दूसरा पिता – मुकेश पटेल
“बाबूजी! बाबूजी! बाहर बड़ी सी गाड़ी आकर रुकी है, शायद दीदी के होने वाले ससुर जी आए हैं!” बारह साल के रोहन ने हांफते हुए घर के छोटे से आंगन में आकर आवाज़ लगाई। आंगन में खटिया पर बैठे रमाकांत जी के हाथ से अख़बार छूट कर नीचे गिर गया। उनकी पत्नी सुशीला, जो रसोई … Read more