ध्यान ही नहीं देती, तुझे साहब ने बोला था ना कि गेंदे के फूलों की लड़ियां सभी दरवाजे पर लगा … Read more

फ्रैंडशिप डे !! – पायल माहेश्वरी

 आज अगस्त महीने का पहला रविवार था दोनों बच्चे अनुज व अनुजा अपने हाथों में ढेर सारे रंग बिरंगे फीते लेकर यहाँ वहां भाग रहे थे ,दोनों बेहद खुश नजर आ रहे थे । ” मम्मी आज फ्रैंडशिप डे हैं ” बच्चों का उत्साह देखने लायक था।  फ्रैंडशिप डे !! मनीषा ने चकित होकर सोचा … Read more

जाको राखे साईंयां मार सके न कोय – कमलेश राणा 

बात उस समय की है,,जब तक मंडीदीप इंडस्ट्रियल एरिया नहीं बना था,,जहाँ आज सैकड़ों चिमनियां धुँआ उगल रहीं हैं,,वहाँ सीताफल का जंगल हुआ करता था,,   दीपावली के समय जब सीताफल की आंखें खुल जातीं तो हम उन्हें तोड़ कर पेड़ों के झुरमुटों में छुपा देते,,दो-तीन दिन बाद जब वो पक जाते तो निकल कर … Read more

नरपिशाच – कमलेश राणा 

भूरा नाम था उसका,,बहुत गोरा बिल्कुल अंग्रेज जैसा,,कदाचित अंग्रेज ही हो,,वो कौन था,कहां से आया था,,कोई कुछ नहीं जानता था,,किसी से मांगता भी नहीं,,कोई दे देता तो खा लेता,,   हमारे घर के नीचे कई दुकानें बनी हुई थी,,ऊपर 4 परिवार किराये से रहते थे,,इसी प्रकार सामने भी भविष्य में उपयोग के लिए दुकानें बना … Read more

“ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे –  कविता भड़ाना…

छोड़ेंगे दम मगर,तेरा साथ न छोड़ेंगे “ ” शोले” फिल्म के इस गाने को सुनकर अचानक से सुधीर की आंखों में पानी आ गया और बरसने लगी। याद आ गया उसे अपने बचपन का जिगरी दोस्त “आनंद”…  सुधीर और आनंद दोनों एक ही गली मैं अगल-बगल के घरों में रहते थे। दोनों के परिवारों में … Read more

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