**कर्मों की वसीयत: एक अबला का श्राप** – सुमन सक्सेना 

*”वक्त गूंगा नहीं होता, बस मौन रहता है। जब वह अपना फैसला सुनाता है, तो गवाहों की ज़रूरत नहीं पड़ती; इंसान की अपनी ही चीखें उसकी गवाही देती हैं।”* “मास्टर दीनानाथ जी, आप तो नाहक ही परेशान हो रहे हैं। अरे, लड़के वाले खुद चल कर आए हैं। वे कहते हैं उन्हें दहेज-वहेज कुछ नहीं … Read more

मौन घुंघरू – डॉ उर्मिला सिन्हा

*”पच्चीस साल तक उसने अपनी कला को रसोई के डिब्बों के पीछे छिपाए रखा, इस डर से कि दुनिया क्या कहेगी। लेकिन जब एक दिन उसके कदम थिरके, तो उसी दुनिया को अपनी हथेलियां लाल करनी पड़ीं। पढ़िए एक ऐसी मां की कहानी जिसने साबित किया कि सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।”* रमेश … Read more

आज़ाद पंख – आरती कुशवाहा 

*”वो समझता था कि वो उसे दबाकर रखेगा क्योंकि वो ‘औरत’ है, पर वो भूल गया कि वो एक ‘पिता’ की बेटी भी है। जब एक पिता अपनी बेटी की ढाल बना, तो बिखर गया रईसी और अहंकार का वो खोखला महल।”* “विमल, मुझे घरेलू हिंसा और दहेज़ प्रताड़ना का मतलब समझाने की ज़रूरत नहीं … Read more

उधार की शान – गरिमा चौधरी

*”दूसरों को अपनी रईसी दिखाने के चक्कर में बेटा कर्ज़ के दलदल में धंसता चला गया, लेकिन पिता ने अपनी बरसों की जमा-पूंजी देकर उसे दौलत का नहीं, बल्कि ‘सुकून’ का असली मतलब समझाया।”* राघव के हाथों से लिफाफा छूट गया। वह रो पड़ा और पिता के घुटनों पर सिर रख दिया। “नहीं बाबूजी, मैं … Read more

**ज़ायका ज़िन्दगी का: दूसरी पारी** – रीमा साहनी 

*”रिटायरमेंट के बाद जब दुनिया ने उन्हें ‘बेकार’ मान लिया, तब उनकी बहू ने रद्दी की टोकरी से उनके पुराने सपनों को ढूँढ निकाला और उन्हें ‘बेमिसाल’ बना दिया। पढ़िए एक ससुर और बहू की दिल छू लेने वाली दास्तां।”* “अक्सर लोग कहते हैं कि बेटा बुढ़ापे की लाठी होता है। मेरे पास बेटा भी … Read more

सोने का दिल – अर्चना खंडेलवाल

*”हम अक्सर जिसे ‘कबाड़’ समझकर घर के कोने में फेंक देते हैं, मुसीबत के वक्त वही तिनका हमारी डूबती हुई नाव का सहारा बनता है। पढ़िए एक ऐसी सास की कहानी जिसने अपनी ‘कंजूसी’ से अपने बच्चों की दुनिया खरीद ली।”* “मम्मी जी, प्लीज! अब इस पुराने, जंग लगे लोहे के संदूक को स्टोर रूम … Read more

वंश का अभिमान – रश्मि प्रकाश

*समाज कहता था कि जिसका अपना खून नहीं, वह वारिस कैसा? लेकिन उस सास ने भरी पंचायत में अपनी बहू के आंसू पोंछकर साबित कर दिया कि माँ बनने के लिए कोख की नहीं, कलेजे की ज़रूरत होती है।* “राघव, आप दूसरी शादी कर लीजिये,” सुमन ने सिसकते हुए कहा। “मैं नहीं चाहती कि मेरी … Read more

**साजिशों के बीच पनपा विश्वास** – शुभ्रा बनर्जी 

*”एक सास ने हीरे की अंगूठी चुराकर रिश्तों में कांच की दरार डालनी चाही, पर उसे नहीं पता था कि उसकी बहुओं का विश्वास उस हीरे से भी ज्यादा खरा और अटूट है।”* रसोई घर से आती खिलखिलाहट की आवाजें गायत्री देवी के कानों में पिघले हुए सीसे की तरह उतर रही थीं। वह अपने … Read more

संस्कारों का मोल – आरती झा

*लिबास की चमक आँखों को धोखा दे सकती है, लेकिन संस्कारों की खुशबू रूह में उतर जाती है। देखिये कैसे एक सास ने दुनिया के ताने को अपनी समधन के सम्मान में बदल दिया!* “ये मेरी समधन, सावित्री जी हैं। अवनि आज जो कुछ भी है—इतनी समझदार, इतनी सहनशील, और घर को जोड़कर रखने वाली—ये … Read more

**खून के रिश्ते से बड़ा दिल का रिश्ता** – करुणा मलिक

*दुनिया की हर माँ अपने बेटे की ढाल बनती है, लेकिन वो माँ विरली ही होती है जो अपनी बहू के आत्मसम्मान के लिए अपने ही बेटे के खिलाफ तलवार बन जाए।* सावित्री जी उठीं और मेघा के पास जाकर खड़ी हो गईं। उन्होंने मेघा का हाथ अपने हाथ में लिया। वह हाथ कांप रहा … Read more

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