त्याग की मूरत

कमरे में एक भारी सन्नाटा छा गया। प्रेरणा के चेहरे पर एक अजीब सी शून्यता आ गई। उसने अपनी आँखों में आए आँसुओं को पलकों के पीछे ही रोक लिया। कुछ पल बाद, प्रेरणा ने गहरी सांस ली, अपने चेहरे पर एक झूठी लेकिन मजबूत मुस्कान लाई और आशा  के पास जाकर उसके सिर पर … Read more

पछतावा

रात के ग्यारह बज चुके थे। पूरे घर में खामोशी छा गई थी। सास-ससुर को दवाइयां देकर सुलाने, ननद और देवर के नखरे उठाकर उन्हें मनपसंद भोजन कराने, और अंत में पति को खाना परोसने के बाद, मीरा ने रसोई समेटी थी। हमेशा की तरह बर्तन मांजने के बाद जो थोड़ा-बहुत ठंडा खाना बचा था, … Read more

 मेरा घर सचमुच किसी स्वर्ग से कम नहीं है

“तुम कहते हो कि वो चिड़चिड़ी हो गई है? ज़रा सोचो, जिस लड़की को तुम शादी से पहले रेस्टोरेंट, सिनेमा और पार्क में घुमाते थे, पत्नी बनने के बाद तुम उसे कहां ले जाते हो? रिश्तेदारी की शादियों में जहां उसे घूंघट निकालकर सबकी जी-हुज़ूरी करनी होती है, मुंडन में, पूजा-पाठ में, या फिर किसी … Read more

संयुक्त परिवार

रघुनाथ जी ने मीरा के सिर पर हाथ रखते हुए उसे बीच में ही टोक दिया। “नहीं बेटी, गलती तुम्हारी नहीं थी। तुमने तो अपने पिता को दिया हुआ वादा आठ सालों तक बहुत ही खूबसूरती से निभाया। गलती मेरी थी जो मैं ये समझ नहीं पाया कि प्यार से सींचा हुआ पौधा जब बड़ा … Read more

नन्हा सा फ़रिश्ता

लगभग पाँच सालों के एक लंबे अंतराल के बाद मेरा अपनी कॉलेज की सबसे करीबी दोस्त स्मृति के घर जाना हुआ। हम दोनों की पोस्टिंग अलग-अलग शहरों में होने के कारण मिलना बहुत मुश्किल हो गया था, लेकिन इस बार जब मुझे देहरादून के एक सेमिनार में हिस्सा लेने का मौका मिला, तो मैंने सोच … Read more

घर को घर रहने दो

देविका जी को हर चीज़ एकदम परफेक्ट चाहिए होती थी। रोहन और अनन्या को अपने ही घर में किसी मेहमान की तरह रहना पड़ता था। सोफे पर बैठकर खाना मना था, क्योंकि कवर गंदे हो जाएंगे। बिस्तर पर सिलवटें नहीं पड़नी चाहिए। खिलौने खेलने के तुरंत बाद उनके डिब्बे में पैक हो जाने चाहिए। दोस्तों … Read more

खोखली बुनियाद – मंजू अग्रवाल

“भाभी, मुझे पता है आज आपको अपने भैया की बहुत याद आ रही होगी। लेकिन आप उदास मत होइए, समर भैया हैं ना, वो भी तो आपके भाई जैसे ही…” विशाखा अपने शब्द पूरे भी नहीं कर पाई थी कि उसे लगा उसने कुछ गलत कह दिया। लेकिन काव्या ने बहुत ही शांत स्वर में … Read more

अपनत्व

शारदा स्तब्ध रह गई। वह सुमेधा को और फिर उसके हाथ में उस चाय के कप और ताजे खाने को अवाक होकर देखती रही। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे। कहाँ सुबह से वह एक-एक घूंट चाय के लिए तरस रही थी, जलालत सह रही थी, और कहाँ इस अनजान लड़की … Read more

वो आंसू खुशी के थे

रघुनाथ जी मुस्कुराए, पर उस मुस्कान में एक अजीब सा दर्द था। उन्होंने बहुत ही धीमी लेकिन चुभने वाली आवाज में पूछा, “और… इंसानियत? आत्मीयता? क्या ये मशीन वो भी मंगवा सकती है? क्या ये बता सकती है कि तेरी मां जब रसोई में अकेले काम करती है, तो उसके दिल में अपने बेटे से … Read more

मुक़ाबला

सरिता ने काव्या का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके माथे को चूमते हुए कहा, “पागल लड़की! दुनिया का कोई भी डर, कोई भी ब्लैकमेलर एक माँ की ममता से बड़ा नहीं हो सकता। माना कि तूने लापरवाही की, लेकिन इस डर से तू अपने ही परिवार से कट जाएगी? जब भी ज़िंदगी में … Read more

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