काँच के रिश्ते

रसोई में बर्तनों के टकराने की आवाज़ आज कुछ ज़्यादा ही तीखी थी। दिल्ली की उस सर्द शाम में भी मीरा के माथे पर पसीने की बूंदें झलक रही थीं। उसने गैस का बर्नर बंद किया और गीले हाथों को अपने एप्रन से पोंछते हुए बाहर हॉल की तरफ देखा। वहाँ सोफे पर उसका पति, … Read more

एक अनकही दूरी

सावित्री देवी के कमरे की खिड़की से छनकर आती सुबह की धूप भी आज उनके चेहरे की उदासी को कम नहीं कर पा रही थी। उनके हाथ में फोन था और दूसरी तरफ उनकी छोटी बहन लता थी। सावित्री देवी भारी आवाज़ में कह रही थीं, “सच ही कहती थी तू लता, जब तक बेटा … Read more

खाली मंडप

 दूसरी तरफ, कावेरी देवी की आँखों के कोर भी नम थे, लेकिन उन्होंने बहुत ही मज़बूती से खुद को संभाला हुआ था। एक माँ होने के नाते उनका दर्द शायद रघुवीर जी से भी कहीं ज्यादा था। नौ महीने कोख में रखने से लेकर उसे एक समझदार लड़की बनाने तक, कावेरी ने अपनी पूरी ज़िंदगी … Read more

एक बेनाम रिश्ते की दहलीज पर पश्चाताप

 विराज का गला सूख गया था। उसने भारी और रुंधे हुए गले से सिर्फ इतना कहा, “मुझे पता है मेरे पास तुम्हें कॉल करने का कोई हक नहीं है… लेकिन मुझे माफ कर दो अदिति। मैं उस दिन इंसान नहीं, एक अंधा और घमंडी जानवर बन गया था।”  दूसरी तरफ कुछ पलों का भारी सन्नाटा … Read more

अनकहा रिश्ता

 मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई थी। “हमारा पड़ोसी है ना रोहन… वो हमारी बहुत मदद करता है।” आंटी के ये शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे। मैं? मैं उनकी मदद करता था? मैं तो वो इंसान था जो उनसे बचने के लिए सीढ़ियों में छिप जाता था। मैं वो था जो उन्हें अपना … Read more

खामोश बुनियाद

“अरे रूचि, खुशकिस्मत तो ये हैं कि इन्हें मेरे जैसा पति मिला,” विक्रांत ने एक व्यंग्यात्मक हँसी हँसते हुए कहा, “वर्ना सोचो, किसी और से शादी होती तो आज भी किसी दो कमरों के फ्लैट में बर्तन मांज रही होतीं। ये तो मेरा विजन है, मेरी मेहनत है, जो आज ये महारानियों की तरह इस … Read more

एक अधूरी विदाई

यह सुनकर काव्या के आंसू छलक पड़े थे। यह खुशी के आंसू थे। बारह सालों की तपस्या पूरी होने वाली थी। कल रात भर वह सोई नहीं। उसने पूरा घर साफ किया, विवान की पसंद का गाजर का हलवा बनाया और अपनी उस लाल साड़ी को निकालकर इस्त्री किया जो विवान को बहुत पसंद थी। … Read more

अपना वजूद

सुमेधा ने सूटकेस की चेन बंद की और खड़ी हो गई। उसके सामने उसकी सास, विमला देवी, सीना ताने खड़ी थीं, जिनकी आँखों में गुस्सा और अविश्वास दोनों तैर रहे थे। पास ही सोफे पर सिर झुकाए बैठा था—निखिल। पैंतीस साल का एक हट्टा-कट्टा इंसान, जो इस वक्त किसी डरे हुए बच्चे जैसा लग रहा … Read more

सच्चा साथी

“आज जब मेरे पास गाड़ियाँ हैं, बांग्ला है, शोहरत है, तो आप सब यहाँ गुलदस्ते लेकर खड़े हैं। आप कह रहे हैं कि आप मेरे साथ थे? नहीं। आप मेरे ‘वक्त’ के साथ हैं, मेरे साथ नहीं। जब मेरा वक्त बुरा था, तो मैं आपके लिए अजनबी था। आज मेरा वक्त अच्छा है, तो मैं … Read more

डाउन पेमेंट

“सुधा, अगले हफ्ते बिल्डर को डाउन पेमेंट का चेक देना है। पंद्रह लाख रुपये। एफडी मैच्योर हो गई है, और पीएफ का पैसा भी आ गया है। भगवान की दया से, इस बार दिवाली हम अपने नए फ्लैट ‘आशियाना’ में मनाएंगे,” राघव ने डायरी बंद करते हुए चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान के साथ … Read more

error: Content is protected !!