समय का फेर – हेमलता गुप्ता
रमन और महेश की दोस्ती शहर में मिसाल मानी जाती थी। दोनों ने बचपन एक ही मोहल्ले में गुज़ारा था। स्कूल की घंटी बजते ही दोनों साथ भागते, एक ही टिफिन से रोटी बाँटते, और शाम को गली के मोड़ पर खड़े होकर बड़े-बड़े सपने देखते—“एक दिन अपना भी नाम होगा, अपना भी काम होगा।” … Read more